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परमहंस योगानंद के महासमाधि दिवस पर हुए विविध कार्यक्रम, श्रीयुक्तेश्वर गिरि का महासमाधि दिवस नौ को

Ranchi : योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया वाईएसएस सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप (एसआरएफ) के संस्थापक परमहंस योगानंद का महासमाधि दिवस सात मार्च को और उनके गुरु स्वामी श्रीयुक्तेश्वर गिरि का महासमाधि दिवस नौ मार्च को मनाया जायेगा. योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया (वाईएसएस) ने सोमवार को विशेष ऑनलाइन कार्यक्रमों के माध्यम से इस स्मरणोत्सव को मनाया. इसमें अपने घरों से 4,000 से भी अधिक लोग सम्मिलित हुए. वरिष्ठ वाईएसएस संन्यासियों, स्वामी वासुदेवानंद गिरि और स्वामी ललितानंद गिरि ने वाईएसएस ऑनलाइन ध्यान केंद्र पर हिंदी और अंग्रेजी में विशेष ध्यान एवं सत्संग सत्रों को संचालित किया. इन सत्रों में प्रार्थना, प्रेरक वचन, भक्तिपूर्ण गायन और मौन ध्यान शामिल थे. इनका समापन परमहंस योगानन्द द्वारा सिखायी गयी आरोग्यकारी प्रविधि के अभ्यास के साथ हुआ.

पश्चिम में योग के जनक के रूप में योगानंद ने अपने आध्यात्मिक गौरवग्रंथ योगी कथामृत और अन्य कई लेखों के माध्यम से लाखों पश्चिमी लोगों को आत्मा से संबंधित भारत के कालातीत विज्ञान से परिचित कराया. अपने सत्संग में स्वामी वासुदेवानंद ने गुरु के भारत के प्रति प्रेम की ओर ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने बताया पृथ्वी पर हमारे गुरुदेव के अंतिम शब्द ईश्वर और भारत के विषय में थे, जिसमें उन्होंने अपनी कविता मेरा भारत से कुछ पंक्तियां बोलीं. जहां गंगा, वन, हिमालय की कंदरायें और जनमानस रहे मग्न ईश चिंतन में अनन्य, कर स्पर्श उस माटी को तन से हुआ मैं परम धन्य.

परमहंस को पहले से ही पता था कि वे कुछ ही दिनों में शरीर छोड़ने वाले हैं. स्वामी ललितानंद ने दयामाता योगानंद की एक अंतरंग एवं उन्नत शिष्या, जो बाद में वाईएसएस की तीसरी अध्यक्ष बनीं, की स्मृतियां साझा कीं. इसमें उन्होंने इस घटना का उल्लेख किया. संसार से अपने प्रस्थान से कुछ समय पहले, परमहंस ने दया माता को बताया था कि वे शीघ्र ही अपना शरीर छोड़ देंगे. तब हतप्रभ होकर दया माता ने उनसे पूछा था गुरुजी हम आपके बिना इस कार्य को कैसे करेंगे. गुरु की प्रतिक्रिया थी यह याद रखना, मेरे जाने के बाद केवल प्रेम ही मेरा स्थान ले सकता है. रात और दिन ईश्वर के प्रेम में निमग्न रहो और वह प्रेम सबको दो. दयामाता ने आगे लिखा इसी प्रेम की कमी के कारण संसार दुखों से भर गया है. स्वामी ललितानन्द ने यह वृत्तांत सुनाते हुए इस ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अपने दैनिक ध्यान के दौरान ईश्वर और गुरु के प्रति अपने प्रेम और भक्ति को नवीनीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया. परमहंस योगानंद की क्रियायोग शिक्षाएं योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया सेल्फ रियलाइजेशन फेलोशिप वाईएसएस एसआरएफ की मुद्रित पाठमालाओं के माध्यम से उपलब्ध हैं. योगानंद द्वारा स्थापित इन दोनों संस्थाओं के भारत और विश्वभर में 800 से भी अधिक आश्रम, केंद्र और मंडलियां हैं.

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