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विदिशा हत्याकांड : छात्राओं के साथ हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल में अनैतिक होता था

Ranchi : 13 सितंबर 2013 को बरियातू थाना क्षेत्र के हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल का छात्रा विदिशा का शव हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटकता मिला था. इसके बाद सीआइडी मामले की जांच में जुटी थी. घटना के लगभग पांच सालों के बाद सीआइडी ने इस बात का खुलासा किया है कि विदिशा ने आत्महत्या नहीं की थी उसकी हत्या हुई थी. इस बात की पुष्टि सीआइडी जांच और समीक्षा रिपोर्ट में हो चुकी है. सीआइडी एसपी ने मामले की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की है. रिपोर्ट के मुताबिक पोस्टमार्टम में इस बात का खुलासा किया गया है कि मेडिकल बोर्ड ने छात्रा के गले में लिगेचर मार्क राउंड दि नेक पाया है. और अगर विदिशा ने साधारण रूप से आत्महत्या की होती तो लिगेचर मार्क यू सेप में पाया जाता. वहीं जिसे सुसाइड नोट करार दिया गया था वह सुसाइड नोट है ही नहीं. वो तो विदिशा की रोजाना की आदत थी कि वह डायरी में अपने मन की बात लिखे. गौरतलब है कि घटना के बाद मृतका के पिता विकास कुमार राय ने बरियातू थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की हत्या का आरोप स्कूल के चेयरमैन हरिनारायण चतुर्वेदी और स्कूल के प्रशासक सुभाष क्रिपेकर पर लगाया था.

डायरी में अलविदा शब्द के आधार पर उसे सुसाइड नोट मानना उचित नहीं

विदिशा रोज डायरी में इपनी मन की बात को लिखा करती थी. जब उसका शव बरामद हुआ था तो पुलिस ने कमरे से उस डायरी को भी बरामद किया था जिसमें विदिशा मन की बात लिखा करती थी. डायरी में एक शब्द का उल्लेख किया गया था. वह शब्द था अलविदा. उस वक्त इस मात्र के शब्द के आधार पर यह मान लिया गया था कि विदिशा ने आत्महत्या की है और यह उसका सुसाइड नोट है. जबकि सच्चाई कुछ और ही थी. दरअसल, अलविदा शब्द एक कविता का शीर्षक था और उसे घटना के छह महिने पहले लिखा गया था. इसलिए डायरी को सुसाइड नोट मान लेना कहीं से भी सही नहीं होता है.

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घटना के बाद स्कूल छोड़कर गए दो शिक्षक

घटना के बाद स्कूल में काम कर रहे दो शिक्षक स्कूल छोड़कर चले गए थे. ये दोनों शिक्षक रीमनु और अरविंद थे. पुलिस को इन दोनों से घटना के बारे में अहम जानकारी मिल सकती थी. इसलिए मामले की जांच कर रहे अधिकारियों के द्वारा इन दोनों के पते के बारे में बार-बार स्कूल के प्रिंसिपल से पूछा गया. लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल ने कुछ भी नहीं बताया. पता नहीं दिया जाना मामले को और भी ज्यादा संदिग्ध बनाता है. वहीं घटनास्थल से मिले सबूत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुसाइ़ड नोट, परिस्थिति के मुताबिक मिले सबूत, आरोपियों के द्वारा दिए गए बयान और एफएसएल की रिपोर्ट जांच में गलत पाए गए. जो कि यह साबित करते हैं कि मामला आत्महत्या का नहीं हत्या का है. हांलाकि मामने के दोनों आरोपियों की संलिप्तता के बारे में अंतिम फैसला लेने के लिए सीआइडी ने कुछ और पहलुओं की जांच करने का निर्णय लिया है.

स्कूल में होता था अनैतिक 

14 साल की विदिशा का शव 13 सितंबर को हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल, बरियातू रोड के हॉस्टल के कमरे में पंखे से लटकता हुआ मिला. वह 10 वीं कक्षा की छात्रा थी. उसकी हत्या हुई? उसने आत्महत्या की? आत्महत्या की, तो इसके लिए क्यों मजबूर हुई? बीमार थी, तो सही इलाज क्यों नहीं कराया गया? ये सवाल उभर रहे हैं. प्रभात खबर ने उस वक्त मामले की गहराई से पड़ताल की थी. जिसमें स्कूल के स्टाफ और वहां के प्रिंसिपल से बात की गयी थी. पड़ताल में कुछ ऐसे तथ्य सामने आये थे, जो शिक्षा के इस मंदिर में अनैतिक कार्य होने की ओर इशारा कर रहे थे. यह संदेह भी पैदा हो रहा था कि कहीं वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी उर्फ हरीश सांकृत्यायन की गतिविधियों की वजह से विदिशा को आत्महत्या के लिए मजबूर तो नहीं होना पड़ा. जो की अब सीआइडी जांच के बाद सच साबित हो गया है.

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चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी के करीब थी विदिशा

छात्र विदिशा राय हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल को संचालित करनेवाली संस्था वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी उर्फ हरीश सांकृत्यायन (86) के करीब थी. डॉ चतुर्वेदी उसे अकेले में बुलाते थे. अपने साथ खिलाते थे. बीमार पड़ने पर अपने कमरे में ही सुलाते थे. विदिश क्लास में टॉप करती थी. टीचर और क्लासमेट उसे प्रतिभाशाली मानते थे. वे कहते हैं, विदिशा किसी परेशानी में थी, उसने कभी बताया नहीं. डॉ चतुर्वेदी के बारे में बहुत सारी आपत्तिजनक और अव्यावहारिक बातों का पता चला है. विदिशा के माता-पिता के बयानों से इन बातों को बल मिलता है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की मौत के लिए डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी को जिम्मेदार बताया है.

छात्राओं को गले लगाते थे डॉ चतुर्वेदी

बरियातू रोड स्थित हाई क्यू इंटरनेशनल स्कूल में बड़ी होती छात्राओं के साथ डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी अनैतिक काम करते थे. स्कूल में उच्च पद पर काम कर चुकी एक महिला के मुताबिक, छात्रओं के प्रति चेयरमैन डॉ हरिनारायण चतुर्वेदी का व्यवहार सिर्फ गुरु-शिष्य तक ही सीमित नहीं रहता था. वह छात्रओं को किस करते थे, उन्हें गले लगाते थे. मां-बाप से दूर हॉस्टल में रह रही लड़कियां विरोध नहीं कर पाती थी. लेकिन उन्होंने कई बार यह महसूस किया कि गलत हो रहा है. कई बार इस बात पर आपत्ति भी जतायी. लड़कियों को उनके पास जाने से मना किया था. इससे परेशानी भी झेलनी पड़ी. वह बताती हैं कि डॉ चतुर्वेदी कई बार महिला शिक्षकों को भी देर रात तक स्कूल में ही रोकने की कोशिश करते थे. इस महिला के मुताबिक, डॉ चतुर्वेदी पॉलिस्ड इंसान हैं. उन्हें भी रात में कई बार मीटिंग के नाम पर रोकने की कोशिश की. लेकिन वह नहीं रुकी. स्कूल में काम करनेवाली एक दाई से भी उनके ताल्लुकात आपत्तिजनक थे.

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बीमार थी विदिशा, इलाज नहीं

विदिशा के बारे में पता चला है कि वह साइक्लॉजिकल स्ट्रेस नामक बीमारी से पीड़ित थी. जब सांस लेने में परेशानी होती थी, तब उसे रानी चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती कराया जाता था. रात में भर्ती कराने के बाद सुबह रिलीज करा लिया जाता था. स्कूल प्रबंधन को चिकित्सकों ने कई बार बताया कि विदिशा का किसी मनोचिकित्सक से इलाज करायें, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. अंतिम बार विदिशा को चार सितंबर 2013 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था. सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि हाई क्यू इंटरनेशनल की कई दूसरी छात्राओं को भी अस्पताल में भर्ती कराया जाता था.

स्कूल की ट्रस्टी में शामिल करना चाहते थे लड़की को

पता चला है कि डॉ चतुव्रेदी कुछ साल पहले हिमाचल की एक पहाड़ी लड़की की तरफ आकर्षित थे. उसे हमेशा अपने पास बुलाते थे. किस करते, गले लगाते. यहां तक की उस लड़की को वह वर्ल्ड बुद्धा फाउंडेशन की ट्रस्टी में शामिल करना चाहते थे. स्कूल में काम कर रहे सभी लोग डॉ चतुव्रेदी के इस काम से सदमे में थे. डॉ चतुर्वेदी लड़की के गाजिर्यन को कहते थे : ये मेरी बेटी है. इसे ट्रस्टी में डालूंगा. इसे पढ़ाऊंगा-लिखाऊंगा. गाजिर्यन समझते थे कि बुजुर्ग इंसान हैं, ऐसे ही बोलते रहते हैं.

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कब क्या हुआ

13 सितंबर : हॉस्टल के कमरा नंबर 15 में छत के हुक के सहारे लटकता मिला विदिशा का शव.  डॉ हरिनारायण चतुव्रेदी समेत दो पर हत्या का मामला बरियातू थाने में दर्ज.

14 सितंबर : स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सड़क जाम.

15 सितंबर : पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिली, फांसी से मौत की पुष्टि हुई थी.

 21 सितंबर : पुलिस को पता चला डॉ हरिनारायण चतुव्रेदी गायब हो गये हैं.

घटना के बाद विदिशा के परिजनों ने पुछे थे कुछ सवाल

  • विदिशा की मौत की खबर क्यों प्रबंधन ने कुछ घंटों तक छुपाए रखा ?
  • अगर विदिशा ने आत्महत्या की थी तो फिर बिना पुलिस की मौजूदगी में क्यों उसके शव को फंदे से उतारा गया. पुलिस के आने का इंतजार क्यों नहीं किया गया ?
  • घटना के बारे में स्कूल के बाकि विद्यार्थी क्यों कुछ नहीं बोल रहे हैं. कहीं प्रबंधन ने उनपर किसी तरह का दबाव तो नहीं बनाया है ?
  • विदिशा की मौत से लगभग एक साल पहले घरवालों को बिना सहमति के उसका ऑपरेशन क्यों कराया गया ?
  • आखिर किसी चीज का ऑपरेशन कराया गया था और स्कूल प्रबंधन ने उससे संबंधित रिपोर्ट क्यों नहीं दिए ?
  • क्यों घटना के बाद विदिशा का शव रिम्स के बरामदे में लावारिश हालत में फेंक दिया गया. स्कूल प्रबंधन के लोग वहां से फरार क्यों हो गए ?

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