न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

तीन राज्यों में जीत राहुल गांधी की कांग्रेस का फीनिक्स अवतार! 

हाल के मध्य प्रदेश और राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के परिणाम देखें तो हमें क्या नजर आता है.

23

Shashi Kant Rathour

प्राचीन यूनानी कथाओं व किंवदंतियों में एक ऐसे विशालकाय फीनिक्स पक्षी का आख़्यान है, जिसमें घायल होकर खुद-ब-खुद ठीक होने और मरकर पुनर्जीवित होने की क्षमता है. फीनिक्स में अपनी ही राख से पुनर्जन्म लेने की काबलियत है. इसलिए यह माना जाता है कि फ़ीनिक्स पक्षी अमर है. हर बार मरकर जी उठता है. इस संदर्भ से हम भारतीय राजनीति को जोड़कर देखें तो शायद भारतीय राजनीति की दशा और दिशा समझ में आये. हाल के मध्य प्रदेश और राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के परिणाम देखें तो हमें क्या नजर आता है. हम कह सकते हैं कि 1914 में मोदी के लार्जर देन लाईफ वाले अवतार के कारण लगभग मृतप्राय: हो चुकी कांग्रेस अपनी राख झाड़कर फीनिक्स पक्षी की पुनर्जीवित हो उठी है. देश की राजनीति में लगभग हाशिए पर चली गयी और राज्य दर राज्य खोती जा रही कांग्रेस के हाथ हिंदी बेल़्ट के तीन राज्य आ जाना किसी संजीवनी बुटी से कम नहीं है. सोनिया गांधी के बाद कांग्रेस की कमान संभालने वाले राहुल गांधी भारतीय राजनीति में भाजपा के साथ-साथ उनके स्वाभाविक सहयेागी दलों बसपा, सपा, टीएमसी, वामपंथी आदि नेताओं के द्वारा भी गाहे-बगाहे राजनीतिक अछूत की तरह देखे जा रहे थे. हालांकि मोदी की भाजपा के डर से कभी-कभार साथ निभाने की कवायद करते दिख रहे थे. पर अब राजनीतिक परिदृश़्य बदल गया है. तीन राज्यों में जीत से राहुल की कांग्रेस विपक्ष्री दलों में फ्रंट रनर बन गयी है. एक-एक राज़्यों की कमान संभालने वाले नेता या अपने राज्य खो चुके नेता राहुल को हाशिए पर नहीं रख सकते. जैसा कि पहले करते रहे थे. यह राहुल की इच्छा शक्ति पर है कि वह अपने बिगड़ैल सहयोगियों को कैसे साधते हैं या साध पाते हैं और मोदी की भाजपा से 2019 में कैसे आरपार की लड़ाई लड़ते हैं.

लौटते हैं विधानसभा चुनाव के परिणामों पर. 15 साल से मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में व पांच साल से राजस्थान में काबिज भाजपा की जीत के पहिए कांग्रेस ने थाम लिये हैं. छत्तीसगढ़ को छोड़, जहां कांग्रेस ने 10.4 प्रतिशत वोट के अंतर से भाजपा को मात दी है, मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने भाजपा को मात्र 0.1 प्रतिशत और राजस्थान में 0.5 प्रतिशत के वोट अंतर से भाजपा को हराया है. पर जीत तो जीत होती है. जीत-हार के कारण जो भी रहे हों, नोटा हो या एंटी इनकंबेंसी, या उलटे-सीधे वादे. भाजपा हारी है और कांग्रेस जीती है. राहुल का कहें या कांग्रेस का, इसे हम फीनिक्स अवतार कह सकते हैं. याद करें 1984 का दौर, जहां भाजपा महज दो सीटों पर सिमट गयी थी. तीस साल बाद केंद्र में भाजपा का मोदी राज 282 सीटों के साथ आया. वह भी भाजपा का फीनिक्स अवतार था. जिसे भाजपा अब तक बरकरार रख पायी है. बारी अब राहुल गांधी की है.

देखना दिलचस्प होगा कि राहुल अपने नये अवतार को किन उंचाइयों तक ले जाते हैं. 2019 सामने है. राहुल की कांग्रेस अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखते हुए 2019 में मोदी की भाजपा का मुकाबला कर पाती है या नहीं. यह यक्ष प्रश़्न है. अंत में एक बात और कि यदि राहुल तीन राज़्यों में मिली सत्ता की ताकत पचा नहीं पाये तो फिर पुनर्मूषको भव: होते देर नहीं लगेगी.

इसे भी पढ़ें – घोषणा कर पुलिसवालों को भरोसा दिलाया, खुद ही भूल गए रघुवर दास, परिवार अब लगा रहा दफ्तरों के चक्कर

इसे भी       पढ़ें – झारखंड में ज्‍वाइंट वेंचर से पावर प्‍लांट स्‍थापित करने की कवायद शुरू

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: