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रांची से सटे गांवों में गठित नहीं है ग्रामस्तरीय बाल संरक्षण कमिटी

जबकि आयोग का कहना है कि राज्य के 80 प्रतिशत गांवों में वीएलसीपीसी का गठन किया जा चुका है.

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Chhaya

Ranchi : सूबे में योजनाओं के दम तोड़ने की बात आम है. जितनी तत्परता से कार्यक्रम आयोजित कर यहां योजनाओं को बनाया जाता है. उतनी ही तत्परता से अगर इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया जाता तो राज्य की स्थिति कुछ और ही होती. इसी वर्ष झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की ओर से बाल मुद्दों के त्वरित निवारण के लिये ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण कमिटी (वीएलसीपीसी) की शुरूआत की गयी. जिसके तहत राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कमिटी का गठन किया जाना था. ताकि बाल अधिकार और संरक्षण से संबधित मुद्दे पर ग्रामीणों को जागरूक किया जा सके. साल खत्म होने को है और राजधानी से सटे गांवों में अब तक वीएलसीपीसी गठित नहीं हो पायी है. जबकि आयोग का कहना है कि राज्य के 80 प्रतिशत गांवों में वीएलसीपीसी का गठन किया जा चुका है.

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राजधानी के आस पास के गांवों में नहीं कमिटी

राजधानी के आस पास के अधिकांश गांवों में वीएलसीपीसी का गठन नहीं हुआ है. इस बारे में जब ग्राम प्रतिनिधियों से बात की गयी तो अधिकांश लोगों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं थी. रांची से सटे पतरागोंदा, सुंडली, नवासोसो, चटकपूर, चटगांव आदि गांव की मुखिया, आंगनबाड़ी सेविकाओं, वार्ड सदस्यों ने जानकारी दी कि गांव में वीएलसीपीसी का गठन नहीं हुआ है. इन्होंने बताया कि इन गांवों में बाल अधिकारों से संबधित किसी तरह का जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाया जाता है.

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तस्करी और ड्राप आउट है मुख्य मुद्दे

आयोग की ओर से वीएलसीपीसी के गठन का मुख्य उद्देश्य बाल तस्करी और ड्राप आउट की समस्या से जुझना है. अधिकांश तस्करी के मामलों में देखा जाता है कि स्कूल ड्राप आउट बच्चे ही तस्करी के शिकार होते है, जिन्हें तस्करों द्वारा अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है. वहीं बाल मजदूरी, बच्चों का मानसिक और शारीरिक शोषण आदि रोकने के लिये भी वीएलसीपीसी का गठन किया जाना था.

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तस्करी के आंकड़े और मैपिंग में होगी सहायता

वीएलसीपीसी के गठन से ग्राम स्तर पर तस्करी में रोक लगाने में सहायता मिलेगी. गांवों में वीएलसीपीसी के तहत एकल परिवार, बच्चियों की संख्या वाले परिवार या ऐसे परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति खराब हो उनके आंकड़े रखने में सहायता मिलेगी. जिसे तस्करी और बाल मजदूरी जैसे मामलों पर उचित कारवाई हो सके. साथ ही इनके आंकड़े भी उपलब्ध हो.

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महिलाओं की बढ़ेगी भूमिका

वीएलसीपीसी के गठन से ग्राम स्तर पर तस्करी, बाल मजदूरी रोकने, ड्राप आउट बच्चों की समस्या आदि से निबटने के लिये ग्राम स्तर पर आंगनबाड़ी संचालिकाओं, महिला समितियों, एनजीओ समेत अन्य संस्थाओं की भूमिका बढ़ेगी. ग्रामीणों और बच्चों को इसके माध्यम से जागरूक किया जायेगा. जिससे लोग बाल अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें.

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