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विकास एक गांव से भी रहा दूर तो सीएम का कमीटमेंट फेल : सुदेश महतो

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Ranchi: सरकार की सहयोगी आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने रघुवर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बड़ा हमला किया है. पारा शिक्षकों का मामला, ग्राम पंचायत, बिजली जैसे कई मुद्दों पर सुदेश ने मुख्यमंत्री पर तंज कसा. सुदेश ने हरमू स्थित आजसू के नये दफ्तर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि पिछले चार साल में पंचायत व्यवस्था कमजोर हुई है. राज्य सरकार ने इस दौरान कई ऐसे निर्णय लिये जिसपर उसे बैक फुट पर आना पड़ा. ऐसे में कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकार को सोचना चाहिए. साथ ही कहा कि सरकार जितनी काम कर सकती है, उतने ही दावे करे. सपनों पर बात नहीं करना चाहिए. सभी गांवों में बिजली पहुंचाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को दावे वही करना चाहिये, जिसे वह 5 सालों में पूरा कर सकें. सरकार को 5 साल के लिए जनादेश मिला है, 2022 तक के लिए नहीं. इस पांच साल में आपने पब्लिक को क्या दिया, यह बातें होनी चाहिए. सरकार को सरकारी अधिकारियों के आंकड़ों के खेल में नहीं जाना चाहिये. आज भी गांवों में 10 घंटे तक बिजली नहीं रहती है. इसी सपने पर 1952 से वोट हो रहा है और आज भी ये सपना पूरा नहीं हो पा रहा है. सुदेश यहीं नहीं  रूके, उन्होंने सीएम पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री राज्य का लीडर होता है और अगर कहीं  एक गांव भी छूट गया तो सीएम का कमीटमेंट फेल हो जायेगा. हकीकत पब्लिक देख रही है. कमीटेड लोग इस तरह आंकड़ों में उलझेंगे तो इसकी जवाबदेही लीडर की ही है.

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जनप्रतिधियों की नहीं सुनते रघुवर

सुदेश कुमार महतो ने बुधवार को कहा कि मौजूदा सरकार में जन प्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जा रही है. मुखिया, पार्षद, विधायक या एमपी हों, ये जनता के चेहरे होते हैं. लेकिन पिछले 4 सालों में झारखंड की पंचायत व्यवस्था कमजोर हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि लोग चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले रहे हैं. हाल में हुए पंचायत उपचुनाव में लोगों ने भाग नहीं लिया, यह बहुत गंभीर विषय है. लेकिन इसपर किसी का ध्यान नहीं है. इसकी मुख्य वजह है की जनप्रतिनिधि चुने जाने के बाद वह लोगों की सेवा नहीं कर रहे हैं.

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रघुवर दास 52 लाख बच्चों की पढ़ाई से कर रहे खिलवाड़

आजसू प्रमुख सुदेश महतो ने पारा शिक्षकों के आंदोलन का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि  राज्य के 52 लाख बच्चे गांव के स्कूलों में पढ़ते हैं. उन स्कूल में पारा टीचर ही पढ़ाते हैं. यहां तक कि कई स्कूल ऐसे हैं, जहां गेट का ताला भी यही पारा टीचर ही खोलते हैं. ऐसे में सरकार को इनसे बात करके उनकी समस्या का हल निकालना चाहिए. अगर स्कूल में सात घंटी की पढाई तक पूरी नहीं हो पाती है तो ऐसे में यह जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी. इसके अलावा सुदेश महतो ने कहा कि ने राज्य सरकार ने इसके लिए एक कमिटी भी बनायी, लेकिन उसकी रिपोर्ट की जानकारी तक किसी को नहीं मिली. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि सरकार को अभिभावक के रूप में रहना चाहिए.

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