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वीना जॉर्ज और शैलजाः जानिए, सोशल मीडिया में क्यों चर्चा में हैं केरल की ये दो महिलाएं

Newswing Desk

केरल की दो महिला पॉलिटिशियन्स इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में हैं. एक हैं वीना जॉर्ज, जिन्हें केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने अपनी सरकार में मंत्री के तौर पर नॉमिनेट किया है. दूसरी हैं के.के. शैलजा, जो विजयन की पिछली सरकार में हेल्थ मिनिस्टर के तौर पर शानदार काम के लिए देश-विदेश में चर्चित हुई थीं, लेकिन इस बार उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली है.

बेहतरीन काम का ये इनाम- कैबिनेट से बाहर !

पहले बात शैलजा की करते हैं, जो केरल में टीचर के नाम से मशहूर हैं. उन्होंने विजयन की पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम और उपलब्धियों की लंबी लकीर खींची. केरल में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्रास रूट लेबल तक मजबूत करने के लिए शैलजा ने पांच साल में जो काम किया है, उसकी वाहवाही पूरी दुनिया में हुई.

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खास तौर पर निपाह वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए अपनाये गये शैलजा के तरीकों पर वायरस नाम से एक चर्चित मलयालम फिल्म भी बनी थी. कोरोना संकट में भी शैलजा प्रॉब्लेम शूटर की तरह सामने आईं थीं. दूसरे राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री शैलजा से सलाह मशविरा किया करते थे. ये भी कहा जाता था कि उनकी विशेषज्ञता का फायदा केंद्र सरकार को उठाना चाहिए.

हाल में केरल के सीएम विजयन ने प्रधानमंत्री को बताया था कि उनके राज्य ने कोरोना टीकों की बर्बादी रोकी है और केरल टीकों का सबसे अच्छा इस्तेमाल करने वाला राज्य बना है. पीएम ने इसकी तारीफ की थी. इस टीका प्रबंधन के पीछे भी शैलजा ही थीं. लेफ्ट ने केरल सरकार के कोरोना प्रबंधन को इस बार अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बनाया. परंपरा के उलट अगर सरकार को दूसरा टर्म मिला तो इसकी बहुत बड़ी वजह यही रही कि वोटरों ने माना कि केरल सरकार ने महामारी से बेहतर तरीके से निपटने की कोशिशें की हैं.

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग

शैलजा टीचर की लोकप्रियता का आलम ये है कि इस बार वो 60 हज़ार वोट से जीती हैं. विधानसभा चुनाव में यह बहुत बड़ा मार्जिन है. शैलजा को नयी सरकार में शामिल ना किये जाने के पीछे सीपीएम ने जो तर्क दिया है, वो बहुत लोगों के गले नहीं उतर रहा है. पार्टी का कहना है कि इस बार सरकार नई है और पिछली बार मंत्री रहे किसी भी व्यक्ति को शामिल ना करना एक नीतिगत फैसला है.

मुख्यमंत्री विजयन को छोड़कर पूरी सरकार नई है. सोशल मीडिया पर केके शैलजा के खिलाफ फैसले पर काफी प्रतिक्रियाएं आयी हैं. माकपा समर्थकों ने भी इसकी आलोचना की. एक महिला मंत्री को महज़ विधायक के दर्जे तक सीमित कर दिया गया है. कहा जा रहा है कि जब अच्छा प्रदर्शन करने वाली महिला मंत्री को दूसरी बार कैबिनेट में नहीं रखा जाता, तब जेंडर जस्टिस का कोई मायने नहीं रहता. कहा तो यह भी जा रहा है कि शैलजा की बढ़ी लोकप्रियता से विजयन खुद घबरा गये और यही वजह रही कि उन्हें शानदार प्रदर्शन के बाद भी दुबारे मौका नहीं दिया गया.

वीना जॉर्ज पत्रकार थीं, बन गयीं मिनिस्टर

अब बात वीना जॉर्ज की. वह पहले पत्रकार थीं और अब विजयन की नयी कैबिनेट का हिस्सा हैं. वीना जॉर्ज ने विभिन्न मलयालम समाचार चैनलों में पत्रकार और समाचार एंकर के रूप में काम किया. 2016 के चुनावों में अरनमुला विधानसभा सीट से जीत के साथ चुनावी राजनीति में वीना जॉर्ज एंट्री की थी और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिवदासन नायर को 7,646 मतों के अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचीं.

फिर पांच साल बाद पठानमथिट्टा जिले के निर्वाचन क्षेत्र से 19,003 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. छात्र जीवन में से राजनीति में रहीं सक्रिय वीना जॉर्ज दो बच्चों की मां हैं. भौतिक विज्ञान में एमएससी और बीएड 45 वर्षीय वीना जॉर्ज ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सीपीआई (एम) की छात्र शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के एक कार्यकर्ता के रूप में की थी.

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