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धनबाद कारा में स्मार्ट फोन इस्तेमाल कर रहे हैं वीआईपी कैदी

जेल की भीतर बनती हैं अपराध की योजनाएं, खास कैदियों को सुविधाएं देने के लिए जेल परिसर में लगती है बोली

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Dhanbad:  धनबाद जेल में रसूखदार कैदियों के अपने नियम-कानून चल रहे हैं. इन्हें वो सारी सुख-सुविधाएं मिल रही हैं, जो एक साधारण कैदी के लिए कल्पना से परे है. इनमें से कुछ कैदियों का तीनों समय का खाना उनके घर से बनकर जेल पहुंचता है. कुछ के लिए साधारण कैदी जेल में गैस पर खाना बनाते हैं. कई जेल की कैंटीन में खाना खाते हैं. जेल प्रशासन की मदद से कुछ वीआईपी कैदियों के लिए बाहर से मटन, मछली, मिठाई मंगायी जाती है. न्यूज विंग को मिली खबर के अनुसार कुछ कैदी साधारण मोबाइल से लेकर स्मार्ट फोन तक का इस्तेमाल कर रहे हैं. ये रसूखदार कैदी जरूरत के अनुसार अपनी दिनचर्या तय करते हैं. मुलाकातियों से मिलने का समय औऱ नाम ये खुद ही तय करते हैं.

शूटरों से बातचीत की मिल सकती है डिटेल

न्यूज विंग की पड़ताल में ये तथ्य सामने आया है कि जेल के भीतर कई मोबाइल स्थायी रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं. तकनीकी सेल से अगर इन मोबाइल का लोकेशन सर्च किया जाये तो इनका लोकेशन धनबाद जेल परिसर मिलेगा. इनकी कॉल डिटेल से चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो सकते हैं. धनबाद जेल से ऑपरेट होने वाले दो नंबर काफी चर्चित हैं. इनमें 9918000…और 7478155…के नंबर हैं. यहां जानबूझ कर इन मोबाइल नंबरों के अंतिम तीन डिजिट नहीं दिये जा रहे हैं. इसके अतिरिक्त स्मार्ट फोन भी इस्तेमाल किये जा रहे हैं, जिनसे वीडियो कॉलिंग होती है. इनकी कॉल डिटेल से उन घरों का पता चल सकता है जिनके कोई न कोई संबंधी जेल में बंद हैं. इन नंबरों से अंतरप्रांतीय गिरोह के कुख्यात सरगनाओं और शूटरों से भी बातचीत होने की खबर है. दूसरे शब्दों में कहें तो इन नंबरों के सहारे जेल के भीतर से अपराध की योजनाएं बन रही हैं.

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“कबूतर वार्ड” में वीआईपी कैदियों के लिए बनता है अलग से खाना

धनबाद मंडल कारा के भीतर एक वार्ड का नाम है कबूतर वार्ड. इसमें विधायक संजीव सिंह, धनजी सिंह और संजय सिंह ठिकाना है. इनका खाना जेल के भीतर सामान्य कैदी गैस चूल्हे में अलग से बनाते हैं. जेल के भीतर ही डब्लू मिश्रा और पिंटू की भी खासी चलती है. कई वीआईपी कैदियों का खाना तीनों पहर घर से आता है. कई जेल की कैंटीन में जाकर खाना खाते हैं. कुछ कैदी नियमित रूप से गांजे का शौक भी पूरा करते हैं, जिसकी आपूर्ति बाहर से हो जाती है.

सुख-सुविधा देने के लिए लगती है कैदियों की बोली

धनबाद कारा के भीतर ही एक स्थान गुमटी के नाम से मशहूर है. यहां से कैदियों की आमद-रफ्त होती है.  किसी कैदी के आते ही, विभिन्न वार्डों के प्रभारी उसके स्वागत में लग जाते हैं. फिर कैदी की प्रोफाइल के मुताबिक उनकी बोली लगती है. अंततः जेल प्रशासन से इनकी डील होती है. इसके बदले में में वार्ड प्रभारी की जेब भरी जाती है. फिर कैदी को ऐश-ओ-आराम की सुविधाएं मिलनी शुरू हो जाती हैं.

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