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Vat Savitri Vrat 2022: वट सावित्री व्रत कल, जानें इससे जुड़ी पौराणिक कथाइस

  • से जुड़ी पौराणिक कथा

Sunil Jha

Vat Savitri Vrat: पति की दीर्घायु के लिए पत्नियां वैसे तो कई व्रत करती हैं उनमें एक वट सावित्री व्रत है. जो हर वर्ष ज्येष्ठ महीने के अमावष्या के दिन महिलाएं व्रत करती हैं. इस दिन महिलाएं वट वृक्ष (बरगद) की पूजा करती हैं . इसके साथ ही पति की लंबी आयु और हर प्रकार की सुख-समृद्धि की कामना भी करती हैं. आइए जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक कथा क्या है और मान्यताएं क्या हैं.

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वट सावित्री व्रत कथा

तपती गर्मी का समय था. घने जंगल में एक बरगद के पीड़े के नीचे एक स्त्री बैठी थी. वह नवविवाहिता लग रही थी, उसकी गोद में पति का सिर था. जिसे वह सहला रही थी. भीषण गर्मी से परेशान और सिर में दर्द के कारण वह लकड़ी काटना छोड़ कर पेड़ से नीचे उतर आया और पत्नी की गोद में विश्राम करने लगा. यह दंपती कोई और नहीं सत्यवान और सावित्री थे. पति की पीड़ा देख सावित्रि को देवर्षि नारद की भविष्यवाणी याद आ गई. देवर्षि नारद ने सावित्री के पिता अश्वपति से कहा था कि महाराज सत्यवान अल्पायु है, इसलिए इस संबंध को रोक लीजिए. इस पर सावित्री ने अपनी मां की शिक्षाओं के खंडन का भय दिखाया.

वह दृढ़ होकर बोली सती, सनातनी स्त्रियां अपना पति एक बार ही चुनती हैं. इस तरह सावित्री साल्व देश के निर्वासित राजा द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान की गृहलक्ष्मी बनकर तपोवन में आ गई. आज देवर्षि के बताए अनुसार वही एक वर्ष पूर्ण होने वाली तिथि है. जिस दिन उसके पति का परलोक गमन होना तय था. तभी तो सुबह से विचलित मन लिए सावित्री सत्यवान के साथ ही वन में चली आई थी. अभी वह आम के पेड़ से लकड़ियां चुन ही रहे थे कि भयंकर पीड़ा और चक्कर आने के कारण वह जमीन पर गिर पड़े़.

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यमराज ने हर लिए सत्यवान के प्राण

इतने में यमराज प्रकट हुए, वह सत्यवान की आत्मा को पाश से खींच कर ले जाने लगे. इसके बाद यमराज सत्यवान के शरीर में से प्राण निकालकर उसे पाश में बांधकर दक्षिण दिशा की ओर चल दिए. सावित्री बोली मेरे पतिदेव को जहां भी ले जाया जाएगा मैं भी वहां जाऊंगी. तब यमराज ने कहा ऐसा असंभव है पुत्री. सावित्री ने देवी सीता का उदाहरण दिया कि वह भी तो पति संग वन गईं थीं तो मैं यमलोक भी चलूंगी या तो आप मुझे भी साथ ले चलें या फिर मेरे भी प्राण ले लें. यमराज प्रकृति के नियम विरुद्ध सावित्री के प्राण नहीं ले सकते थे. उसे समझाते हुए कहा मैं उसके प्राण नहीं लौटा सकता तू मनचाहा वर मांग ले.

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मांग लिया परिवार का संपूर्ण सुख

तब सावित्री ने वर में अपने श्वसुर के आंखे मांग ली. यमराज ने कहा तथास्तु लेकिन वह फिर उनके पीछे चलने लगी तब यमराज ने उसे फिर समझाया और वर मांगने को कहा उसने दूसरा वर मांगा कि मेरे श्वसुर को उनका राज्य वापस मिल जाए. उसके बाद तीसरा वर मांगा मेरे पिता जिन्हें कोई पुत्र नहीं हैं उन्हें सौ पुत्र हों. यमराज ने फिर कहा सावित्री तुम वापस लौट जाओ चाहो तो मुझसे कोई और वर मांग लो. तब सावित्री ने कहा मुझे सत्यवान से सौ यशस्वी पुत्र हों. यमराज ने कहा तथास्तु.

इसलिए होती है वटसावित्री पूजा

यमराज फिर सत्यवान के प्राणों को अपने पाश में जकड़े आगे बढऩे लगे. सावित्री ने फिर भी हार नहीं मानी तब यमराज ने कहा तुम वापस लौट जाओ तो सावित्री ने कहा मैं कैसे वापस लौट जाऊं. आपने ही मुझे सत्यवान से सौ यशस्वी पुत्र उत्पन्न करने का आर्शीवाद दिया है. यह सुनकर यम सोच में पड़ गए कि अगर सत्यवान के प्राण वह ले जाएंगे तो उनका वर झूठा होगा. तब यमराज ने सत्यवान को पुन: जीवित कर दिया. इस तरह सावित्री ने अपने सतीत्व से पति के प्राण, श्वसुर का राज्य, परिवार का सुख और पति के लिए 400 वर्ष की नवीन आयु भी प्राप्त कर ली. इस कथा का विवरण महाभारत के वनपर्व में मिलता है. यह संपूर्ण घटना क्रम वट वृक्ष के नीचे घटने के कारण सनातन परंपरा में वट सावित्री व्रत-पूजन की परंपरा चल पड़ी.

पूजन समाग्री

वट सावित्री पूजा लोग अपनी सुविधा अनुसार मौसमी फल, अरवा चावल, मौली, जनेऊ, सुपाड़ी, पान पत्ता, रोली, पकवान, अगरबत्ती, कपूर, अंकुरित चना, नया वस्त्र आदि के साथ सुहागन महिलाएं वटवृक्ष की पूजा कर पंडित की उपस्थिति में कथा का श्रवण कल सोमवार को अहले सुबह करेगी.

व्रत में न करें ये गलतियां

• पहली बार वट सावित्री का व्रत करने वाली महिलाओं को ससुराल में यह व्रत नहीं करना चाहिए. उन महिलाओं को मायके में ही वट सावित्री का व्रत करना चाहिए. और पूजा का सारा सामान भी अगर संभव हो तो मायके से ही मिलना चाहिए.
• वट सावित्री व्रत करने वाली महिलाओं को काला और नीला वस्त्र नहीं पहनना चाहिए. यह अशुभ होता है. सफेद रंग का कपड़ा भी नहीं पहनना चाहिए. और सफेद और नीले रंग का फूल भी पूजा में नहीं चढ़ाना चाहिए.
• वट सावित्री का व्रत मासिक धर्म आने वाली महिलाओं को नहीं रखना चाहिए. अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न हो तो किसी दूसरी सुहागिन महिला से यह व्रत पूरा करवा लें और खुद दूर बैठकर पूजा सुने.

Disclaimer: यहां प्रसारित सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. NewsWing किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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