न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

UP मुख्य सचिव ने कहा- वायु प्रदूषण से राहत के लिए पराली जलाने पर रोक के निर्देशों का कड़ाई से किया जाये पालन

594

Lucknow: धड़ल्ले से पराली जलाये जाने के कारण प्रदूषण का स्तर तय सीमा से अधिक पहुंच गया है. यह स्तर अत्यंत गंभीर से भी अधिक की श्रेणी में है. दिल्ली ही नहीं यूपी में भी प्रदूषण की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है.

इसे भी पढ़ें- #PMC_Bank मामले में आठवें पीड़ित की मौत, खाता में थे 26 लाख रूपये

Sport House

यूपी मुख्य सचिव ने दिये निर्देश

इस गंभीर हालत को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने राज्य के मण्डलायुक्तों एवं जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश दिये हैं. उन्होंने कहा है कि प्रदेश में बढ़ते हुये वायु प्रदूषण को रोकने के लिए पराली जलाने पर रोक के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन कराया जाये.

मुख्य सचिव तिवारी ने कहा कि आगामी रबी की फसल में बेसहारा जानवरों से क्षति होने की शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी नियत कर उनके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करायी जाये.

इसे भी पढ़ें- #Pollution पर गंभीर नीतीश सरकार, 15 साल पुरानी सरकारी और कमर्शियल गाड़ियों पर बैन

Mayfair 2-1-2020

किसी भी व्यक्ति को सड़क पर सोना न पड़े

Related Posts

अमित शाह ने कहा, #CAA वापस नहीं होने वाला, जिसे विरोध करना हो करे, विपक्षी दलों को बहस की चुनौती दी 

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संशोधित नागरिकता कानून (CAA) का विरोध कर रहे विपक्ष की आंखों पर वोट बैंक की पट्टी बंधी होने का आरोप लगाया

मुख्य सचिव ने आगामी शीत ऋतु को देखते हुये निराश्रित लोगों को ठण्ड से बचाने के लिए उनके लिये कंबल खरीदने की प्रक्रिया नियमानुसार जल्द से जल्द शुरु कराने के निर्देश दिये.

उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार रैन बसेरों का निर्माण कराकर यह सुनिश्चित कराया जाये कि प्रदेश में खुले स्थान पर सड़क पर या सड़क के किनारे कोई भी व्यक्ति सोने के लिए विवश न होने पाये.

इसे भी पढ़ें- भविष्य निधि घोटाला: योगी सरकार ने रातों-रात सचिव ऊर्जा, एमडी पावर कॉरपोरेशन का किया तबादला

सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकारियों को लिया था आड़े हाथ

गौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में प्रदूषण पर काबू पाने में विफल रहने के लिए प्राधिकारियों को आड़े हाथ लिया और कहा कि इसकी वजह से लोग जीवन के कीमती साल गंवा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राधिकारियों ने लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया है.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाये जाने की घटनाओं को भी गंभीरता से लिया और कहा कि हर साल निरंकुश तरीके से ऐसा नहीं हो सकता.

पीठ ने स्थिति की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की और सवाल किया, क्या इस वातावरण में हम जीवित रह सकते हैं? यह तरीका नहीं है जिसमें हम जीवित रह सकते हैं.

SP Deoghar

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like