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लोहरदगा के रग-रग में बसी हुई है वाजपेयी की स्मृति

Lohardaga : अटल बिहारी वाजपेयी का लोहरदगा से गहरा नाता ही उन्हें तीन बार लोहरदगा ला चुका है. उनकी स्मृति आज भी लोहरदगा के रग-रग में बसी हुई है.

का लोहरदगा से गहरा नाता रहा है. सबसे पहले जब वह रिलिफ सोसायटी के चेयरमैन थे, तब वर्ष 1967 में वह लोहरदगा आए थे. इसके बाद वर्ष 1971 में जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद वाजपेयी का लोहरदगा आगमन हुआ था. 27 साल पहले भी वाजपेयी लोहरदगा आ चुके हैं. तब भाजपा देश में एक लोकप्रिय पार्टी के रूप में उभर रही थी. उस समय वाजपेयी का लोहरदगा आना यहां पार्टी को एक मजबूती और दिशा प्रदान कर गया था. वर्ष 1991 में लोहरदगा के ललित नारायण स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वाजपेयी जी का आना हुआ था. यहां वाजपेयी ने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर उनका उत्साह बढ़ाया था.

उस समय लोहरदगा में पार्टी के मजबूत स्तंभ के रूप में माने जाने वाले ब्रज बिहारी प्रसाद, सीताराम शर्मा, ओमप्रकाश सिंह, भाजपा के तत्कालिन प्रदेश अध्यक्ष ताराकांत झा, सांसद कड़िया मुंडा, विधायक गुलशन अजमानी, संजय बर्म्मन, हर्षनाथ महतो आदि ने भी वाजपेयी से मुलाकात की थी। वाजपेयी जी की शालीनता वयोवृद्ध भाजपा नेताओं को आज भी उत्साहित करता है.

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