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जल संसाधन विभाग ने खरकई और स्वर्णरेखा नदी के लिए 224 करोड़ की दी मंजूरी

Abunash Mishra

Jamsedpur : जल संसाधन विभाग 224 करोड़ की लागत से स्वर्णरेखा और खरकई के बायें तटबंध को बाढ़ और कटाव से रोकने के लिए सुरक्षा के उपाय करेगा. इसके लिए स्थल निरीक्षण और तकनीकी स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है.

स्वर्णरेखा पर चार स्लुइस गेट बनेंगे

स्वर्णरेखा नदी पर मानगो से बालीगुमा तक 7780 मीटर का काम होगा जिसमें 92 करोड़ की लागत से चार स्लुइस गेट बनेंगे.  .जिससे बाढ़ को नियंत्रित किया जा सके. दरअसल बाढ़ की स्थिति में पानी सीधे शहर में घुस जाता है और विभाग मानता है कि इससे बाढ़ को शहर में जाने से रोका जा सकेगा.

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खरकई पर आठ स्लुइस गेट

खरकई नदी पर 132 करोड़ की लागत से आठ स्लुइस गेट बनाने की योजना है जो आसंगी से टोलब्रिज के बीच बनेंगे. इसकी लंबाई 5460 मीटर की है.  सारा निर्माण नदी के लेफ्टबैंक पर होगा. जहां  तटबंध की उंचाई ज्यादा होगी वहां सुरक्षा निर्माण नहीं किया जायेगा.

 क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी

स्वर्णरेखा परियोजना के सचिव मनोज सिंह का कहना है कि प्रस्ताव को केंद्रीय जल आयोग को भेजा गया है. इसकी जांच आयोग के नियमानुसार होनी बाकी है. स्वीकृतप मिल जाने के बाद नाबार्ड जैसी वित्तीय संस्था से सहायता ली जायेगी जिसके बाद निर्माण शुरू हो जायेगा.

आयुक्त के पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार बैठक

आदित्यपुर नगर निगम में आयुक्त के पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार बोर्ड की बैठक हुई. 6 माह में पहली बार हुई इस बैठक में सभी वार्डों में 10 लाख तक के निर्माण कार्य को मंजूरी दी गयी. साथ ही वार्डों की सड़क के लिए भी 20 लाख रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी मिली.  हालांकि बैठक में आये सभी पार्षदों ने अपने वार्डों से जुड़े कई प्रस्ताव पेश किये.  नालों की साफ-सफाई और कचरे के उठाव जैसी समस्या पर बहस तो हुई,  लेकिन कोई ठोस फैसला  सामने नहीं आया. आदित्यपुर में 35 वार्ड हैं और सभी इलाकों में बजबजाती नालियां और कचरे की समस्या आम है,  जिस पर अगली बैठक में सुझाव देने को कहा गया.

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 समय पर पेमेंट बना बड़ा मुद्दा

वार्ड पार्षदों ने बोर्ड के सामने सुझाव भी रखे,  जिसमें ठेकदारों को समय पर पेमेंट करने की जमकर वकालत की गयी. पार्षदों की दलील थी कि पेंमेंट में देरी से ठेकेदारों के मजदूर काम पर नहीं आते जिसके चलते काम पूरा होने में समय लगता है.अगर भुगतान समय पर होगा तो कोई भी ठेकेदार मजदूरों के अभाव का बहाना नहीं बना सकेगा.

इसके अलावा नालियों की सफाई और कचरे के उठाव की निगरानी के लिए सुपरवाइजर नियुक्ति का मामला भी गर्माया,   ताकि ठेकेदारों के काम पर नजर रखी जा सके. लेकिन ईस पर कोई टोस नतीजे पर सहमति नहीं बनी. आने वाले त्यौहारी सीजन को देखते हुए आयुक्त ने सभी को सहयोग के साथ काम करने की अपील की.

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