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वेकेंसी निकलती है कम, ऐसे में 13 प्वॉइंट रोस्टर लागू होना उचित नहीं : डॉ सहदेव

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Ranchi : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 13 प्वॉइंट रोस्टर लागू होने से देश के एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय में उदासीनता है. वेकेंसी कम निकलती है, जिसके कारण इस रोस्टर के लागू होने से इन समुदायों को नौकरी से वंचित रहना पड़ेगा. सरकार को सच्चाई की जानकारी नहीं होने के कारण 13 प्वॉइंट रोस्टर लागू किया गया है. उक्त बातें नेशनल फोरम ऑफ एससी, एसटी एंड ओबीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सहदेव ने प्रेस बयान जारी कर कहीं. उन्होंने कहा कि देश में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संख्या काफी कम है. ऐसे में रोस्टर में नियुक्ति होने पर बड़ी संख्या में एससी, एसटी और ओबीसी अभ्यर्थी नौकरी पाने से वंचित हो जायेंगे. उन्होंने कहा कि न सिर्फ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में, बल्कि अन्य विश्वविद्यालयों में भी अगर 13 प्वॉइंट रोस्टर पर नियुक्ति की जाये, तो एससी, एसटी और ओबीसी नौकरी पाने से वंचित रह जायेंगे.

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प्रधानमंत्री को लिखा है पत्र

डॉ सहदेव ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह 13 प्वॉइंट रोस्टर से इन समुदायों पर प्रभाव पड़ेगा. इस पत्र में बताया गया है कि देश में मात्र 40 केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं, जिनमें 11,486 शिक्षक और गैर शिक्षक 5835 हैं. इनमें कुल प्रोफेसर 1125 हैं, जिनमें एससी, एसटी और ओबीसी से मात्र 129 ही हैं. इसमें एससी 39, एसटी छह और ओबीसी 84 हैं. जो आरक्षण के हिसाब से काफी कम है.

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आरक्षण का नहीं हो रहा पालन

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डॉ सहदेव ने कहा कि देश में अगर कुल एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या देखी जाये, तो इनके आंकड़ों से स्पष्ट होगा कि यहां आरक्षरण का सही से पालन नहीं हो रहा. उन्होंने बताया कि एसोसिएट प्रोफेसरों की संख्या 20,620 है, जिसमें एससी 130, एसटी 34 और ओबीसी 00 है. वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसरों की संख्या 7741 है, जिसमें एससी की संख्या 931, एसटी 423 और ओबीसी 1113 हैं.

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संशोधन की मांग

पत्र की जानकारी देते हुए डॉ सहदेव ने कहा कि पत्र के माध्यम से 13 प्वॉइंट रोस्टर में उचित संशोधन करने की मांग की गयी है, ताकि देश के लाखों विद्यार्थियों के हितों की रक्षा हो सके.

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