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पार्षद नहीं बनने देना चाहते वार्ड कमिटी, बना रहे वोटर लिस्ट में सुधार का बहाना

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Ranchi : राजधानी के विकास के लिए सभी वार्डों में बनने जा रहे वार्ड कमिटी का पार्षदों के समूह विरोध करने लगे हैं. इसके लिए इन्होंने वोटर लिस्ट में सुधार पर जोर दिया है. हालांकि माना यह जा रहा है कि इसके पीछे पार्षदों की मंशा वार्डों में बने अपने एकाधिकार को बचाये रखना है.

बड़ा सवाल यह भी है कि इसी वोटर लिस्ट पर पार्षद अपने क्षेत्र में चुनाव जीते थे. लेकिन आज इसी लिस्ट पर वे सवाल उठाने लगे हैं. दरअसल सारा खेल पार्षदों का अपने वार्ड में बने एकाधिकार को लेकर है.

वहीं कमिटी बनाये जाने पर इसपर अड़चन आना तय है, क्योंकि कमिटी के सदस्य पार्षदों से सहमत नहीं होते हैं, तो इनके कामों में रूकावट उत्पन्न बन सकती है. जिसका डर इन्हें सताने लगा है.

शनिवार को वार्ड 34 के पार्षद विनोद सिंह के आवास पर आयोजित एक बैठक में उपस्थित 29 पार्षदों ने एकमत से कहा है कि वोटर लिस्ट में सुधार बिना वार्ड कमिटी बनाया जाना संभव नहीं है.

इसमें हुस्ना आरा (वार्ड 4), सुजाता कच्छप (वार्ड 07), अर्जुन कुमार यादव (वार्ड 10) नजिमा रजा (वार्ड 16), सुनील यादव (वार्ड 20), मो. एहतेशाम (वार्ड 21), अरूण झा (वार्ड 26), ओम प्रकाश (वार्ड 20), विनोद कुमार सिंह (वार्ड 34) प्रमुखता से शामिल है.

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विभाग के निर्देश के बाद निगम ने मांगा है आवेदन

राजधानी के आम लोगों को विकास से जोड़ने के लिए रांची नगर निगम ने अपने सभी 53 वार्डो में वार्ड कमेटी बनाने का निर्देश दिया है. नगर विकास विभाग ने इसके लिए निगम को वार्ड के लोगों से आवेदन लेने का निर्देश दिया है. विभिन्न वार्डों में रहने वाले शहर के जिम्मेदार लोग निगम में आवेदन करेंगे.

हालांकि आवेदन लेने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है. लेकिन इसके पहले ही पार्षदों ने कई कारणों का बहाना बनाकर विरोध शुरू कर दिया है. कमेटी बनने के बाद निगम द्वारा तय की योजनाओं में वार्ड के लोगों की सीधी भागीदारी हो जायेगी.

इससे पार्षदों की मनमानी पर रोक लगना तय है. प्रत्येक वार्ड के चार बूथों पर 1 सदस्य का चयन किया जाएगा. यानि अगर 1 वार्ड में 16 बूथ हैं, तो वहां से चार प्रतिनिधियों का चयन वार्ड कमिटी के लिए किया जाएगा.

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पहले ही पार्षद कर चुके हैं विरोध

गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद पहली बार निगम का चुनाव वर्ष 2008 में हुआ था. उस समय भी वार्ड कमेटी बनाने का प्रावधान था. हालांकि ना तो पार्षद और ना ही निगम के अधिकारियों ने इसपर ध्यान दिया. इसके बाद झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत पहली बार 2013 में निगम का चुनाव हुआ. उस समय भी वार्ड समिति बनाने का प्रयास किया गया. लेकिन पार्षदों ने इसे बनने ही नहीं दिया.

हालांकि विभाग ने सख्ती दिखाते हुए कहा है कि वार्ड कमेटी नहीं बनने के एवज में किसी भी वार्ड में फंड खर्च नहीं होगा. विभाग के सख्त रुख को देखते हुए ही इसबार निगम वार्ड कमेटी बनाने पर जुट गया है.

वोटर लिस्ट में सुधार का बहाना बना रहे पार्षद

वार्ड कमिटी के विरोध के लिए पार्षदों ने इस बार वोटर लिस्ट में सुधार का बहाना बनाया है. सभी 29 पार्षदों ने इस विषय पर भी चर्चा की. कहा कि वार्ड समिति के गठन से पहले नगर विकास विभाग को वोटर लिस्ट को ठीक करने पर ध्यान देना चाहिए था. लेकिन बिना इसमें सुधार किये ही विभाग ने वार्ड समिति बनाने का निर्देश दे दिया. इससे वार्ड की जनता में भ्रम की स्थिति बन गयी है.

पार्षदों का कहना है कि अगर कोई जनता संबंधित वार्ड में रहता है, तो उसका वोटर लिस्ट दूसरे वार्ड का है. ऐसे में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति से कमेटी का गठन करना असंभव प्रतीत हो सकता है. लेकिन यह भी तय है कि इसी वोटरों लिस्ट के सहारे पार्षदों का भी चुनाव हुआ है.

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