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कुपोषण से जंग: बंद है रेडी टू इट सप्लाई, 15 माह से पोषाहार राशि बकाया

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Palamu: पांच साल तक के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा देने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केन्द्रों का गठन किया गया है. सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों को प्ले स्कूल की तर्ज विकसित करने की योजना बनायी जा रही है, लेकिन यह तभी संभव है, जब सरकार और उसके मातहत अधिकारी-पदाधिकारी इस दिशा में समय से काम करें. पलामू जिले में ऐसा दूर-दूर तक होता नहीं दिख रहा है. इसका अंदाजा आंगनबाड़ी केन्द्रों को पोषाहार की राशि भुगतान में कछुआ गति से लगाया जा सकता है. ऐसे में यहां कहना गलत नहीं होगा कि पोषाहार और रेडी टू ईट के अभाव में कुपोषण से लड़ने के लिए जंग छेड़ दिया गया है.

क्यों नहीं आवंटित होती पोषाहार राशि?

दरअसल, बाल विकास परियोजना कार्यालय में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुन गया है कि कोई भी कार्य बिना चढ़ावा के पूरा नहीं होता. समय से रुपये का आवंटन होने के बावजूद बिना अवैध लेन-देन इसके वितरण में महीने लग जाते है. पोषाहार की राशि देने में कुछ इसी तरह की परेशानी अबतक सामने आयी है. इसका खामियाजा आंगनबाड़ी सेविकाओं को भुगतान पड़ रहा है. अब इन आंगनबाड़ी केन्द्रों से बच्चे कटते जा रहे हैं.

15 माह से पोषाहार राशि का बकाया 

बाल विकास परियोजना हुसैनाबाद व हैदरनगर के आंगनबाड़ी केंद्रों का सबसे बुरा हाल है. चालू वित्तीय वर्ष में आठ माह से रेडी टू इट और पोषाहार की राशि नहीं मिली है, जबकि वित्तीय वर्ष के सात महीने की पोषाहार राशि का भुगतान अबतक बाधित है. उधार के भरोसे माता समितियों ने पोषाहार खरीद कर केंद्रों का संचालन किया, लेकिन इधर दो माह से दुकानदारों ने भी उधार देना बंद कर दिया है.

प्रत्येक सेविका पर 56 हजार रुपये दुकानदारों का बकाया

लगातार पोषाहार राशि बकाया रहने के कारण आंगनबाड़ी सेविका परेशान हैं. पिछले साल सात माह का व चालू वित्तीय वर्ष में आठ माह का बकाया राशि अब बढ़कर प्रत्येक आंगनबाड़ी सेविका पर लगभग 56-56 हजार रुपये का कर्ज दुकानदारों का हो गया है. केन्द्रों में किसी तरह की सुविधा नहीं मिलने पर बच्चों की संख्या हर दिन कम होते जा रही है. गर्भवती और धातृ महिलाओं का तो केन्द्रों में आना-जाना अब नहीं के बराबर हो गया है.

घटिया अंडा नहीं खाते बच्चे

केन्द्रों पर आने वाले बच्चे अंडा की क्वालिटी घटिया देखकर उसे खाने से परहेज करते हैं. बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि केन्द्र से मिलने वाला अंडा सड़ा हुआ रहता है. उससे बदबू आती है. बच्चे उसे पसंद नहीं करते. नाश्ता और मध्याहन भोजन भी अब नहीं मिलता.

क्या-क्या मिलता है आंगनबाड़ी केन्द्रों से

आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 0 से लेकर तीन साल तक के बच्चों को नाश्ता और दोपहर का भोजन देने का प्रावधान है, जबकि 3 से 6 वर्ष साल तक के बच्चों और गर्भवती और धातृ महिलाओं को रेडी टू ईट दिया जाता है. खिचड़ी या भोजन में इस्तेमाल होने वाले चावल पीडीएस दुकानदार देते हैं, जबकि अन्य सामान सेविका को खुद खरीदने पड़ते हैं. पीडीएस से मिलने वाला चावल भी तीन से चार महीने में मिलता है. ऐसे में केन्द्रों का सही से संचालन करना अब टेढ़ी खीर साबित होने लगा है.

ग्रामीणों का आक्रोश झेलती हैं सेविकाएं   

पोषाहार व रेडी टू ईट केंद्र में नहीं आने से ग्रामीणों का आक्रोश आंगनबाड़ी सेविकाओं को झेलना पड़ता है. सेविकाओं का कहना है कि उनका प्रयास हमेशा रहता है कि केन्द्र का संचालन सही और नियमित हो, लेकिन पोषाहार सामग्री, रेडी टू ईट और डीलर के यहां से मिलने वाला चावल समयानुसार नहीं मिलने के कारण उन्हें परेशानी होती है. इस संबंध में 23 दिसंबर को बीडीसी की बैठक में पंचायत समिति सदस्य रामप्रवेश सिंह ने सवाल उठाया था. महिला पर्यवेक्षिका ने जवाब दिया था कि इस माह के अंत तक बकाया का भुगतान, रेडी टू इट की आपूर्ति व मानदेय का भुगतान करा दिया जायेगा.

समाधान नहीं होने पर उपायुक्त से मिलेंगे सभी पंसस

पंसस संघ के हैदरनगर प्रखंड अध्यक्ष रामप्रवेश सिंह ने कहा है कि दस जनवरी तक समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो, सभी पंचायत समिति सदस्य पलामू के उपायुक्त से मिलेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार कुपोषण को लेकर गंभीर होने की बात करती है. सिर्फ नारे लगाने, रैली निकालने और पोस्टर चिपकाने से कुपोषण दूर होगा या उसके लिए इंतजाम करने की जरुरत होगी. उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ हैदरनगर या हुसैनाबाद की नहीं है. यही स्थिति संपूर्ण पलामू व राज्य की भी है.

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