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खूंटी लोकसभा: कमजोर संगठन, अराजक चुनाव प्रबंधन, संकुचित कैंपेन, उम्मीदवार की पहचान नहीं- बने कांग्रेस की हार के कारण

तीन गांवों में वोट बहिष्कार ने डुबो दी कांग्रेस की नैया 

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पार्टी ने देर से की उम्मीदवार की घोषणा, प्रचार सामग्री का रहा आभाव, बूथ से पोलिंग एजेंट रहे नदारद

Pravin kumar

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Ranchi:  खूंटी लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद कई गांव में मायूसी है.  निराशा चेहरे पर साफ झलकती है. ग्रामीण इलाकों में चुनाव परिणाम की चर्चा आम है. महागठबंधन के नाम पर विपक्षी दल ने एक ऐसे उम्मीदवार को समाने लाया जो, जब खूंटी जल रहा था तो वे घर में दुबके थे. वे कभी जनता के साथ उनकी लड़ाई में हिस्सेदार नहीं बने. फिर भी लोग घर से निकले और महागठबंधन के नाम पर कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया. इसके बाद अगर कांग्रेस सही ढंग से चुनाव प्रबंधन करती तो चुनाव जीत जाती. कांग्रेस को उन इलाको में भी काफी वोट मिले हैं जहां पार्टी का नाम लेने वाला कोई नहीं था. कोचांग व वीरबांकी जैसे खूंटी लोकसभा के बीहड़, घने जंगल, वाले इलाके में जहां पांच साल पहले वोट का नाम लेने की हिम्मत किसी में नहीं थी, उन इलाकों में भी जोरदार मतदान हुआ. इन इलाको में पार्टियों के पोलिंग एजेंट भी नजर नहीं आये. खरसावां और तमाड़ विधानसभा में अर्जुन मुंडा को अप्रत्याशित बढ़त मिली. जबकि तोरपा, खूंटी, सिमडेगा, कोलेबिरा में कांग्रेस उम्मीदवार ने बढ़त बनाई.

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लचर चुनाव प्रबंधन हार का कारण बना

खूंटी लोकसभा चुनाव के परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में गये,  लेकिन भाजपा में विरोध का स्वर मतों की गिनती में भी दिखा. चुनाव परिणाम में जहां कम मतों के अंतर से भाजपा उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा चुनाव जीते वहीं पहली बार जर्जर संगठन का ढांचा रहते हुए रिकार्ड मत कांग्रेस के उम्मीदवार को मिला. खूंटी जिला में 32 प्रतिशत के करीब ईसाई वोटर हैं और इतने ही हिन्दू वोटर. वहीं 34 प्रतिशत के करीब सरना  है. वहीं एससी की संख्या भी 5 प्रतिशत और 2 प्रतिशत के करीब मुस्लिम है. कांग्रेस ने प्रचार के दैरान यह किया कि हिन्दू मतदताओं को अपने पक्ष में लाने का प्रयास नहीं किया. साथ ही भाजपा का इलाका मान कर कई इलाकों में प्रचार भी नहीं किया और लचर चुनाव प्रबंधन हार का कारण बना.

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प्रशासन और चुनाव आयोग की सांठगांठ से कालीचरण मुंडा की हारः रामकृष्ण चौधरी

खूंटी जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण चौधरी कहते हैं प्रशासन और चुनाव आयोग की सांठगांठ के कारण कालीचरण मुंडा की हार हुई है. वहीं संगठन के कमजोर होने के सवाल पर कहते हैं कि जिला में संगठन मजबूत है .इसी की बदौलत कांग्रेस को उम्मीद से कहीं ज्यादा वोट मिला. पत्थलगड़ी वाले दो तीन गांव में वोट बहिष्कार से कांग्रेस को नुकसान हुआ है. खूंटी जिला कांग्रेस आदिवासी सचिव नरेश तिर्की कहते हैं उम्मीदवार का नाम देर से घोषणा हुई, और उम्मीदवार के बारे में असमंजस की स्थिति से भी पार्टी को नुकसान हुआ है. आलाकमन अगर सही समय पर निर्णय लेता तो पार्टी प्रत्याशी एक लाख से अधिक वोट से जीतते. पत्थलगड़ी वाले गांव में कांग्रेस को जबरदस्त वोट मिला है.

हमने गठबंधन धर्म का पालन कियाः दिलीप मिश्रा

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भाजपा की जीत पर झारखंड विकास मोर्चा खूंटी जिला अध्यक्ष दिलीप मिश्रा कहते हैं हमने गठबंधन धर्म का पालन तन -मन- धन से किया. महागठबंधन उम्मीदवार को जिताने की कोई कसर नहीं छोड़ी. कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा को रनिया कर्रा इलाके में लोगों के बीच जोड़ने का काम किया. चुनाव कैंपेन के दौरान कई गांव में कालीचरण मुंडा से सवाल भी पूछे गये कि जब खूंटी जल रहा था तब आप कहां थे ना ही सीएनटी आंदोलन में आप नजर आए और ना ही पत्थलगड़ी को लेकर जब दमन हो रहा था तब आप घर से निकले. फिर भी महागठबंधन के नाम पर आपको वोट देंगे. कई बूथों पर पोलिंग एजेंट नहीं होने के सवाल पर कहते हैं पोकला कुंडी जैसे जगह पर जो कि रांची चाईबासा रोड से मात्र आधा किलोमीटर दूर है, उन जगह पर भी बूथ खर्च नहीं पहुंच पाया. जेएमएम विधायक तोरपा, खरसवां विधायक की भूमिका ठीक नहीं रही, फिर भी  झामुमो और झाविमो के संगठनिक ढांचे की बदौलत कांग्रेस चुनाव मैदान में टिक सका.

कांग्रेस उम्मीदवार ने बस एक बार दौरा कियाः राम सहाय

मारंगहादा के युवा राम सहाय टूटी कहते हैं कि चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार ने बस एक बार मारंगहादा का दैरा किया. चुनाव के समय इस क्षेत्र के तिलमा तरूप जैसे बूथ पर कांग्रेस के चुनाव एजेंट नहीं थे. कांग्रेस पार्टी की अति अत्मविश्वास ने भाजपा को जीतने का काम किया. चुनाव प्रचार के दैरान इलाके में कुछ स्थान को छोड़ कर कहीं भी कांग्रेस का पोस्टर,पर्चा नजर नहीं आया.

कैंपेन में नहीं दिखी सक्रियताः थियोडोर

पूर्व विधायक व मंत्री थियोडोर किड़ो कहते हैं, चुनाव के पूर्व टिकट की दावेदारी में कई नाम सामने आए लेकिन चुनाव के दौरान कैंपेन में वह सब नजर नहीं आये. प्रदीप बलमुचु भी जब राहुल गांधी आये तब मंच पर दिखे. पार्टी के कई नेताओं का सर्पोट भी उपर मन से था. कोलबीरा विधानसभा में हमलोगो ने पार्टी प्रत्याशी को लीड दिलाया. प्रशासन और चुनाव आयोग ने अर्जुन मुंडा को चुनाव जिताने का काम किया है. खूंटी विधानसभा कांग्रेस पार्टी के एआरओ बसंत सुरीन कहते हैं चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी की ओर से संसाधन मुहैया नहीं कराया गया. सैकड़ो कर्यकर्ता अपने पैसे से प्रचार कार्य में लगे रहे. मतगणना के समय भी पार्टी प्रत्याशी के द्वारा कार्यकर्ताओं को भोजन नहीं उपलब्ध कराया गया. फिर भी भूखे प्यासे पार्टी कार्यकर्ता रात काउंटिंग स्थल में रात तक डटे रहे.

कमजोर संगठन बना हार का कारण

तमाड़ के लक्ष्मीनारायण मुंडा कहते हैं कि खूंटी लोकसभा के परिणाम भले ही भाजपा के पक्ष में आये हों, लेकिन खूंटी की जनता की जीत हुई है. कांग्रेस का ढांचा पूरे इलाके में नहीं था. बूथ पर पोलिंग एजेंट नहीं थे. फिर भी जनता ने महागठबंधन के नाम पर कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया. तमाड़ में कांग्रेस के पिछड़ने का कारण पर कहते हैं, कालीचरण मुंडा तमाड़ से विधायक रह चुके हैं. ऐसे में उनकी अच्छाइयां और बुराइयां तमाड़ की जनता जनती है. साथ ही परासी जैसे इलाके में यह चर्चा आम थी कि कंपनी वाले ने ही अर्जुन और कालीचरण को दो दलो से प्रत्याशी बनवाया है. जिस कारण तमाड़ से कांग्रेस पिछड़ गयी.

कांग्रेस प्रचार में ही हार गयीः फुलचन मुंडा 

खूंटी जिला के डाडीगूटू पंचायत के मुखिया फुलचन मुंडा कहते हैं महागठबंधन के नाम पर किसी को भी वोट देने से पहले अब सोचना होगा. क्योंकि जिस पार्टी ने सही रूप से चुनाव प्रचार तक नहीं किया, वह जनता की आवाज को कैसे संसद तक पहुंचाएगी. हमलोगो ने कांग्रेस को वोट दिया. लेकिन कांग्रेस तो प्रचार में ही भाजपा से हार गयी. कांग्रेस क सबसे बड़ी गलती इस चुनाव में यह रही कि उसने सरना और हिन्दू वोटो को अपने पाले करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया. तिलमा गांव में परंपरगात रूप से भाजपा का वोट बैक रहा है. गांव में भाजपा के प्रति नराजगी दिख रही थी लेकिन प्रचार के दैरान उन इलाको को कांग्रेस उम्मीदवारों ने भुला दिया परिणाम समाने है.

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