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निविदाओं और प्रक्रियाओं का मकड़जालः बिहार सरकार ने राजगीर वालों को पिलाया गंगा जल, झारखंड में बाबा के दर तक अब नहीं पहुंच पायी है गंगा

Amit Jha

Ranchi: घोषणा एक समय, कार्य का आवंटन भी एक ही समय, लेकिन बिहार में पटना से राजगीर तक गंगाजल की सप्लाई 27 नवंबर से शुरू हो चुकी है. इधर, झारखंड में साहेबगंज से देवघर स्थित बाबा दरबार तक गंगा नहीं पहुंच सकी है. साहेबंगज से गोड्डा, देवघर और दुमका तक लोगों के घरों तक पहुंचायी जाने वाली यह योजना अब तक निविदा प्रक्रियाओं के मकड़जाल में ही फंसी हुई है. हालांकि पेयजल विभाग, झारखंड का दावा है कि मार्च, 2024 तक वह इस काम को पूरा करवा लेगा. मतलब अगले 16 महीनों में संताल के घर-घर में गंगाजल पहुंच जायेगा.

बिहार में ऐसे बना इतिहास

बिहार ने इतिहास रच दिया है. इसके तहत बिहार के लाखों लोगों को सुविधा मिलेगी. पूर्व में गंगा का पानी दक्षिण बिहार में पहुंच नहीं पाता था. पानी की कमी के कारण लोगों को सालोंभर पेयजल समस्या का सामना करना पड़ता था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस पर पहल की. 27 नवंबर को अपने ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा जल आपूर्ति योजना का राजगीर में उद्घाटन भी कर किया. योजना के दूसरे चरण में जून 2023 तक नवादा में भी हर घर गंगाजल पहुंचाने का लक्ष्य है. बिहार सरकार के जल संसाधन तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री संजय कुमार झा के मुताबिक ‘गंगा जल आपूर्ति योजना’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘भगीरथ प्रयास’ है. नीतीश कुमार ने दूरगामी अभियान ‘जल-जीवन-हरियाली’ के तहत गंगा नदी के अधिशेष जल को दक्षिण बिहार के जल संकट वाले शहरों ले जाकर पेयजल के रूप में उपयोग करने की अनूठी परिकल्पना की. सीएम नीतीश की अध्यक्षता में दिसंबर 2019 में गया में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में अतिमहत्वाकांक्षी ‘गंगा जल आपूर्ति योजना’ को मंजूरी दी गई. मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में जल संसाधन विभाग ने तत्परता से काम करते हुए इतनी बड़ी योजना को कोरोना काल की चुनौतियों के बावजूद तीन साल से कम समय पूरा करा दिया है. गंगा जल पाइपलाइन के जरिये 151 किलोमीटर सफर तय करके राजगीर, गया और बोधगया के जलाशयों में पहुंच गया है, जहां से यह शोधित होकर शुद्ध पेयजल के रूप में रोज लाखों लोगों की प्यास बुझाएगा.

क्या हैं हालात

झारखंड में रघुवर सरकार के समय ही गंगा नदी का पानी संताल में घर घर तक पहुंचाने की योजना बनी थी. सोन नदी, गढ़वा से गिरिडीह तक पानी ले जाने का विचार बना था. हालांकि भौतिक रुप से सफलता नहीं मिली थी. पेयजल विभाग, झारखंड के मुताबिक 2020-21 में गंगा का पानी साहेबगंज से संताल तक ले जाने की योजना पर काम आगे बढ़ा. केंद्र-राज्य के सहयोग से (50-50) इस पेयजलापूर्ति स्कीम पर काम शुरू हुआ है. 750 करोड़ की इस योजना के लिए फिर से रिवाइज होने किए जाने के बाद टेंडर जारी किये जाने की तैयारी है. मार्च 2024 तक काम को धरातल पर उतारे जाने का भरोसा है.

क्या कहता है विभाग

साहेबगंज के पेयजल विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर गोविंद कच्छप ने न्यूज विंग से कहा कि टेंडर जारी होने ही वाला है. जिसे कार्य आवंटन होगा, मार्च 2024 तक उसे पूरा करना होगा. इसके बाद उम्मीद है कि साहेबगंज के 3 प्रखंड, समूचे गोड्डा जिले के अलावे दुमका के 2 प्रखंडों के लोगों को गंगा जल की आपूर्ति हो सकेगी.

क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि

राजमहल विधायक अनंत ओझा कहते हैं कि गंगा किनारे के लोग ही प्यासे बैठे हैं. पेयजल विभाग की सुस्ती का नतीजा है कि गंगा किनारे के बिहारी गांव और अन्य स्थानों पर ग्रामीण आर्सेनिक, फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं. विधानसभा से लेकर अलग-अलग प्लेटफॉर्मों पर भी बात उन्होंने रखी पर नतीजा नहीं निकला है. शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मेगा जलापूर्ति योजना पर ग्रहण लगा हुआ है. गोड्डा स्थित अडानी प्लांट के लिए कंपनी की ओर से साहेबगंज से गोड्डा तक पाइपलाइन बिछाये जाने का काम तकरीबन पूरा होने की खबर है पर पेयजल विभाग गंगा से लोगों की प्यास बुझाने में कागजी कोरम में ही अटका बैठा है.

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