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विदिशा हत्याकांड की गुत्थी तो सुलझ नहीं सकी, अब इंसाफ मांगनेवाली छह महिलाओं को ही भेज दिया गया नोटिस

छह महिलाओं ने विदिशा हत्याकांड के खिलाफ उठायी थी आवाज, की थी इंसाफ की मांग, पुलिस ने भेज दिया नोटिस, गिरफ्तारी की दी चेतावनी

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Ranchi : 13 सितंबर 2013 को हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा विदिशा की स्कूल के हॉस्टल में कैसे मौत हुई, इसकी जांच तो अब तक पूरी नहीं हुई है, लेकिन विदिशा हत्याकांड के खिलाफ आवाज उठानेवाली और इंसाफ की मांग करनेवाली छह महिलाओं पर बरियातू थाना पुलिस ने केस दर्ज कर उन महिलाओं को नोटिस जरूर भेज दिया है. नोटिस में थाना नहीं आने पर उन सभी महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजने की भी बात कही गयी. इन सभी छह महिलाओं को हंगामा करने और रोड जाम करने जैसे मामलों में कांड संख्या- 324/13 के तहत बरियातू थाना में प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया है. केस दर्ज होने के बाद और नोटिस मिलने के बाद से सभी महिलाएं पुलिस के डर से छिपकर रह रही हैं.

पूर्व सिटी एसपी ने दिया था गिरफ्तार करने का आदेश

छह महिलाओं पर बरियातू थाना में केस दर्ज होने के बाद रांची के पूर्व सिटी एसपी अमन कुमार ने इस मामले में बरियातू थाना के जो पुलिस अधिकारी इस मामले का अनुसंधान कर रहे हैं, उनको उक्त सभी महिलाओं को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था. साथ ही कहा था कि अगर इन महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधानकर्ता को ही जेल भेजा जायेगा.

डर के साये में रह रही हैं महिलाएं

जानकारी के मुताबिक, नैना देवी, शिवानी, पूनम कुमारी सिन्हा सहित अन्य तीन आरोपी महिलाएं सिटी एसपी द्वारा दिये गये आदेश के बाद डर के साये में जी रही हैं और छिपकर रहने को मजबूर हैं. पर, अनुसंधानकर्ता ने सिटी एसपी के आदेश के बाद फोन करके सभी महिलाओं को बुलाया. जब वे लोग नहीं अयीं, तब पुलिस उनके घर भी गयी. जब ये सभी महिलाएं नहीं मिलीं, तो उन्हें नोटिस भेजकर थाना बुलाकर अपना बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है.

हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका मिला था शव

बता दें कि 13 सितंबर 2013 को बरियातू थाना क्षेत्र के हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल की 14 वर्षीय छात्रा विदिशा का शव हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटका हुआ मिला था. इसके बाद सीआईडी मामले की जांच में जुटी थी. घटना के लगभग पांच सालों के बाद सीआईडी ने इस बात का खुलासा किया था कि विदिशा ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या हुई थी. इस बात की पुष्टि सीआईडी जांच और समीक्षा रिपोर्ट में हो चुकी है. सीआईडी एसपी ने मामले की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम में इस बात का खुलासा किया गया है कि मेडिकल बोर्ड ने छात्रा के गले में लिगेचर मार्क राउंड द नेक पाया है और अगर विदिशा ने साधारण रूप से आत्महत्या की होती, तो लिगेचर मार्क यू शेप में पाया जाता. वहीं, जिसे सुसाइड नोट करार दिया गया था, वह सुसाइड नोट है ही नहीं. वह तो विदिशा की रोजाना की आदत थी कि वह डायरी में अपने मन की बात लिखे. गौरतलब है कि घटना के बाद मृतका के पिता विकास कुमार राय ने बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की हत्या का आरोप स्कूल के चेयरमैन हरिनारायण चतुर्वेदी और स्कूल के प्रशासक सुभाष क्रिपेकर पर लगाया था.

डायरी में अलविदा शब्द के आधार पर उसे सुसाइड नोट मानना उचित नहीं

विदिशा रोज डायरी में अपने मन की बात को लिखा करती थी. जब उसका शव बरामद हुआ था, तो पुलिस ने कमरे से उस डायरी को भी बरामद किया था, जिसमें विदिशा अपने मन की बात लिखा करती थी. डायरी में एक शब्द का उल्लेख किया गया था. वह शब्द था अलविदा. उस वक्त मात्र इस शब्द के आधार पर यह मान लिया गया था कि विदिशा ने आत्महत्या की है और यह उसका सुसाइड नोट है. जबकि, सच्चाई कुछ और ही थी. दरअसल, अलविदा शब्द एक कविता का शीर्षक था और उसे घटना के छह महीने पहले लिखा गया था. इसलिए डायरी को सुसाइड नोट मान लेना कहीं से भी सही नहीं होता है.

घटना के बाद स्कूल छोड़कर गये दो शिक्षक

विदिशा की मौत के बाद स्कूल में काम कर रहे दो शिक्षक स्कूल छोड़कर चले गये थे. ये दोनों शिक्षक रीमनु और अरविंद थे. पुलिस को इन दोनों से घटना के बारे में अहम जानकारी मिल सकती थी. इसलिए मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा इन दोनों के पते के बारे में बार-बार स्कूल के प्रिंसिपल से पूछा गया. लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल ने कुछ भी नहीं बताया. पता नहीं दिया जाना मामले को और भी ज्यादा संदिग्ध बनाता है. वहीं, घटनास्थल से मिले सबूत, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, सुसाइ़ड नोट, परिस्थिति के मुताबिक मिले सबूत, आरोपियों द्वारा दिये गये बयान और एफएसएल की रिपोर्ट जांच में गलत पाये गये, जो यह साबित करते हैं कि मामला आत्महत्या का नहीं, हत्या का है. हालांकि, मामले के दोनों आरोपियों की संलिप्तता के बारे में अंतिम फैसला लेने के लिए सीआईडी ने कुछ और पहलुओं की जांच करने का निर्णय लिया था.

स्कूल में अनैतिक कार्य के मिले थे संकेत

उस वक्त रांची के एक दैनिक अखबार ने स्कूल के स्टाफ और वहां के प्रिंसिपल से बात की थी. पड़ताल में कुछ ऐसे तथ्य सामने आये थे, जो शिक्षा के इस मंदिर में अनैतिक कार्य होने की ओर इशारा कर रहे थे. यह संदेह भी पैदा हो रहा था कि कहीं वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी उर्फ हरीश सांकृत्यायन की गतिविधियों की वजह से तो विदिशा की मौत नहीं हुई.

चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी के करीब थी विदिशा

छात्र विदिशा राय हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल को संचालित करनेवाली संस्था वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी उर्फ हरीश सांकृत्यायन (86) के करीब थी. डॉ चतुर्वेदी उसे अकेले में बुलाते थे. अपने साथ खिलाते थे. बीमार पड़ने पर अपने कमरे में ही सुलाते थे. विदिशा क्लास में टॉप करती थी. टीचर और क्लासमेट उसे प्रतिभाशाली मानते थे. वे कहते हैं, विदिशा किसी परेशानी में थी, उसने कभी बताया नहीं. डॉ चतुर्वेदी के बारे में बहुत सारी आपत्तिजनक और अव्यावहारिक बातों का पता चला है. विदिशा के माता-पिता के बयानों से इन बातों को बल मिलता है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की मौत के लिए डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी को जिम्मेदार बताया था.

छात्राओं को गले लगाते थे डॉ चतुर्वेदी

पड़ताल में यह बात सामने आयी थी कि बरियातू रोड स्थित हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल में बड़ी होती छात्राओं के साथ डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी अनैतिक काम करते थे. स्कूल में उच्च पद पर काम कर चुकी एक महिला के मुताबिक, छात्रओं के प्रति चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी का व्यवहार सिर्फ गुरु-शिष्य तक ही सीमित नहीं रहता था. वह छात्रओं को किस करते थे, उन्हें गले लगाते थे. मां-बाप से दूर हॉस्टल में रह रहीं लड़कियां विरोध नहीं कर पाती थीं. लेकिन, उन्होंने कई बार यह महसूस किया कि गलत हो रहा है. कई बार इस बात पर आपत्ति भी जतायी. लड़कियों को उनके पास जाने से मना किया था. इससे परेशानी भी झेलनी पड़ी. वह बताती हैं कि डॉ चतुर्वेदी कई बार महिला शिक्षकों को भी देर रात तक स्कूल में ही रोकने की कोशिश करते थे. इस महिला के मुताबिक, डॉ चतुर्वेदी पॉलिश्ड इंसान हैं. उन्हें भी रात में कई बार मीटिंग के नाम पर रोकने की कोशिश की. लेकिन, वह नहीं रुकीं. आरोप है कि स्कूल में काम करनेवाली एक दाई से भी उनके ताल्लुकात आपत्तिजनक थे.

स्कूल की ट्रस्टी में शामिल करना चाहते थे लड़की को

पता चला है कि डॉ चतुर्वेदी कुछ साल पहले हिमाचल की एक पहाड़ी लड़की की तरफ आकर्षित थे. उसे हमेशा अपने पास बुलाते थे. किस करते, गले लगाते. यहां तक कि उस लड़की को वह वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन की ट्रस्टी में शामिल करना चाहते थे. स्कूल में काम कर रहे सभी लोग डॉ चतुर्वेदी के इस काम से सदमे में थे. डॉ चतुर्वेदी लड़की के गाजिर्यन को कहते थे : यह मेरी बेटी है. इसे ट्रस्टी में डालूंगा. इसे पढ़ाऊंगा-लिखाऊंगा. गार्जियन समझते थे कि बुजुर्ग इंसान हैं, ऐसे ही बोलते रहते हैं.

यह है घटनाक्रम

  • 13 सितंबर 2013 : हॉस्टल के कमरा नंबर 15 में छत के हुक के सहारे लटका मिला विदिशा का शव.  डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी समेत दो पर हत्या का मामला बरियातू थाना में दर्ज.
  • 14 सितंबर 2013 : स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सड़क जाम.
  • 15 सितंबर 2013 : पुलिस को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, फांसी से मौत की पुष्टि हुई थी.
  • 21 सितंबर 2013 : पुलिस को पता चला कि डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी गायब हो गये हैं.

घटना के बाद विदिशा के परिजनों ने उठाये थे कुछ सवाल

  • विदिशा की मौत की खबर क्यों प्रबंधन ने कुछ घंटों तक छुपाये रखी?
  • अगर विदिशा ने आत्महत्या की थी, तो फिर बिना पुलिस की मौजूदगी में क्यों उसके शव को फंदे से उतारा गया? पुलिस के आने का इंतजार क्यों नहीं किया गया?
  • घटना के बारे में स्कूल के बाकी विद्यार्थी क्यों कुछ नहीं बोल रहे हैं? कहीं प्रबंधन ने उन पर किसी तरह का दबाव तो नहीं बनाया है?
  • विदिशा की मौत से लगभग एक साल पहले घरवालों की बिना सहमति के उसका ऑपरेशन क्यों कराया गया?
  • आखिर किस चीज का ऑपरेशन कराया गया था और स्कूल प्रबंधन ने उससे संबंधित रिपोर्ट क्यों नहीं दी?
  • क्यों घटना के बाद विदिशा का शव रिम्स के बरामदे में लावारिस हालत में फेंक दिया गया. स्कूल प्रबंधन के लोग वहां से फरार क्यों हो गये?

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