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अनोखी पहल है “बेटी बताओ” योजना, लड़कियों की समस्याओं पर फीडबैक लेकर निदान का हो रहा प्रयास

करियर से जुड़े मुद्दों सहित व्यक्तिगत समस्याओं पर है जोर

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Nitesh Ojha

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Garhwa : सरकारी योजनाओं को जमीन स्तर पर लाने का दबाव तो एक प्रशासनिक अधिकारी पर हमेशा बना रहता है. लेकिन अगर कोई अधिकारी उससे भी एक कदम आगे बढ़कर अपने अधिकार क्षेत्र में किसी योजना की अगली कड़ी को लाने की कोशिश करें, तो यह वाकई काबिले तारीफ है.

हम बात कर रहे हैं झारखंड राज्य के नक्सल प्रभावित जिला गढ़वा के वर्तमान जिला अधिकारी हर्ष मंगला के अनोखी पहल की.
जिस तरह से इस अधिकारी ने मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “बेटी बचाओ बेटी पढाओ” को आगे बढ़ाते हुए जिले के लड़कियों के लिए “बेटी बताओ” योजना की शुरूआत की है, उससे न केवल उनका बल्कि प्रशासनिक ढ़ांचे पर भी लोगों का विश्वास काफी बढ़ा है.

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उद्देश्य और वर्तमान दशा पर अधिकारी ने दी जानकारी

नक्सल प्रभावित गढ़वा जिला अक्सर सशस्त्र विद्रोहियों द्वारा सरकारी बलों पर हिंसा और हमले के लिए सुर्खियों में रहता है. लेकिन हर्ष मंगला ने “बेटी बचाओ बेटी पढाओ” जैसी केंद्रीय योजना को क्षेत्र में सफल बनाने और लड़कियों की समस्याओं को साझा कर निदान करने के लिए एक योजना की शुरूआत की. नाम दिया,“बेटी बताओ”.

जिसका आशय है कि बेटियां अपनी समस्या साझा करें. योजना को लाने के पीछे का उद्देश्य और इसकी वर्तमान दशा को जानने के लिए न्यूज विंग ने इस अधिकारी से बात की. इसपर उन्होंने विस्तार से इस योजना के बारे में बताया.

फीडबैक लेकर प्रशासनिक स्तर पर मदद की पहल

हर्ष मंगला ने बताया कि, कस्तूरबा विद्यालय या अन्य सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने वाली लड़कियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. हम जानना चाहते थे कि यदि उन्होंने शादी कर ली है, तो क्या वो खुश हैं. वहीं अगर वे नौकरी कर रही हैं, तो क्या उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं है. इन्हीं मुद्दों को देखते हुए जिला प्रशासन ने इन लड़कियों का फीडबैक लेना चाहा.

वहीं फीडबैक लेने के दौरान उनसे पूछा गया कि, क्या उन्हें प्रशासन द्वारा कोई मदद चाहिए. इसी को देख इस साल जनवरी माह में “बेटी बताओ” योजना की शुरूआत की गयी. इसका विशेष आशय है, “बेटी, अपनी समस्या साझा करो”.

योजना के तहत एक टोल-फ्री नंबर (9608460378, 9608639251) को लॉन्च किया गया. इस नंबर पर लड़कियां फोन कर अपनी समस्याओं को साझा कर सकती हैं, ताकि जिला प्रशासन अपने स्तर पर समस्याओं को समाप्त करने की पहल कर सके.

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रोजगार से जुड़े ट्रेनिंग में मिलेगी मदद

उन्होंने बताया कि योजना की अगली कड़ी में अब एक कॉल सेंटर बनाने पर विचार हो रहा है. इस सेंटर में बच्चियां अपने रोजगार से जुड़े मुद्दों पर बात कर सकती हैं, अपना फीडबैक दे सकती हैं. मिलने वाले फीडबैक को सुनने के बाद सभी समस्याओं को शॉटलिस्ट कर एक डाटाबेस बनाया जाएगा. साथ ही समस्याओं को सुनकर संबंधित ऑफिस तक भेजकर समस्या के निदान की कोशिश की जाएगी.

डाटाबेस बनाने का एक फायदा यह भी है कि अगर लड़कियां रोजगार चाहती हैं तो रोजगार देने वाली सरकारी एजेंसियों को संबंधित लड़कियों को ट्रेनिंग देने में मदद मिलेगी. योजना के दायरे पर बताया कि पूरे गढ़वा जिला में योजना को काफी तत्परता से लागू करने पर काम हो रहा है.

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1200 से अधिक लड़कियों से हुआ संपर्क, कई बातें आयी जानकारी में
योजना के वर्तमान स्टेटस पर हर्ष मंगला ने बताया कि योजना को लेकर शुरूआत में गांव और आदिवासी लड़कियों के बीच बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं मिली. हालांकि यह एक पायलट फेज था. उसके बाद प्रशासन ने दो स्थानीय महिलाओं की मदद से एक टीम बनायी. और उस टीम ने लड़कियों से संपर्क कर विवरण एकत्र करने के लिए स्कूलों और अन्य स्थानों का दौरा किया.

जिन इलाकों में दौरा नहीं किया जा सका, वहां की लड़कियों से फोन कर संपर्क किया गया. करीब 1200 से ज्यादा लड़कियों को कॉल कर पूछा गया कि उनके कल्याण के लिए और क्या पहल करनी चाहिए. हर्ष मंगला ने कहा कि बातचीत में एक प्रमुख बात जो जानकारी में सामने आयी, वह यह थी कि उच्च शिक्षा के लिए अवसर की कमी भी इनमें एक बड़ी चिंता की बात थी.

कई लड़कियों ने टीम को बताया कि उन्हें अपने गांव के स्तर पर ही कुछ शुरू करने के लिए कौशल विकास की आवश्यकता है. कुछ लड़कियों ने मोबाइल और लैपटॉप रिपेयरिंग सेंटर भी खोलना चाहा.

कॉल सेंटर बनाने पर अब हो रहा विचार

लिमिटेड संसाधन के बावजूद योजना के परिणाम से उत्साहित हर्ष मंगला का कहना है कि अगले फेज में प्रशासन ने एक कॉल सेंटर बनाने पर विचार किया है.

इसके लिए योजना को अगले 12 महीनों के लिए बढ़ा दिया है. इसमें करियर से जुड़े मुद्दों के अलावा उनकी व्यक्तिगत समस्याओं को भी दूर करने की कोशिश की जाएगी. इसमें लड़कियों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान रखने की बात हर्ष मंगला ने कही.

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