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सफाईकर्मियों के पैर धोना असंवैधानिक, उन्हें तुच्छ दिखाकर खुद को महिमामंडित करने जैसा !  

शशि थरूर ने ट्वीट कर पूछा है कि मोदीजी, आप सफाईकर्मियों के चरण धो चुके हैं. क्या आप उन्हें बेहतर नौकरियां भी दिलवाएंगे? जिग्नेश मेवानी ने लिखा, दलितों और पिछड़ों को सम्मान भरा रोजगार चाहिए, आपका बाह्मणवाद नहीं.

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NewDelhi : प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कुंभ मेले में पांच सफाईकर्मियों के पांव पखारे. पैर धेाकर उनके पांव पोछे. साथ ही पीएम मोदी ने कुंभ मेले में उनके विशेष योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया. मोदी के इस कदम की राजनीतिक गलियारों और आम जनता में अपने-अपने हिसाब से चर्चा की जा रही है. एक तबका इसे एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश बता रहा है. साथ ही आलोचना भी की जा रही है कि चरण धोने की बजाय प्रधानमंत्री को उनके लिए रोजगार की व़्यवस़्था करनी चाहिए.  कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट कर पूछा है कि मोदीजी, अब जब आपसफाईकर्मियों के चरण धो चुके हैं. क्या आप उन्हें बेहतर नौकरियां भी दिलवाएंगे?   इस क्रम में गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवानी ने लिखा, दलितों और पिछड़ों को सम्मान भरा रोजगार चाहिए, आपका बाह्मणवाद नहीं. आम आदमी पार्टी के राज्‍यसभा सांसद संजय सिंह लिखते हैं कि आज भी हमारे जवान शहीद हो रहे हैं, अरुणाचल जल रहा है ये बंदा सूट बूट में गंगा स्नान और फोटो खिंचाने में व्यस्त है. लिखा कि पहले रोहित वेमुला को आत्महत्या के लिए मजबूर करो, चुनाव आये तो पैर धोओ.

प्रधानमंत्री को सफाई कर्मियों और दलितों के पैर नहीं धोने चाहिए

पत्रकार हृदयेश जोशी ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर इस बारे में  रमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता बेजवाड़ा विल्सन के विचार रखे हैं. सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापक  विल्सन के अनुसार कुंभ में सफाईकर्मियों के पैर धोना असंवैधानिक है. यह उन्हें तुच्छ दिखाकर खुद को महिमामंडित करने जैसा है.  बता दें कि विल्सन कई दशकों से मैला उठाने के काम में लगे लोगों के बीच काम कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें देश विदेश में सम्मानित किया जा चुका है. विल्सन के अनुसार प्रधानमंत्री को सफाई कर्मियों और दलितों के पैर नहीं धोने चाहिए बल्कि उनसे हाथ मिलाना चाहिए. पैर धोने से कौन ग्लोरिफाई  होता है. प्रधानमंत्री ही ग्लोरिफाइ होते हैं. कहा कि वह सफाईकर्मियों के पांव पकड़ते हैं तो वह यह संदेश दे रहे हैं कि आप (सफाईकर्मी) बहुत तुच्छ हैं और मैं महान हूं.  इससे किसका फायदा होता है?  इनके पैर धोकर वह खुद को महान दिखा रहे हैं. यह बहुत खतरनाक विचारधारा है.

हर पांच दिन में गटर में एक सफाईकर्मी की मौत हो रही है

संसद द्वारा गठित नेशनल कमीशन फॉर सफाई कर्मचारी  के अनुसार हर पांच दिन में गटर में जाकर सफाई करने वालों में से एक आदमी की मौत हो रही है.  बेजवाड़ा विल्सन कहते हैं किएक लाख 60 हज़ार महिलाएं ड्राइ लैट्रिन साफ कर मैला ढो रही हैं.  उनके काम करने के हालात सुधारने के लिए सरकारें कुछ नहीं करतीं.  पिछले दो महीनों में 13 लोगों की मौत हुई है. विल्सन के अनुसार पैर पकड़ने जैसी नेताओं की ये हरकतें बहुत ग़लत और असंवैधानिक हैं. विल्सन ने कहा कि राहुल गांधी हों या नरेंद्र मोदी दोनों को अम्बेडकर का अध्ययन करना चाहिए. संविधान कहता है कि सब बराबर हैं लेकिन जब कोई इस तरह सफाईकर्मियों के पैर धोता है तो यह एक बिल्कुल ग़लत है.  यह ड्रामेबाज़ी बन्द होनी चाहिए.  उनके अनुसार यह दलितों को मैला उठाने के काम में लगाये रखने को ही प्रोत्साहित करने जैसा है.  इस तरह पैर धोने से सफाईकर्मी) क्या सोचेंगे? यही ना कि मैला ढोना बड़ा महान काम है.

मैं आपकी सेवा करता रहूं, यही मेरी कामना है

बता दें कि संगम में डुबकी लगाने के बाद गंगा पंडाल पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आज जिन सफाईकर्मी भाइयों-बहनों के चरण धुलकर मैंने वंदना की है, वह पल मेरे साथ जीवनभर रहेगा.  उनका आशीर्वाद, स्रेह, आप सभी का आशीर्वाद, आप सभी का स्रेह मुझपर ऐसे ही बना रहे, ऐसे ही मैं आपकी सेवा करता रहूं, यही मेरी कामना है.  यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री की प्रशंसा में महाकवि दिनकर की एक कविता भी पढ़ी. कलम आज उनकी जय बोल, अंधा चकाचौंध का मारा, क्या जाने इतिहास बेचारा, साखी हैं उनकी महिमा के, सूर्य चंद्र भूगोल खगोल, कलम आज उनकी जय बोल…का उल्लेख किया. सीएम योगी ने कहा, जिन्होंने पूरा जीवन भारत माता के लिए सर्मिपत किया हो, प्रयागराज कुंभ का यह भव्य आयोजन जिस रूप में प्रस्तुत हुआ है, इसके बारे में पहली बार अवधारणा स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने पेश की थी.

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