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झारखंड में बेरोजगारी सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा, अरबन एरिया में लॉ एंड ऑर्डर बेहालः रिपोर्ट

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: झारखंड में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बेरोजगारी है. यह अलग बात है कि सरकार बेरोजगारों को कई लाख नौकरी देने का दावा करती आयी है. लेकिन इसके उल्ट आंकड़ें और सर्वे कुछ बता रहे हैं.

बेरोजगारी के मसले पर पब्लिक सरकार से खुश भी नहीं है. जो मार्किंग जनता की तरफ से सरकार को दी जा रही है. वो औसत से काफी कम है. यह खुलासा Association for Democratic Reforms (ADR) की सर्वे से हुआ है.

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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पूरे देश में Association for Democratic Reforms (ADR) ने एक सर्वे किया है. यह सर्वे राज्यवार और लोकसभा क्षेत्र के आधार पर किया गया है. झारखंड ही नहीं बल्कि देश भर में पब्लिक ने बेहतर रोजगार के अवसर को लोकसभा का सबसे बड़ा मुद्दा माना है.

पूरे देश भर की बात की जाए तो 46.80 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ा मुद्दा माना है. वहीं अच्छे अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 34.60 फीसदी लोगों ने दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा माना है और पेयजल को 30.50 फीसदी लोगों ने तीसरा सबसे बड़ा मुद्दा माना है. ADR ने यह रिपोर्ट 2,73,487 लोगों से पूछताछ के बाद तैयार की है.

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झारखंड में बेरोजगारी के मामले में सरकार का कामकाज ठीक नहीं

ADR की रिपोर्ट से यह साफ हो रहा है कि रोजगार के लिए बेहतर अवसर तलाशने के लिए सरकार का कामकाज ठीक नहीं है. पूरे झारखंड की बात की जाए तो करीब 47.08 फीसदी लोगों का मानना है कि राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा बनना चाहिए.

वहीं रिपोर्ट की मुताबिक जनता ने रोजगार के लिए किए जा रहे प्रयासों को नाकाफी ठहराया है. सर्वे के दौरान लोगों से पूछा गया कि सरकार का बेरोजगारी को खत्म के लिए किए जा रहे कामकाज कैसा है.

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रविवार को दिल्ली में स्क्रीनिंग कमिटी की बैठक हुई. बैठक में चेयरमेन टीएस सिंहदेव, प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, सदस्य सलीम अहमद उपस्थित थे.

ADR ने पांच को अधिकतम अंक मानकर लोगों से बेरोजगारी खत्म करने के प्रति सरकार के कामकाज पर नंबर देने को कहा. तीन अंक को एवरेज अंक माना गया. पूरे झारखंड की बात की जाए तो जनता ने सरकार को इस ओर काम करने के लिए औसत से कम अंक दिये हैं. जनता ने सरकार को 2.11 अंक दिये हैं. जो औसत से 0.89 अंक कम है.

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अरबन एरिया में लॉ एंड ऑर्डर पस्त

सर्वे की रिपोर्ट से इस बात का खुलासा हुआ है कि झारखंड के अरबन एरिया (ग्रामीण इलाका) में लॉ एंड ऑर्डर की हालत काफी खराब है. इन इलाकों में पब्लिक का मानना है कि लॉ एंड ऑर्डर ही चुनाव का मुद्दा होना चाहिए.

इन इलाकों में रह रहे 55 फीसदी लोगों का मानना है कि पुलिस अपना काम ठीक से नहीं कर रही है. लिहाजा अरबन एरिया में लॉ एंड ऑर्डर ही सबसे बड़ा मुद्दा है. लोगों ने कानून व्यवस्था को बहाल रखने में सरकार के प्रयास को नाकाफी माना है.

लोगों ने सर्वे के दौरान पुलिसिंग को सुधारने में सरकार के कामकाज को पांच में से 2.10 अंक दिये हैं. जो कि औसत से 0.90 अंक कम है. वहीं बेरोजगारी को अरबन एरिया में दूसरे नंबर पर रखा गया.

अरबन एरिया में 48 फीसदी लोगों का कहना है कि बेरोजगारी चुनावी मुद्दा है. इस ओर सरकार के प्रयास के लिए पांच में से इस 1.99 अंक मिले हैं. जो औसत से 1.01 अंक कम है.

तीसरे नंबर पर स्वास्थ्य व्यवस्था है. 46 फीसदी लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य सुविधाएं ही चुनावी मुद्दा है. इस ओर सरकार के प्रयास को पांच में से 1.91 अंक दिए. जो औसत से 1.09 अंक कम है.

जानिए और किन मामलों को झारखंड की जनता मानती है चुनावी मुद्दा

मुद्दाफीसदी(% में)
बेरोजगारी47.08
बेहतर अस्पताल40.08
लॉ एंड ऑर्डर34.51
किसानों के लिए सब्सिडी31.73
पब्लिक ट्रांसपोर्ट30.53
बेहतर सड़क30.45
पीने का पानी23.65
सिंचाई के लिए पानी18.44
किसानों के लिए ऋण की सुविधा17.84
किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलना14.65

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