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आदित्य स्वरुप की बेंच के बारे में मांगी गई सूचना, आदित्य स्वरुप ही करेंगे सूचना पर सुनवाई

मुख्य सूचना आयुक्त के कार्यालय में हो रहा नेचुरल जस्टिस का उल्लंघन

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Ranchi : क्या किसी मामले में आरोपी अपने ही खिलाफ लगे आरोपों पर फैसला देकर किसी को न्याय दे सकता है ? इसे लोकतांत्रिक न्याय व्यवस्था में नेचुरल जस्टिस के खिलाफ माना गया है. झारखंड राज्य सूचना आयोग में नेचुरल जस्टिस के उल्लंघन का एक ऐसा ही मामले सामने आया है. यह मामला धनबाद के एक आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार का है.

आदित्य स्वरुप की बेंच के बारे में मांगी गई सूचना, आदित्य स्वरुप ही करेंगे सूचना पर सुनवाई

धनबाद के आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार ने मुख्य सूचना आयुक्त की बेंच में होने वाली कार्रवाई के बारे में सूचना मांगी थी. असंतुष्ट होकर जब उन्होंने इस पर अपील दायर की तो उसकी सुनवाई मुख्य सूचना आयुक्त आदित्‍य स्वरूप की बेंच में ही शेड्यूल था. सुनवाई की तारीख 13 जुलाई 2018 को 10:30 बजे मुख्य सूचना आयुक्त की बेंच में तय की गई. अब महेश ने मुख्य सूचना आयुक्त को आवेदन दिया है. उन्होने मामले की सुनवाई सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर की बेंच में कराने का आग्रह किया है.

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क्या है पूरा मामला ?

धनबाद के एक आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार ने झारखंड राज्य सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त की अदालत में सुनवाई की विस्तृत जानकारी मांगी थी. उन्होने पूछा था कि द्वितीय अपीलीय पदाधिकारी आदित्य स्वरूप के कार्यालय में कितने अपीलवाद दर्ज हुए, कितने अपीलवाद का निष्पाादन हुआ और कितने अपीलवाद की सुनवाई चल रही है. साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि उनके कार्यालय में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1), 20(2), और 19(8) (बी) के तहत कितने जन सूचना पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई की गई और कितने जन सूचना पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई नहीं की गई. आरटीआई कार्यकर्ता ने सूचनाओं की अभिप्रमाणित प्रति मांगी थी. सूचना के लिए यह आवेदन 17 दिसंबर 2016 को दिया गया था.

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दो साल हो गये, पर नहीं मिली सूचना

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आरटीआई कार्यकर्ता महेश कुमार ने बताया कि सूचना मांगे हुए दो साल से भी अधिक हो गये हैं. लेकिन अभी तक पूरी सूचना नहीं मिली है. जिनकी अदालत के बारे में मैंने जानकारी मांगी है, उन्हीं की अदालत में मेरा मामला चल रहा है. यह नेचुरल जस्टिस सिद्धांत के खिलाफ है. इसके लिए मैंने राज्य  सूचना आयोग को एक आवेदन किया है. मैंने आग्रह किया है कि इस मामले की सुनवाई सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर की बेंच में कराई जाय, ताकि मुझे सही न्याय मिल सके.

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दूसरी बेंच को करनी चाहिए सुनवाई- राजीव कुमार

झारखंड के वरीय अधिवक्ता राजीव कुमार का कहना है कि यदि कोई मामला मुख्य सूचना आयुक्त से जुड़ा है तो उनकी बेंच में उसकी सुनवाई नहीं होनी चाहिए. ऐसा होता है तो यह नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है. ऐसे मामलें को सुनवाई के लिए दूसरे के बेंच में भेजना चाहिये.

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