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झारखंड सीएम का चीन दौरा : उपलब्धि कम, शोर ज्यादा

झारखंड में कम हुआ है पूंजी निवेश, विदेशी दौरों का नहीं हुआ लाभ

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Ritesh Sarak

Giridih : झारखंड के सीएम रघुवर दास अपने तीन मंत्रियों और अधिकारियों के साथ पांच दिवसीय चीन दौरे पर थे. दावा किया गया कि सीएम राज्य के लिए चीनी निवेशकों को आमंत्रित करने गए हैं और इस दौरे से राज्य को बहुत लाभ होगा. लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. चीन में नगर विकास, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री और पर्यटन के मॉडल को झारखंड में उतारने का दावा सीएम और राज्य भाजपा ऐसे कर रहे हैं मानो चीनी निवेशकों ने अपनी तिजोरी राज्य के लिए खोल दी हो. झारखंड भाजपा तो निवेशक से बातचीत को ही उपलब्धि बताने लगी है.

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दावों के विपरीत दूर जाते निवेशक

सरकार लाख कहे कि राज्य में विकास की गंगा बह रही है. निवेशकों के लिए यहां अनुकूल माहौल और सुविधाएं हैं. मगर हकीकत इसके विपरीत है. 2017 में भारत के महालेखाकार (कैग) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि झारखंड में पूंजी निवेश लगातार घट रही है. रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2001 से 2016 तक कुल 3.51 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हुए, जिनमें हकीकत में सिर्फ 3.8 प्रतिशत राशि का निवेश राज्य में हुआ. कैग ने कहा कि इस दौरान 38 में से 29 एमओयू रद्द हो गए. बिजली, पानी और अन्य सुविधाओं और आधारभूत संरचना की कमी को इसका कारण बताया गया. साथ ही भ्रष्टाचार भी बड़ा कारण रहा. निवेशकों को आकर्षित करने के मामले में पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ और ओड़िसा झारखंड से आगे रहे. रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट में 2016-17 में भी झारखंड और बिहार में विदेशी निवेश घटने की बात सामने आयी है.  2017 में झारखंड में हुए ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में बड़े तामझाम के साथ तीन लाख करोड़ के 210 एएमयू किए गए थे. इनमें सब हकीकत में धरातल पर उतरेंगे इस पर संदेह ही है. 2016 में अमेरिका, 2017 में जापान व चेक रिपब्लिक और 2018 में चीन दौरे पर गए सीएम रघुवर दास और कई बार विभिन्न मंत्री और अधिकारियों के विदेशी दौरों में हुए सरकारी खर्च के बराबर भी निवेश झारखंड में आ जाए तो इस राज्य का भला होगा.

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सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनाने का दावा

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सीएम ने चीन दौरे में कहा कि झारखंड देश का सबसे बड़ा फूड प्रोसेसिंग हब बनेगा. लेकिन इसके लिए कोई निवेश अभी तक नहीं हुआ है. जिस शेनचुवान कंपनी की बात सरकार कर रही है, हकीकत में उसके चेयरमैन शेन जेमिन ने सीएम से सिर्फ भारत आकर संभावनाओं के अध्ययन की बात कही है. कोई वादा या करार राज्य सरकार के साथ नहीं किया है. सवाल है कि क्या सिर्फ चुनाव को देखते हुए भाजपा ताबड़तोड़ फर्जी विकास की घोषणाएं कर रही है.

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शंघाई बनाने से पहले रांची को आदर्श राजधानी ही बना दें

सीएम रघुवर दास ने चीन के शंघाई के दौरे में रांची को शंघाई बनाने की घोषणा कर दी.  इसके तहत रांची में शंघाई टावर बनाने की बात कही. वैसे यह घोषणा भी हवा में ही है. किसी चीनी निवेशक से इस पर कोई करार नहीं हुआ है. तो क्या राज्य सरकार जनता के विकास के पैसे से सिर्फ अपने नाम के लिए इस तरह की गैरजरूरी निर्माण की बात सोच रही है. सीएम द्वारा रांची में शंघाई टावर बनाने की बात कहना भी झारखंड जैसे राज्य के प्राथमिक जरूरतों के विपरित है. जिस राज्य को पानी, बिजली, खाद्यान्न, शिक्षा, आवास और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरी करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत है, लेकिन सीएम कभी शंघाई टावर तो कभी टाइम्स स्क्वायर जैसे खर्चीले गैरजरूरी निर्माण को तरजीह देने में लगे हैं.

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