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राज्य में उर्दू एकेडमी का गठन ठंडे बस्ते में, 2017 में मुख्यमंत्री ने कि थी घोषणा

कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग को नहीं है जानकारी

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Ranchi:  अन्य राज्यों की तर्ज पर झारखंड में उर्दू एकेडमी का गठन हो,  इसके लिए लंबे समय से सामाजिक संगठन प्रयासरत हैं. साल 2017 में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी घोषणा की थी कि राज्य में जल्द ही उर्दू एकेडमी का गठन किया जायेगा.

लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है. पूर्व में भी कई सरकारों ने राज्य में उर्दू एकेडमी के गठन को लेकर घोषणा की है. जबकि इस विषय को लेकर 2007 में नियमावली तैयार की गयी थी. जिसमें वांछित संशोधन के लिए कार्मिक और राजभाषा विभाग ने कल्याण विभाग के पास फाइल भेजी थी.

साल 2015 में कार्मिक और राजभाषा विभाग की ओर से कल्याण विभाग को पत्राचार के माध्यम से उर्दू एकेडमी के गठन और झारखंड कार्यपालिका नियमावली में संशोधित प्रस्ताव की मांग की गयी थी.

साथ ही तैयार नियमावली की जानकारी मांगी गयी थी. इसके बावजूद राज्य में एकेडमी का गठन नहीं हो पा रहा है.

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2013 में भी की गयी थी बैठक

सूत्रों से जानकारी मिली कि 2013 में तत्कालीन अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय भारत सरकार के मंत्री के रहमान खान झारखंड आये थे.

तब उन्होंने राज्य मुख्य सचिव समेत सभी विभागों के सचिवों और जिला प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की थी. जिसमें अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि राज्य में उर्दू एकेडमी का गठन जल्द से जल्द हो जाये.

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इस संबध में कल्याण विभाग और स्कूल शिक्षा साक्षरता विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश की गयी. लेकिन दोनों विभागों के अधिकारियों का कहना है कि विभाग से संबधित मामला नहीं है.

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एकेडमी के बारे में विभागों को नहीं है जानकारी

सामाजिक कार्यकर्ता एस अली ने जानकारी दी कि उन्होंने साल इस संबध में कई आरटीआइ राजभाषा विभाग और कल्याण विभाग को लिखा. लेकिन दोनों विभाग एक दूसरे पर जवाबदेही मढ़ते हैं.

जबकि मामला पूर्णता कल्याण विभाग से संबधित है. उन्होंने बताया कि राजभाषा विभाग की ओर से जवाब दिया जाता है कि उर्दू एकेडमी से संबधित मामला कल्याण विभाग से संबधित है.

वहीं कल्याण विभाग की ओर से जानकारी दी जाती है कि मामला कल्याण विभाग से संबधित है.

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