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विश्वंभर फाउंडेशन ने राज्यपाल से की JSSC की परीक्षाओं में मैथिली को शामिल करने की मांग

Ranchi: विश्वंभर फाउंडेशन, रांची के एक प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को राज्यपाल रमेश बैस से भेंट की. फाउंडेशन के सचिव नवीन कुमार झा ने उनसे आग्रह करते हुए कहा कि झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में मैथिली को भी शामिल कराने में पहल करें. राज्य सरकार ने नयी नियोजन नीति में 12 स्थानीय भाषाओं को शामिल किया है पर मैथिली को दरकिनार कर दिया गया है. राज्य में इसे बोलने वालों की संख्या लाखों में है. पूर्व से ही यह प्रतिस्थापित भाषा रही है. मैथिली की तुलना में बांग्ला, ओडिया और उर्दू जैसी भाषाओं को स्थानीय भाषा की लिस्ट में शामिल किया गया है. सरकार के ऐसे फैसले से राज्य के मैथिल समाज के लोगों, युवाओं में निराशा है. इस संबंध में वाजिब पहल हो. इस पर राज्यपाल ने कहा कि वे सरकार से इस संबंध में बात करेंगे. सभी भाषाओं के साथ न्याय हो, इसके लिए कोशिश होगी.

द्वितीय राजभाषा की उपेक्षा ठीक नहीं

प्रतिनिधिमंडल में शामिल फाउंडेशन के संयोजक सियाराम झा सरस ने कहा कि गजट में द्वितीय राजभाषा के तौर पर मैथिली को भी शामिल किया जा चुका है. इसे यहां के यूनिवर्सिटी, जैक और मध्यमा संस्कृत के साथ परीक्षाओं के पाठ्यक्रमों में अधिसूचित किया जा चुका है. जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो, रांची में मैथिल भाषियों की बड़ी संख्या है. ऐसे में जेएसएससी की परीक्षाओं में मैथिली को भी जगह मिले. प्रतिनिधिमंडल में अमरनाथ झा, लेखानंद झा, बाबूलाल झा सहित अन्य भी शामिल थे.

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