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हजारीबाग में दो महीने से ग्रामीणों को नसीब नहीं हो रहा केरोसिन तेल, सरकार से लगायी गयी गुहार

Ranchi: हजारीबाग में फरवरी महीने से ही उपभोक्ताओं को केरोसिन तेल नसीब नहीं हो रहा है. जिला प्रशासन के आदेश के कारण डीलर किसी को तेल उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं.

जिले में 5 मिट्टी तेल डिस्ट्रिब्यूटर हैं. स्टॉक में लगभग 2 लाख लीटर तेल जमा है पर प्रशासन से परमिशन नहीं मिलने के कारण इसे बांटा नहीं जा पा रहा है. दो महीने से रखा और जमा यह तेल अब खराब भी हो रहा है. उधर ग्रामीण लगातार इसे बांटे जाने के लिये सरकार से गुबार लगा रहे हैं. खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव को लेटर लिखा जा चुका है. अब सोशल मीडिया के जरिये भी मांग होने लगी है.

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जिला प्रशासन ने क्यों लगा रखी है रोक

गौरतलब है कि फरवरी महीने में हजारीबाग के सदर प्रखंड अंतर्गत अमनारी पंचायत के आसपास के गांवों में डीलरों से उठाये गये मिट्टी तेल के कारण ब्लास्ट की घटनाएं सामने आयी थीं. इसमें कुछ ग्रामीणों की मौत भी हो गयी थी. कई घायल भी हुए थे. विधानसभा के बजट सत्र में विधायक मनीष जायसवाल समेत कई अन्य विधायकों ने इस पर सरकार को घेरा था.

इसके बाद जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में पता चला था कि तेल के थोक विक्रेता आर्मी ट्रेडिंग के द्वारा इस तेल की आपूर्ति की गयी थी. इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी थोक विक्रेताओं और डीलरों के द्वारा मिट्टी तेल वितरण पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था.

मंत्री से किया गया आग्रह

झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला अध्यक्ष रुचि कुजूर (अल्पसंख्यक मोर्चा, झामुमो, हजारीबाग) ने मंत्री रामेश्वर उरांव को लेटर लिखकर मिट्टी तेल के उठाव नहीं होने से ग्रामीणों के सामने आ रही परेशानियों की जानकारी दी है.

कहा है कि रोक के कारण लोगों में हाहाकार है. खासकर गरीबों के जीवन में इसकी अहम भूमिका रहती है. घर में रोशनी, सिंचाई, मोटर पंप चलाने से लेकर खाना बनाने और दूसरे कामों में इसकी जरूरत पड़ती रहती है.

रोक के कारण गहरी मार पड़ रही है. ऊपर से कोरोना महामारी और रोजगार की कमी के कारण और कठिन स्थिति हो गयी है. प्रशासन ने कोई वैकल्पिक पहल भी नहीं की है. सरकार जल्दी से इस रोक को हटाये.

क्या कहते हैं विधायक

विधायक मनीष जायसवाल ने न्यूज विंग से कहा कि सरकार को मिट्टी तेल वितरण में गंभीरता दिखानी होगी. केरोसिन ब्लास्ट की घटना फिर से ना हो, इस पहलू को देखते हुए ही केरोसिन तेल वितरण कार्यक्रम पर आगे बढ़ना चाहिये. अमूमन सभी गांवों में बिजली की सुविधा है. ऐसे में ग्रामीण बेहद सीमित जरूरतों के लिये ही केरोसिन तेल पर आश्रित रहते हैं. फिर भी सरकार जवाबदेही के साथ इस पर फैसला ले.

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