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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय में वेबिनार का आयोजन

HAZARIBAGH: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया जिसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मी व बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर मुख्य वक्ताओं आचार्य डॉ प्रीति विश्वकर्मा, आचार्य अभिषेक शर्मा, बंगलुरू से योग से जुड़ी कई अहम बातें सुनीं. कार्यक्रम की शुरुआत हिंदी विभाग की प्राध्यापिका डॉ रोज़ीकांत ने मुख्य वक्ताओं, अतिथियों व कार्यक्रम में शामिल सभी का स्वागत कर किया. बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पीके नायक ने स्वस्थ्य जीवन पाने की दिशा में योग को अहम बताते हुए कहा कि नियमित योग हर एक शख्स के लिए बेहद ज़रूरी है. वहीं मुख्य अतिथि के रूप में ही कार्यक्रम में शामिल विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुनीष गोविंद ने योग को निरोग जीवन का आधार बताया और कहा कि आधुनिक जीवन में पहले के मुकाबले योग की अहमियत अधिक बढ़ गई है. उन्होंने कहा कि अब युवाओं में भी योग को लेकर रूझान अपेक्षाकृत तेजी से बढ़े हैं जो आने वाले समय के लिए बेहतर साबित हो सकता है.

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मुख्य वक्ता के तौर पर कार्यक्रम में जुड़ीं आचार्य डॉ प्रीति विश्वकर्मा ने योग से जुड़े कई अहम बातों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि केवल योग से शरीर ही स्वस्थ नहीं रहता बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव शरीर और मस्तिष्क पर भी पड़ता है. यही वजह है कि अब तेजी से लोग दुनिया भर में इसे अपना रहे हैं.  उन्होंने कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार इम्यूनिटी बढ़ाए जाने की बात कोरोना काल के दौरान कही जाती रही, लेकिन योग एक ऐसा माध्यम है जिसका नियमित अनुपालन करने से इम्यूनिटी पावर स्वत: बढ़ जाता है. शारीरिक स्वास्थ्य के साथ साथ भावनात्मक सद्भाव बनाने में योग को उन्होंने मददगार बताया और सभी से स्वस्थ रहने के लिए नियमित योग करने की सलाह दी. दूसरे मुख्य वक्ता के रूप में बंगलुरू से कार्यक्रम में जुड़े आचार्य अभिषेक शर्मा ने योग को भारतीय प्राचीन परंपराओं का अमूल्य उपहार बताते हुए कहा कि हर वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस नई थीम के साथ मनाया जाता रहा है. सद्भाव और शांति, युवाओं को कनेक्ट करें, स्वास्थ्य के लिए योग, सेहत के लिए योग-घर से योग के बाद अब इस बार की थीम पुनः स्वास्थ्य के लिए योग रखा गया, जो योग की अहमियत को साबित करता है. उन्होंने कहा कि मन-मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए प्राचीन भारत के ऋषि-मुनियों ने योग के उच्चतम विधा को अपनाया और स्वयं को आत्मनियंत्रित किया. उन्होंने कहा कि योग शरीर की इंद्रियों को नियंत्रित करने की क्षमता प्रदान करता है जिससे निरोग रहा जा सकता है. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष नेहा सिन्हा ने कार्यक्रम का समापन किया.

 

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