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धनबाद-बरवाअड्डा सड़क को जगमगाने के नाम पर 1 करोड़ 55 लाख का खर्च, नया खेल !

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Dhanbad : धनबाद-बरवाअड्डा सड़क को जगमगाने के नाम पर एक नया खेल चल रहा है. एलइडी लाइट से इस सड़क को जगमगाने के लिए 1 करोड़ 55 लाख रुपये की योजना का शिलान्यास 17 नवंबर को मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल, सांसद पीएन सिंह आदि ने किया था. डीएमएफटी मद से यह कार्य किया जा रहा है.

इससे पहले 2011 में राष्ट्रीय खेल के दौरान भी स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर वारा- न्यारा हुआ था. इस सड़क के साथ अन्य सड़कों पर स्ट्रीट लाइट लगाने पर तकरीबन 20 लाख से अधिक राशि खर्च की गयी थी. लाइटें कब जली लोगों को याद नहीं. इन लाइटों की मरम्मत का बिल गुजरे सात सालों में लाइट लगाने में आये खर्च से कहीं ज्यादा बना. इन लाइटों के अलग खंभे थे. धनबाद-बरवाअड्डा सड़क चौड़ीकरण के बाद वह भी साबूत नहीं मिले.

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सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हटा दी गयी सभी स्ट्रीट लाइटें

दो साल पहले शुरू हुई धनबाद- बरवाअड्डा सड़क चौड़ीकरण के दौरान सड़क से स्ट्रीट लाइट हटा दी गयी थीं. अब एक बार फिर से एक करोड़ 55 लाख की लागत से स्ट्रीट लाइटें लगायी जा रही हैं. लोग ऐसी योजना पर पैसे की बर्बादी की चर्चा कर रहे हैं. आम जनता के बीच स्ट्रीट लाइट की नयी योजना चर्चा का विषय बना हुआ है.

सड़क के बीच में लाखों खर्च से कंक्रीट का डिवाइडर बनाया, पौधा लगाने के नाम पर पैसे की बर्बादी

सड़क के बीच में लाखों रुपये खर्च कर करीब पांच किमी लंबा और दो फुट से लेकर चार फुट तक चौड़ा डिवाइडर बनाया गया. चौड़े डिवाइडर में दर्जनों मजदूर और ट्रैक्टर लगाकर मिट्टी भरा गया. नीचे पक्की सड़क और डेढ़ फुट मिट्टी भर कर अशोक, आम आदि के पेड़ लगा दिए गये. पौधे लगते ही सूख गये. आखिर, ऐसा क्यों किया गया? किसी की समझ में कुछ नहीं आया. किसी ने इसे घोटाला कहा तो किसी ने कहा सूझ-बूझ की कमी. सवाल है जब इतनी भी सूझ-बूझ नहीं हो कि डेढ़ फुट मिट्टी में आम और अशोक के पौधे नहीं लग सकते तो फिर ऐसी योजना और इसके बिल की स्वीकृति देनेवाले अधिकारियों को क्या कहा जाएगा.

अब फिर तोड़े जा रहे हैं डिवाइडर

अब एक बार फिर से 1 करोड़ 55 लाख की लागत से स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर डिवाइडर तोड़ने और गड्ढे खोदने का सिलसिला जारी है. अगर  डिवाइडरों को बनाते समय ही पोल खड़ा कर दिया जाता तो डिवाइडरों को ड्रिलिंग मशीन से तोड़ना नहीं पड़ता. एक जगह नहीं. कम-से-कम एक सौ जगह पोल लगाने के लिए डिवाइडर तोड़ा जा रहा है. गहरे गड्ढे किए गये, यह विकास है. एक बार बनाया फिर तोड़ा और फिर बनाया.

गड्ढा बना जान का दुश्मन

17 दिसंबर को स्ट्रीट लाइट के लिए खोदे गए गड्ढे में गिर कर सांड़ मर गया. रविवार की रात को बस स्टैंड के पास स्कूटी सवार युवक गड्ढे में गिर गया. उसे गंभीर अवस्था में जालान अस्पताल में भर्ती कराया गया. पहली घटना बरटांड़ सब्जी मार्केट में घटी थी. सड़क के बीचों-बीच डिवाइडर तोड़ कर स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए खोदे गए गड्ढे में शनिवार की रात को सांड़ गिर गया. गड्ढा छोटा होने के कारण दम घुटने से सांड़ मर गया था. रविवार को दूसरे दिन भी सांड़ के शव को गढ्ढे से किसी ने निकालने की जहमत नहीं उठाई. इसके बाद रात में गोरक्षा दल के लोगों ने सांड़ के शव को निकाला था. लोगों को समझ में नहीं आ रहा कि इसे विकास कहें, विनाश कहें या सरकारी धन की बर्बादी और लूट के लिए उल्टा-सीधा काम.

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