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Uranium Reserves: एक तो सबसे निम्न गुणवत्ता का, दूसरे महज कुछ ही सालों का बचा है यूरेनियम, आंध्र प्रदेश में बड़ा भंडार होने के बावजूद नहीं होती खोदाई

Vishwajeet Bhatt

Jamshedpur: दुनिया की सबसे निम्न गुणवत्ता का यूरेनियम भारत में है. भारत में यूरेनियम की जो क्वालिटी है, उस स्तर का यूरेनियम का भंडार मिलने पर दूसरे देश खुदाई ही नहीं करते. इस पर सबसे अधिक चिंताजनक ये है कि अपने देश में जो भंडार है, उससे महज 40 साल तक ही देश की जरूरत पूरी हो सकती है. आधारभूत संरचना न होने के कारण आंध्र प्रदेश में यूरेनियम का बहुत बड़ा भंडार होने के बावजूद वहां खुदाई ही नहीं की जाती है.

देश में यूरेनियम का कुल भंडार दो लाख 50 हजार टन है. इसमें से एक लाख 44 हजार टन आंध्र प्रदेश और 75 हजार टन झारखंड में जमीन के नीचे दबा है. राजस्थान और मेघालय में 10-10 हजार टन यूरेनियम है. पांच हजार टन देश के अन्य हिस्सों में है. इस सारे भंडारण से सिर्फ 40 वर्ष तक की ही जरूरत पूरी हो सकती है. कड़प्पा में यूरेनियम का उत्खनन नहीं होता है, इसके चलते सारा दारोमदार झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले पर ही है, क्योंकि देश में सिर्फ यहीं खनन का कार्य होता है.
वैज्ञानिकों ने यूरेनियम के संबंध में 53 शोध पत्र प्रस्तुत किए थे

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झारखंड के जमशेदपुर में स्थित पूर्वी क्षेत्र के परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय द्वारा आयोजित संगोष्ठी में प्रस्तुत एक शोध पत्र के मुताबिक, देश में यूरेनियम का सबसे ज्यादा भंडार आंध्र प्रदेश के कड़प्पा जिले में है. इसके बाद झारखंड का नंबर आता है. राजस्थान के सीकर में और मेघालय के डोमिया सियर्ट में 10-10 हजार टन और देश के अन्य हिस्सों में पांच हजार टन यूरेनियम का भंडार है. निदेशालय की ओर से आयोजित सिंहभूम शियर जोन में यूरेनियम तथा अन्य खनिजीकरण: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य एवं नवीन आयाम विषयक संगोष्ठी में देश भर से जुटे वैज्ञानिकों ने यूरेनियम के संबंध में 53 शोध पत्र प्रस्तुत किए थे.
इन देशों से भारत करता आयात

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भारत परमाणु ऊर्जा से संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए कजाकिस्तान, कनाडा और आस्ट्रेलिया से यूरेनियम का आयात करता है. ये देश इस शर्त पर यूरेनियम की आपूर्ति करते हैं कि भारत यूरेनियम ओर का विघटन करके सिर्फ यूरेनियम निकालेगा और शेष धातु बिना छेड़छाड़ निर्यातक राष्ट्रों को लौटा देगा. शोध पत्र में भारत में यूरेनियम का भंडार कम होने और निर्यात करने वाले देशों के इस रवैये पर चिंता व्यक्त की गई है.

भारत के यूरेनियम की शुद्धता सबसे निचले स्तर की
यूसीआइएल की जादूगोड़ा, नरवा, तुरामडीह, बागजाता, भाटिन, महुलडीह और बांदुहुड़ांग खदानों से निकलने वाले प्रति 100 ग्राम यूरेनियम ओर से 0.05 ग्राम यूरेनियम निकलता है, जबकि दुनिया के अन्य देश प्रति 100 ग्राम यूरेनियम ओर से 0.1 ग्राम यूरेनियम पाए जाने पर खुदाई करते ही नहीं हैं. भारत की खदानों में यूरेनियम बहुत ही कम होने के कारण ही इतनी कम क्षमता वाली खदानों में यूरेनियम की खुदाई की जाती है. शोध पत्र में बताया गया है कि आंध्र प्रदेश के कड़प्पा में, राजस्थान के सीकर में, मेघालय के डोमिया सियर्ट में और देश के अन्य हिस्सों में भी संरक्षित यूरेनियम भी इसी क्षमता का है.

परमाणु वैज्ञानिकों का यह दावा सही है कि देश में मात्र 40 साल का ही यूरेनियम भंडार है. गर्व की बात है कि देश की इस जरूरत को झारखंड का पूर्वी सिंहभूम जिला पूरी कर रहा है.
-डॉ अमित कुमार, सदस्य, एपेक्स, यूरेनियम रेडिएशन शोध कमेटी

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