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ऊर्जा उत्पादन निगम ने बिजली उत्पादन का किया बंटाधार, डेढ़ साल तक एमडी रहे राहुल पुरवार

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  • वित्तीय संकट से गुजर रहा है टीवीएनएल, पतरातू प्लांट से उत्पादन में दो साल हो गयी देरी
  • डेढ़ साल पहले कैबिनेट से टीवीएनएल के विस्तारीकरण की मिली थी स्वीकृति
  • विस्तारीकरण तो दूर, वर्तमान में एक यूनिट से उत्पादन भी हो गया ठप
  • कानून तोड़कर बना पीटीपीएस-एनटीपीसी ज्वॉइंट वेंचर, एजी की रिपोर्ट में हो चुका है खुलासा
  • झारखंड को लगा 187 करोड़ रुपये का झटका

Ranchi : झारखंड राज्य ऊर्जा उत्पादन निगम की लेटलतीफी और उदासीनता के कारण राज्य में बिजली का उत्पादन एक मेगावाट भी नहीं बढ़ पाया. पीटीपीएस, जिससे 160 से 190 मेगावाट तक उत्पादन हो रहा था, वह भी ज्वॉइंट वेंचर के हवाले हो गया. यूनिटें बंद हो गयीं. वहीं, नियम-कानून को ताक पर रखकर ज्वॉइंट वेंचर हुआ. यह एजी की रिपोर्ट में भी खुलासा हो चुका है. उस समय ऊर्जा उत्पादन निगम के एमडी राहुल पुरवार ही थे. टीवीएनएल के विस्तीकरण पर लगभग डेढ़ साल पहले कैबिनेट ने मंजूरी दे दी थी. लेकिन, विस्तारीकरण तो दूर की कौड़ी हो गयी, उल्टे टीवीएनएल की एक यूनिट से उत्पादन भी ठप हो गया. फिलहाल टीवीएनएल वित्तीय संकट से गुजर रहा है. वितरण निगम पर उसका बकाया बढ़कर 3100 करोड़ रुपये का हो गया है.

औने-पौने दाम पर पीटीपीएस को कर दिया हैंडओवर

पीटीपीएस को औने-पौन दाम पर हैंडओवर कर दिया गया. इस ज्वॉइंट वेंचर पर एजी ने भी सवाल खड़े किये. एजी ने अपनी रिपोर्ट में भी कहा कि ज्वॉइंट वेंचर में इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2003 का उल्लंघन हुआ है. इससे झारखंड सरकार को करीब 187 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है. एजी ने झारखंड सरकार और ऊर्जा विभाग से पूछा है कि आखिर वह कौन-सा रास्ता था, जिसको अख्तियार कर सरकार ने पीटीपीएस की वैल्यू आंकी.

पीटीपीएस एसेट के लिए लगाया गया औने-पौने दाम

  • 700 एकड़ जमीन- 474.6 करोड़ रुपये
  • ऐश पॉन्ड 1125 एकड़- 762.75 करोड़ रुपये
  • रेलवे ट्रैक 34 एकड़- 23.05 करोड़ रुपये
  • पीटीपीएस का एसेट- 137.59 करोड़ रुपये

एजी ने पूछा था- भुगतान क्यों नहीं किया गया

एजी का कहना था कि एनटीपीसी ने मार्च 2017 तक पीटीपीएस की जो वैल्यू आंकी थी, उसका भुगतान नहीं किया गया. आखिर भुगतान क्यों नहीं किया? पीटीपीएस 1896 एकड़ में फैला हुआ है, जिसमें एक डैम भी शामिल है. जमीन के साथ मालिकाना हक एक के ही नाम पर है. जमीन और डैम को लेकर कहीं से कोई विवाद नहीं है. ऐसे में किस आधार पर फेयर वैल्यू का आकलन किया गया? एनटीपीसी का चयन करने के पीछे क्या आधार है? ज्वॉइंट वेंचर से पहले पीटीपीएस पर करीब 581 करोड़ रुपये की देनदारी थी. ज्वॉइंट वेंचर तैयार करने के लिए जो मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन तैयार किया गया, उसमें कहीं भी पीटीपीएस की देनदारी का जिक्र नहीं है.

उदासीन रवैया के कारण प्लांट में दो साल हो गयी देरी

तीन मई 2015 को राज्य सरकार ने एनटीपीसी के साथ पतरातू में 4000 मेगावाट पावर प्लांट के लिए करार किया था. करार के मुताबिक 2019 तक 800 मेगावाट की तीन यूनिटें स्थापित की जानी थी. 2019 तक 2400 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, जबकि 2023-24 तक एनटीपीसी को 800 मेगावाट की दो यूनिटें स्थापित करनी है. लेकिन, 2019 तक तीन यूनिट स्थापित नहीं हो पायेंगी. खुद सीएम रघुवर दास ने स्वीकार किया कि प्रदेश में बिजली की दिक्कत है और 2020 तक तीन यूनिट से उत्पादन शुरू होगा. इस समय भी राहुल पुरवार ही एमडी थे.

टीवीएनएल पर खड़ा हो गया वित्तीय संकट

झारखंड राज्य ऊर्जा उत्पादन निगम और बिजली वितरण निगम की लेटलतीफी और उदासीन रवैये के कारण टीवीएनएल के विस्तारीकरण का मामला भी लटक गया. लगभग डेढ़ साल पहले कैबिनेट से टीवीएनएल के विस्तारीकरण को स्वीकृति मिली थी. विस्तारीकरण के तहत 660-660 मेगावाट की दो यूनिटें लगानी थी. इसके लिए राजबार कोल ब्लॉक भी आवंटित हो चुका है. लेकिन, स्थिति जस की तस है. वितरण निगम ने अब तक 3100 करोड़ रुपये टीवीएनएल को चुकाया नहीं है. कोयले की कमी के कारण एक यूनिट ठप है. वहीं टीवीएनएल पर वित्तीय संकट भी गहरा गया है.

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