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विजय की फिल्म “फुलमनिया” को नहीं मिला अवार्ड तो किया बवाल : जीफा अध्यक्ष

तीन ज्यूरी के सदस्यों ने देखी थी फिल्म

Ranchi : झारखंड फिल्म फेस्टिवल समाप्त होते ही विवादों से घिर गया है. आयोजकों में स्वागत समिति के अध्यक्ष लाल विजय शाहदेव ने फेस्टिवल पर आरोप लगाया कि इसमें पक्षपात और पैसों की लेन देन कर अवार्ड बांटा गया. वहीं यह भी खबर मीडिया को बताई गयी कि एक्टर अरबाज खान नाखुश होकर गए हैं. इसी का खंडन करते हुए जीफा अध्यक्ष ऋषि प्रकाश मिश्रा ने प्रेस वार्ता की. जहां उन्होंने मीडिया को बताया कि पहले ही तय हो चुका था कि आयोजक समिति के सदस्यों के फिल्मों को एक भी अवॉर्ड नहीं दी जाएगा. इसके बावजूद लाल विजय ने बार बार उनकी फिल्म फूलमनिया को अवार्ड देने की बात कहीं. फिल्म को अवार्ड नहीं मिलने पर उन्होंने इस तरह की अपवाह फैलायी.

तीन ज्यूरी डीएफएफ की ओर से नियुक्त किए गए थे

उन्होंने जानकारी दी कि डाइरेक्टरेट टू फिल्म फेस्टिवल की ओर से तीन ज्यूरी सदस्यों की नियुक्त किया गयी थी. जिसमें हैदराबाद से वीवी महेश्‍वर राव और कलकता से पार्थ सारथी मन्ना थे. जिन्होंने सारी फिल्में देख कर ही निर्णय लिया. अन्य ज्यूरी सदस्य गौतम बोस व्यक्गित कारणों से नहीं आ पाएं थे. ऐसे में उन्हें सारी लघु फिल्में भेजी गयी थीं. जिन्हें देखकर उन्होंने निर्णय दिया था. जबकि लाल विजय का कहना था कि फिल्म में दिए गए अवार्ड फोन पर सेटिंग करके दिया गया.

अरबाज नाखुश नहीं ,फिल्म बनाने का किया वायदा

लाल विजय ने जानकारी दी थी कि अरबाज खान को खेलगांव स्टेडियम के वीवीआइपी लांज में रखा गया था. जब इसकी जानकारी जीफा अध्यक्ष से प्रेस वार्ता के दौरान मांगी गयी तो उन्होंने कहा कि रेडिशन ब्लू में आयोजन के लिए छह कमरे लिए गए थे. जिसके लिए एक लाख बीस हजार का भूगतान भी किया गया. यहीं अरबजा खान को रखा गया था. उन्होंने पत्रकारों को फोन पर अरबाज खान के मैनेजर से बात करायी. जहां उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है. अरबाज सर ने तो झारखंड में फिल्म की शूटिंग करने की भी इच्छा जाहिर की है.

नागपुरी फिल्मों का रखा गया ख्याल

ऋषि प्रकाश ने कहा कि फेस्टिवल में क्षेत्रीय फिल्मों को प्रोत्साहित करने की पूरी व्यवस्था थी. इसलिए इसकी शुरूआत भी नागपुरी फिल्म से की गयी. लेकिन इसके बाद भी आरोप लग रहे हैं कि नागपुरी फिल्में नहीं दिखायी गयी, जो गलत है. इस आयोजन के लिए मंत्रालय से छह फिल्में दी गयी थी. इसके साथ अन्य 98 फिल्मों में से 82 फिल्मों को दिखाया गया.

राज्य के ब्रांडिंग के लिए जरूरी थी फिल्म फेस्टिवल

इधर, भू-राजस्व, खेलकूद, पर्यटन, संस्कृति विभाग मंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा कि राज्य की ब्रांडिंग के लिए ऐसी फिल्म फेस्टिवल जरूरी थी. ऐसे आयोजनों में छोटे मोटे विवाद होते रहते है. लेकिन ऐसे आयोजन राज्य के लिए बेहतर हैं.

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