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विश्‍वनाथ कॉरिडोर : हजारों साल पहले गुम हो चुके प्राचीन मंदिर मिल रहे हैं

भवनों को गिराये जाने के क्रम में  मकानों के अंदर कैद या फिर जमीन के नीचे दबे ऐसे मंदिर सामने रहे हैं जो हजारों साल पहले गुम हो चुके थे. अद्भुत शिल्‍प कला और खूबसूरत नक्‍काशी वाले मंदिर चंद्रगुप्‍त काल से लेकर काशी विश्‍वनाथ मंदिर की स्‍थापना काल के समय के बताये जा रहे हैं.

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Varanasi : वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रॉजेक्‍ट विश्‍वनाथ कॉरिडोर के तहत चल रहे ध्‍वस्‍तीकरण कार्य में कई ऐसे मंदिर सामने आये हैं, जिनके पांच हजार साल पुराना होने का दावा किया जा रहा है. इनमें से कई मंदिर और अवशेष चंद्रगुप्‍त काल के होने के सबूत मिल रहे हैं. मंदिरों के अवशेष बताते हैं कि काशी उस काल में भी जीवंत नगरी रही है. बता दें कि काशी विश्‍वनाथ मंदिर विस्‍तारीकरण योजना के तहत मणिकर्णिका और ललिता घाट से मंदिर तक 40-40 फीट के दो कॉरिडोर बनाये जाने का काम युद़ध स्तर पर चल रहा है.  खबरों के अनुसार कॉरिडोर के लिए पुरानी काशी यानी पक्‍का महाल के अब तक खरीदे गये लगभग 175 भवनों को ध्‍वस्‍त करने के लिए तीन हजार मजदूर लगे हुए हैं. जानकारी के अनुसार भवनों को गिराये जाने के दौरान मकानों के अंदर कैद या फिर जमीन के नीचे दबे ऐसे मंदिर सामने रहे हैं जो हजारों साल पहले गुम हो चुके थे. अद्भुत शिल्‍प कला और खूबसूरत नक्‍काशी वाले मंदिर चंद्रगुप्‍त काल से लेकर काशी विश्‍वनाथ मंदिर की स्‍थापना काल के समय के बताये जा रहे हैं.

दक्षिण भारतीय रूप में रथ पर बना भगवान शिव का एक अद्भुत मंदिर मिला

समुद्र मंथन को लेकर कई पौराणिक गाथाएं भी सामने आ रही हैं. बता दें कि मणिकर्णिका घाट के किनारे दक्षिण भारतीय स़्वरूप में रथ पर बना भगवान शिव का एक अद्भुत मंदिर मिला है, जिसमें समुद्र मंथन सहित कई पौराणिक गाथाएं उकेरी गयी हैं.  मंदिर के सामने दीवार से ढका भगवान शिव का एक और प्राचीन  मंदिर मिला है.  विश्‍वनाथ मंदिर की प्रतिमूर्ति वाला भी एक मंदिर  है.  बताया गया है कि अब तक छोटे-बड़े 42 मंदिर मिल चुके हैं. संरक्षित किये जा रहे काशी विश्‍वनाथ मंदिर के मुख्‍य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह के अनुसार कुछ मंदिर उतने ही पुराने हैं जितनी पुरानी काशी नगरी के होने का अनुमान इतिहासकार लगाते हैं.  जिन मकानों में प्राचीन मंदिर मिल रहे हैं वहां ध्‍वस्‍तीकरण का काम रोककर वीडियोफोटॉग्रफी कराने के बाद सं‍रक्षित किया जा रहा है.  यहां कंसल्टेंट कंपनी ने एक दर्जन विशेषज्ञों की टीम लगाई है, जो मंदिर प्रशासन के साथ काम कर रही है.

कहा गया है कि ध्‍वस्‍तीकरण कार्य में मिले मंदिरों के अध्‍ययन की जिम्‍मेदारी पुरातत्‍व विभाग को दी जायेगी. साथ ही स्‍थापना का वास्‍तविक काल पता लगाने के लिए कार्बन डेटिंग कराई जायेगी. इस संबंध में कमिश्‍नर दीपक अग्रवाल ने बताया कि ध्‍वस्‍तीकरण के बाद जो मंदिर सामने आयेंगे, उनका संकुल बनाया जायेगा.  मणिकर्णिका घाट स्थित सतुआ बाबा आश्रम के महंत संतोष दास ने कहा कि विश्‍वनाथ कॉरिडोर एरिया में  पांच हजार साल पुराने मंदिरों का मिलना किसी बड़ी खोज से कम नहीं है.

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