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लाभुकों तक कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच हुई मुश्किल, पश्चिमी सिंहभूम में आंदोलन करेंगे कई संगठन

Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम के विभिन्न इलाकों में भूख, कुपोषण के सवाल गहरे होते जा रहे हैं. जन कल्याणकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ भी सहज तरीके से ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है. इसे लेकर अब जन आंदोलन चलाया जायेगा.

शनिवार को चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में 9 प्रखंडों से आए 16 जन संगठनों के प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस संबंध में फैसला लिया. सभी जन संगठन मिलकर अब खाद्य सुरक्षा जनाधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम के बैनर तले आंदोलन चलायेंगे. इसके लिये अगले 2-3 महीने की कार्ययोजना तय की गयी.

बढ़ी बेरोज़गारी, आजीविका का संकट औऱ मिड डे पर हुआ असर

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खाद्य सुरक्षा जनाधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम के प्रतिनिधि सिराज दत्ता के अनुसार बैठक में में कई उल्लेखनीय चर्चा हुई. लॉकडाउन में बेरोज़गारी बढ़ी है. आजीविका की कमी हुई है. आंगनबाड़ी बंद हैं औऱ मिड डे मिल भी बाधित है. खासकर आंगनबाड़ी बंद रहने से बच्चों में भूख और कुपोषण की स्थिति और बढ़ गयी है.

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एक ओर समूचा देश पश्चिमी सिंहभूम के खनिज पदार्थों पर चलता है वहीं दूसरी ओर, यहां के आदिवासी-मूलवासी देश में सबसे अधिक कुपोषित हैं. गरीबी का भयावह संकट उनके समाने है.

खाद्य संकट और पोषण असुरक्षा की स्थिति में जी रहे परिवारों के लिए राशन, मिड डे भोजन, आंगनवाड़ी सेवाएं, पेंशन, मनरेगा में काम जीवनरेखा के समान है.

केंद्र और राज्य की पिछली सरकार ने लगातार इन अधिकारों और योजनाओं को कमज़ोर किया किया है. योजनाओं को आधार से जोड़ना, आंगनवाड़ी और मिड डे में अंडों की संख्या में कमी करना इसके उदाहरण हैं.

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मनरेगा में काम का संकट

खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम प्रशासन को गंभीरता दिखाने की जरूरत है. राशन कार्ड डिलीट हो जाना, अधिकार से कम अनाज मिलना, मनरेगा भुगतान लंबित होना और समय पर काम न मिलना, वृद्ध, एकल महिलाओं और विकलांगों को पेंशन न मिलना जैसी शिकायतें आम हैं.

प्रशासन ने हरे राशन कार्ड की प्राथमिक सूची को अब तक सार्वजानिक नहीं की है. मनरेगा में रोज़गार की कमी के कारण प्रवासी मज़दूरों को फिर से गाँव छोड़ के पलायन करना पड़ रहा है.

खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच के जरिये अब जन अधिकारों के हनन के विरुद्ध संयुक्त तौर पर आवाज़ उठायी जायेगी. प्रशासन और सरकार को जवाबदेह बनाया जायेगा. एक व्यापक जन आन्दोलन भी शुरू किया जायेगा.

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