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#UnnaoRapeCase: पीड़िता को मिला न्याय, सेंगर को उम्रकैद व 25 लाख का जुर्माना 

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Unnao (UP): उन्नाव की रेप पीड़िता को आखिरकार कोर्ट से शुक्रवार को न्याय मिल गया. उन्नाव बलात्कार मामले में अदालत से दोषी करार दिये गये भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद व 25 साल की सजा सुनायी गयी है.

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को दोषी माना और सजा सुनायी. इस दौरान जज के सामने सेंगर हाथ जोड़कर खड़े रहे. कोर्ट ने पीड़िता और उसके परिवार को जरुरी सुरक्षा देने का आदेश भी दिया है.

गौरतलब है कि पीड़िता ने जब सेंगर के खिलाफ थाने में शिकायत की थी तो पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज करने से इंकार किया था. पीड़िता के पिता को टॉर्चर किया गया और मौत के घाट उतार दिया गया.

चाचा को एक अन्य मामले में फंसाया गया और फिर पीड़िता के परिवार वाले दुर्घटना का शिकार बने, जो स्पष्ट रूप से किसी साजिश का हिस्सा लगा. ऐसे में पीड़िता का जीवन काफी कष्ट में बीता. 

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13 अप्रैल 2018 को सेंगर को गिरफ्तार किया गया था

सेंगर पर 2017 में उन्नाव में नाबालिग से रेप का दोष सिद्ध हुआ है. इस घटना को लेकर पूरे देश में जबर्दस्त गुस्सा था और संसद के भीतर एवं बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ.

सेंगर उन्नाव जिले की बांगरमऊ सीट से विधायक थे. उसे 13 अप्रैल 2018 को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था.

पीड़िता ने आठ अप्रैल 2018 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था. वह उसके साथ रेप के आरोपी विधायक के खिलाफ पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किये जाने का विरोध कर रही थी.

पीड़िता का आरोप था कि विधायक ने जून 2017 में अपने आवास पर उसका रेप किया. पीड़िता का यह भी आरोप था कि उसके परिवार वालों को धमकी दी गयी. उन्नाव पुलिस ने कहा कि पीड़िता का आरोप था कि 11 जून 2017 को दो युवक उसे उसके गांव से अपहरण कर ले गये थे. उसके बाद 20 जून को मामला दर्ज किया गया.

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रेप के वक्त नाबालिग थी पीड़िता

पीड़िता की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ गैंगरेप और पाक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया गया क्योंकि जिस समय पीड़िता के साथ रेप हुआ था, वह नाबालिग थी.

पीड़िता ने एक अंग्रेजी अखबार को दिये इंटरव्यू में बताया था कि 2017 में चार जून को उसे एक कमरे में ले जाया गया, जहां विधायक ने उसके साथ रेप किया. बाद में उसे धमकाया गया कि अगर मुंह खोला तो पिता और परिवार वालों को मार डालेंगे.

‘मैंने मुंह नहीं खोला लेकिन कुछ दिन बाद 11 जून को मुझे विधायक के लोग अपहरण कर ले गये और कुछ दिन तक गैंगरेप किया. उसके बाद किसी को बेच दिया, जहां से मैं बरामद हुई थी. सेंगर ने हालांकि इन आरोपों से इंकार किया था.

पीड़िता के पिता को चोरी के आरोप में जेल में बंद किया गया था और फिर जेल में ही उनकी मौत हो गयी थी. जब उसके पिता के शव का पोस्टमार्टम किया गया तो रिपोर्ट में यह बात सामने आयी कि उनके शरीर पर घाव के 14 निशान पाये गये थे.

दस अप्रैल को 2018 को छह पुलिसकर्मी निलंबित किये गये. विधायक के भाई अतुल सिंह को गिरफ्तार किया गया. साथ ही बलात्कार के आरोप की जांच के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया.

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12 अप्रैल 2018 को जांच सीबीआइ को सौंपी गयी

इलाहाबाद हाइकोर्ट के निर्देश पर 12 अप्रैल 2018 को जांच सीबीआइ को सौंपी गयी. जिसके बाद सीबीआइ ने कार्रवाई करते हुए अगले दिन ही सेंगर को गिरफ्तार कर लिया. हाइकोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने 14 अप्रैल को शशि सिंह नाम की एक महिला को गिरफ्तार किया गया. शशि पर आरोप था कि वह ही पीड़िता को बहला फुसलाकर सेंगर के आवास पर ले गयी थी.

मई 2018 में सीबीआई ने सेंगर और अन्य के खिलाफ पीड़िता के पिता को फर्जी मामले में फंसाने की साजिश के लिए मामला दर्ज किया और दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया. हाइकोर्ट के निर्देश पर सेंगर और शशि को उन्नाव जेल से सीतापुर जेल भेज दिया गया. उसके बाद सीबीआइ ने सेंगर और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किये.

जुलाई 2019 में पीड़िता के चाचा को हत्या के प्रयास के एक मामले में दोषी ठहराया गया और उन्हें दस साल की कैद हो गयी. इस साल 28 जुलाई को पीड़िता और उसके वकील रायबरेली के गुरूबक्शगंज क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल हो गये. दुर्घटना में पीड़िता की चाचियों की मौत हो गयी. वे जिस कार से जा रहे थे, उसे एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी.

पीड़िता के चाचा ने आरोप लगाया कि दुर्घटना साजिश थी क्योंकि जिस ट्रक ने पीड़ता के कार को टक्कर मारा था वह सेंगर के रिश्तेदार का था. जिसके बाद सेंगर के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया. इस मामले की जांच भी सीबीआइ के पास गयी. इस मामले में तीस हजारी अदालत के जिला जज धर्मेश शर्मा ने शुक्रवार को सेंगर को उसके शेष जीवन काल के लिये आजीवन कारावास की सजा सुनायी.

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