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अमेरिकी  विदेश मंत्री ने कहा,  मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करना अमेरिकी कूटनीति की जीत  

चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया को भारत में लोकसभा चुनावों के खत्म होने के बाद पूरी करना चाहता था चीन की कोशिश थी कि किसी तरह से 15 मई के बाद ही यह प्रक्रिया हो.

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Washington : व्हाइट हाउस ने कहा है कि आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और दक्षिण एशिया में सुरक्षा एवं स्थिरता कायम करने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है. व्हाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद  के प्रवक्ता गैरेट मार्किस ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने को लेकर कहा, अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना पाकिस्तान से आतंकवाद को जड़ से उखाड़ फेंकने और दक्षिण एशिया में सुरक्षा एवं स्थिरता लाने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

मार्किस ने एक बयान में कहा कि अमेरिका मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद 1267 प्रतिबंध समिति की सराहना करता है. जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र पहले की वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है. इसी संगठन ने कश्मीर में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी ली थी  जिसमें 40 भारतीय जवान शहीद हो गये थे. विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने भी इस कदम का स्वागत किया और कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी कूटनीति की जीत है. पोम्पिओ ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किये जाने के अमेरिकी कूटनीतिक प्रयासों का नेतृत्व करने को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन को भी ट्वीट करके बधाई दी.

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जैश कई आतंकवादी हमलों का जिम्मेदार रहा है

उन्होंने कहा, यह कदम आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी कूटनीति की जीत है और दक्षिण एशिया में शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्तागस ने कहा कि जैश कई आतंकवादी हमलों का जिम्मेदार रहा है और वह दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता एवं शांति के लिए खतरा है. उन्होंने कहा, ‘जैश संस्थापक और सरगना होने के नाते अजहर भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की सभी अनिवार्यताओं को पूरा करता है. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश अजहर के खिलाफ संपत्तियां सील करने, यात्रा प्रतिबंध एवं हथियार संबंधी प्रतिबंध लगाने के लिए प्रतिबद्ध है. हम सभी देशों से इन प्रतिबद्धताओं का पालन करने की उम्मीद करते हैं.’

उन्होंने कहा, हम पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा जताई इस प्रतिबद्धता की सराहना करते हैं कि पाकिस्तान अपने बेतहर भविष्य की खातिर अपनी जमीन से आतंकवादियों एवं आतंकवादी समूहों को काम करने की अनुमति नहीं देगा. बता दें, संयुक्त राष्ट्र ने मसूद अजहर को बुधवार को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया. भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है. संरा सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के तहत पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन के सरगना को काली सूची में डालने के एक प्रस्ताव पर चीन द्वारा अपनी रोक हटा लिए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह घोषणा की.

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 चीन अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की डेड लाइन बढ़ाना चाहता था

चीन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने की प्रक्रिया को भारत में लोकसभा चुनावों के खत्म होने के बाद पूरी करना चाहता था चीन की कोशिश थी कि किसी तरह से 15 मई के बाद ही यह प्रक्रिया हो.  हालांकि, चीन की यह चालाकी काम नहीं आयी और अमेरिका ने 30 अप्रैल की डेडलाइन तय कर दी. डेडलाइन को आगे बढ़ाने में नाकाम होने के कारण चीन को यह कदम उठाना पड़ा.  फ्रांस, रूस और इंग्लैंड आपसी सहमति से चीन की डेडलाइन बढ़ाने पर सहमत हो गये थे. हालांकि, डेडलाइन बढ़ाने पर सहमति के बाद भी चीन जिस तिथि तक डेडलाइन को ले जाना चाह रहा था, उस पर सहमति नहीं बनी थी.   अमेरिका की तरफ से अप्रैल में ही डेडलाइन तय कर चीन की तरफ से लिखित आश्वासन के लिए दबाव बनाया गया था.

सूत्रों के हवाले से पता चला है कि भारत ने अमेरिका को यह संकेत दे दिये थे कि चीन की तरफ से वीटो इस्तेमाल के स्थान पर भारत कुछ समझौतों के साथ ही सही, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी करना चाहता है.  भारत चीन के फिर से वीटो प्रयोग करने के कारण अभीतक के सभी प्रयासों को खारिज करने के लिए तैयार नहीं था. इसके बाद अमेरिका ने अप्रैल के आखिरी सप्ताह से आगे इंतजार नहीं करने की बात दोहराई.  चीन ने संशोधित तिथि छह मई की दी.  हालांकि, अमेरिका ने इस पर सहमति नहीं जताई और आखिरकार एक मई की डेडलाइन तय कर दी गयी.  इसी दिन मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया गया.  सूत्रों के हवाले से पता चला है कि पिछले सप्ताह ही चीन ने लिखित स्वीकृति दे दी थी.  सूत्रों का कहना है कि चीन के साथ समझौता इस आधार पर हो सका क्योंकि चीन इसे यूएनएससी में वोट के लिए नहीं ले जाना चाहता था.

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