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दुर्भाग्यपूर्ण: 1691 शिक्षक में 138 कार्यरत, 3560 में से 1948 सीटें रिक्त

हाल ए मॉडल स्कूल

Ranchi : केंद्र सरकार ने देश भर में शैक्षणिक रूप से पिछड़े प्रखंड में केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर मॉडल स्कूल खोलने की योजना शुरू की थी. इस योजना के अंतर्गत झारखंड में प्रथम चरण में वर्ष 2011 में 40 तथा 2013 में 49 मॉडल स्कूल खोले गये. वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया. इससे पहले वर्ष 2014 में 75 और स्कूल खोलने कि स्वीकृति मिली पर स्कूल नहीं खुल सके. इस तरह से झारखंड में तब से 89 मॉडल स्कूल चल रहे हैं.

अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ रहे हैं आठ हजार स्टूडेंट्स

राज्य में चल रहे सभी 89 मॉडल स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई होती है. इन स्कूलों में 8000 स्टूडेंट्स का नामांकन हुआ है. इन आठ हजार स्टूडेंट्स का भविष्य मात्र 138 घंटी आधारित शिक्षक ही गढ़ रहे हैं. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चों के भविष्य का क्या हो रहा है. इन स्कूलों में नियुक्ति के लिए साल 2016 में पद सृजित किये गये पर नियुक्ति ही नहीं हो पायी. इन मॉडल स्कूलों में एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये लिया जाता है. यह टेस्ट झारखंड एकेडमिक काउंसिल लेती है. इन स्कूलों में क्लास सिक्स से 12 वीं तक पढाई करायी जाती है.

3560 में से 1948 सीटें साल 2020 में रही खाली

मॉडल स्कूलों कि व्यथा यह है कि यहां शिक्षकों के साथ साथ स्टूडेंट्स का भी टोटा है. वर्ष 2020 की प्रवेश परीक्षा में 4001 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे. नामांकन के लिए 1612 स्टूडेंट्स का चयन किया गया. मॉडल स्कूल में कुल 3560 सीटें हैं, जिनमें से 1948 सीटें रिक्त रह गयीं. इसी तरह वर्ष 2015 में 86, वर्ष 2016 में 80, वर्ष 2018 में 67 व वर्ष 2019 में 70 मॉडल स्कूलों में सीटें रिक्त रह गयी थीं. व्यवस्था की मार यह है कि 89 स्कूलों में से 38 स्कूलों के पास अपने भवन नहीं हैं. यहां पढाई कर रहे स्टूडेंट्स को वर्ष 2020-21 में किताबें नहीं मिली. इससे पहले वर्ष 2016-17 में भी बच्चों को किताब नहीं मिली थीं.

मॉडल स्कूलों में सृजित पद के मुकाबले आठ प्रतिशत शिक्षक-कर्मचारी ही कार्यरत

इन मॉडल स्कूलों कि स्थिति ऐसी है कि ये स्कूल बस नाम मात्र के चल रहे हैं. राज्य के 89 मॉडल स्कूलों में सृजित पद के मुकाबले आठ प्रतिशत शिक्षक-कर्मचारी ही काम कर रहे हैं. आंकड़ों में देखें तो सभी मॉडल स्कूलों में केवल 138 शिक्षक ही हैं. ये शिक्षक भी स्थायी होने कि जगह घंटी आधारित हैं. इन्हें प्रति घंटी 120 रूपये ही मिलते हैं.

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