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#IMF की चीफ इकोनॉमिस्ट गीता के विचार, भारत को आर्थिक सुस्ती से जल्द राहत नहीं मिलने वाली

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Washington :  भारत को आर्थिक सुस्ती से जल्द राहत मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं.  भारत में भूमि सुधार और श्रम कानूनों में सुधार किये जाने की जरूरत है.  यह विचार  International Monetary Fund की चीफ इकोनॉमिस्ट कोलकाता में जन्मीं गीता गोपीनाथ के हैं.

उन्होंने कहा कि इस समय भारतीय Economy में उतार-चढ़ाव की स्थिति और संरचनात्मक चुनौतियों को देखते हुए घरेलू मांग में नरमी से निपटने वाली नीतियों पर अमल करने की जरूरत है.  उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि मध्यम अवधि में रोजगार सृजन में सहायक नीतियों की भी जरूरत है.

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FICCI की वार्षिक बैठक को संबोधित किया

कोलकाता में जन्मीं 48 साल की अर्थशास्त्री ने शुक्रवार को FICCI की वार्षिक बैठक को  संबोधित किया. गीता गोपीनाथ ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में भरोसेमंद राजकोषीय मजबूती भी शामिल किया जाना चाहिए.

इसके लिए कर्ज घटाने और सरकारी व्यय एवं घाटे के वित्त पोषण में कमी लाने की जरूरत है. उनके अनुसार इससे निजी निवेश के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेगा. यह सब्सिडी खर्च को युक्तिसंगत बनाने और कर आधार बढ़ाने के उपायों के जरिये होना चाहिए.

गीता गोपीनाथ कहती हैं कि देश में निवेश में कमी आयी है.  माइक्रो इकॉनॉमिक स्थिरता के लिए गीता गोपीनाथ ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधार की जरुरत पर बल दिया है.  नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों की चिंताओं पर जोर देते हुए गीता गोपीनाथ ने कहा कि निवेश्कों को लेकर सकारात्मक नीति बनाना बेहद जरूरी है.

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गीता गोपीनाथ इस सप्ताह भारत आ रही हैं

गीता गोपीनाथ ने कहा कि सबसे पहले तो ये कि राजकोषीय घाटे को लेकर जब हम बात करते हैं तो हमें इसे मध्यावधि लक्ष्य के रूप में ही देखना चाहिए. कुछ ऐसा, जिसे एक अवधि में पूरा किया जा सके न कि इसे रातों-रात पूरा कर लिया जायेगा.

दूसरी बात ये है कि जब हम बात करते हैं कि हमें खर्च बढ़ाना है तो जरूरी नहीं कि ये हमारे लिए परेशानी ही होगी.  सवाल यह है कि क्या इसे रेवेन्यू के हिसाब तय किया जा रहा है या नहीं? जान ले कि गीता गोपीनाथ इस सप्ताह भारत आ रही हैं.

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