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तीन साल में एक रुपया एक पैसा ही बढ़ी मनरेगा मजदूरी, क्या ये बनेगा लोकसभा में चुनावी मुद्दा?

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Kumar Gaurav

Ranchi : राज्य और केंद्र की सरकार गरीबी दूर करने और बेरोजगारी दूर करने के कई दावे कर रही है, शायद सच भी हो. सरकार गरीबों और किसानों की आय को दोगुणी करने को लेकर कमर भी कस चुकी है. लेकिन राज्य के 24 लाख मनरेगा मजदूरों के लिए सरकार क्या कर रही है? सरकार मनरेगा मजदूरों की आय को बढ़ाने की दिशा में क्या कर रही है, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि झारखंड के मनरेगा मजदूरों की मजदूरी पिछले तीन सालों में 1 रुपया 1 पैसा ही बढ़ा है. झारखंड में मनरेगा मजदूरों की स्थिति देश भर के अन्य राज्यों से सबसे ज्‍यादा बदतर है. राज्य में करीब 81 लाख मनरेगा मजदूर हैं, जिसमें से अभी मात्र 24 लाख ही एक्टीव मजदूर हैं. देश भर में सबसे कम मजदूरी झारखंड के मजदूरों को ही मिलता है.

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औसतन 10 रुपये भत्ता बढ़ता है प्रतिवर्ष, झारखंड में एक रुपया

देश भर के मनरेगा के आंकड़ों के मुताबिक सालाना दस रुपया दैनिक भत्ता बढ़ता है. लेकिन झारखंड में पिछले साल के आंकड़े को देखें तो सिर्फ एक पैसा बढ़ा था, 2016-2017 के आंकड़ों के हिसाब से भी एक रुपया भत्ता बढ़ा था. बिहार के मनरेगा मजदूरों की स्थिति भी झारखंड के जैसी ही है, पिछले चार सालों में बिहार में मनरेगा मजदूरों की दैनिक भत्ते में सिर्फ 16 पैसे की बढ़ोतरी हुई है. एक्सपर्ट बताते हैं कि दैनिक भत्ते के कम होने की वजह से मजदूर मनरेगा योजना के तहत काम नहीं करना चाहते हैं.

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राज्य की न्यूनतम मजदूरी 239 रुपये, मनरेगा से मिलता है मात्र 167 रुपया

राज्य के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर 239 रुपये है. वहीं राज्य के मनरेगा मजदूरों को 167 रुपये दिये जाते हैं. जो राज्य के मजदूरी से करीब 72 रुपये कम मिलते हैं. इस मामले को लेकर मनरेगा मजदूर कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं, लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकला. देश भर के एवरेज आय के मुकाबले राज्य के मनरेगा मजदूरों को दस रुपये कम मिलते हैं.

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सरकार श्रमिकों बंधुआ मजदूरी करा रही है : जेम्स हेरेंज

मनरेगा वाच झारखंड के जेम्स हेरेंज ने कहा कि मजदूरी दर कानून की धारा 6 (1) के कहता है कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 में किसी बात के होते हुए भी, केंद्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा मजदूरी दर विनिर्दिष्ट करेगी. राज्य के मनरेगा श्रमिकों के लिए यह दूसरा साल है, जिसमें 168 रुपये मनरेगा मजदूरी का प्रावधान है. जबकि राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर 239 रुपये है. इस हिसाब से मनरेगा श्रमिकों को 71 रुपये प्रतिदिन कम भुगतान किया जा रहा है. यह सरकार एक प्रकार से श्रमिकों के साथ बंधुआ मजदूरी करा रही है.

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क्या कहते हैं मनरेगा मजदूर

लातेहार की मनरेगा मजदूर शांति देवी ने कहा कि मनरेगा कानून बहुत संघर्ष के बाद मिला. आज हम लोगों ने 13 साल पूरे किये हैं. लेकिन सरकार मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है. आज 13 वर्षों के बाद भी मात्र 168 रुपये मजदूरी ही मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि मनरेगा में कम से कम 300 रुपये मजदूरी और 15 दिन के अंदर भुगतान होना चाहिए. क्योंकि मनरेगा ही ऐसा कानून है, जो गांव व मजदूरों को खुशहाल बना सकता है. उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार के कारण मनरेगा में लूट मची है.

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साल                   झारखंड         बिहार             पंजाब                केरल

2018 19       167.99        176.96          234.08           274.22

2017 18      167.98        176.9             226.92          207.91

2016 17       166.98       176.85           214.01          243.09

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