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जल जीवन मिशन : एक साल में 10% घरों में ही पहुंचा वाटर कनेक्शन, 54 लाख घरों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य

Amit Jha

Ranchi. जल संकट से जूझते घरों में पानी पहुंचाने को केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की योजना शुरू की. अगस्त 2019 में शुरू हुई योजना को एक साल हो चुके हैं. 2024 तक देश के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से पानी की सुविधा पहुंचाने का टारगेट है.

इस योजना में झारखंड का परफॉर्मेंस अब तक कमजोर दिखा है. ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर में नल से जल की सुविधा दिलाने के मामले में लक्ष्य का महज 10 फीसदी ही पूरा किया जा सका है. देशभर में ओवरऑल परफॉर्मेंस के मामले में नीचे से झारखंड का पांचवां स्थान है. हालांकि राज्य में अब अनुसूचित दर (SOR-शिड्यूस ऑफ रेट) तय हो जाने के बाद काम में तेजी आने की उम्मीद बंधी है. विभाग ने बेहतर प्रदर्शन करने वाले टॉप राज्यों में आने और रैंकिंग सुधारने की तैयारी शुरू की है.

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54 लाख घरों में नल कनेक्शन का लक्ष्य

जल जीवन मिशन के तहत राज्यभर में 54.10 लाख घरों में नल से पानी कनेक्शन देने का टारगेट है. अगस्त 2019 से अगस्त 2020 के दौरान इस लक्ष्य के विरूद्ध 5.14 लाख लोगों को ही स्कीम का लाभ मिला. यानी एक साल में 9.50 प्रतिशत लोगों तक ही योजना पहुंच पायी है. अब भी 48,95,038 घरों में पानी का कनेक्शन दिये जाने का काम बाकी है.

पश्चिम बंगाल और यूपी से बेहतर झारखंड

जल जीवन मिशन प्रोग्राम में तेलंगाना ने अब तक सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है. 98 फीसदी टारगेट को उसने एक साल में पूरा कर लिया. इसके अलावा गोवा ने 89 प्रतिशत, पुंडूचेरी ने 87 प्रतिशत लक्ष्य को पा लिया है. झारखंड के पड़ोसी राज्यों में बिहार ने अपने टारगेट का 45 फीसदी टारगेट पूरा कर लोगों को लाभान्वित कर दिया है. सबसे खराब परफॉर्मेंस करने वाले राज्यों में मेघालय और पश्चिम बंगाल टॉप (2-2 प्रतिशत) पर है. इसके बाद असम (3%), यूपी 4% लद्दाख और नागालैंड (5%) तथा झारखंड (9.50%) का स्थान है.

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572 करोड़ का आवंटन

जल जीवन मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिये झारखंड को केंद्र की ओर से 572.24 करोड़ रुपये का आवंटन तय किया गया है. इसमें से अब तक 62.34 करोड़ रुपये राज्य को जारी किये जा चुके हैं. राज्य सरकार ने भी इसी अनुपात में अपने हिस्से की राशि जारी कर दी है.

क्या कहता है पेयजल विभाग

प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट (PMU, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के अनुसार पिछले साल राज्य में विधानसभा के चुनाव आ गये. नयी सरकार आयी. इस साल 25 जनवरी से SOR के चक्कर में सारे काम पेंडिंग होते चले गये. SOR में गड़बड़ी की शिकायत राज्य सरकार के पास आयी थी. इसके कारण पेयजल सहित सभी विभागों के काम पर रोक लगा दी गयी थी.

24 सितंबर को सरकार ने अगली व्यवस्था आने तक 2018 के आधार पर ही काम कराये जाने का फैसला लिया है. मिशन निदेशक (जल) सुधाकांत के अनुसार सरकार एसओआर संबंधी परेशानी थी. अब प्राक्कलन तैयार करने से लेकर कार्य की स्वीकृति, टेंडर और भुगतान तक का काम तेजी से बढ़ेगा. ऐसे में निश्चित तौर पर अब सभी योजनाओं में तेजी आयेगी. जल जीवन मिशन में झारखंड की रैंकिंग बेहतर होगी.

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