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ज्यूडको के अधीन हैं 39 शहरी जलापूर्ति योजनाएं, अधिकतर पूरी नहीं

पेयजल और स्वच्छता विभाग से अब शहरी जलापूर्ति योजनाएं ज्यूडको के पास, पूर्व से 89 शहरी जलापूर्ति योजनाएं चल रही हैं राज्य में, इसमें से 36 ही पूरी हुईं

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Ranchi: शहरों में जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन अब झारखंड शहरी आधारभूत संरचना निगम (ज्यूडको) के अधीन है. नगर विकास विभाग की यह एजेंसी 2013 से अस्तित्व में आयी है. इसके बाद अधिकतर शहरी जलापूर्ति योजनाओं की निविदा यहीं से निकाली जा रही है. ज्यूडको को 39 शहरी जलापूर्ति योजनाएं दी गयी हैं. इनमें 19 नयी योजनाएं शामिल हैं, जिनकी निविदा 2016-17 वित्तीय वर्ष में की गयी. इन योजनाओं की लागत दो हजार करोड़ से अधिक की है. इनमें से 80 फीसदी जलापूर्ति स्कीम पूरी नहीं हो पायी है. 2013 के बाद से पेयजल और स्वच्छता विभाग से अधिक शहरी जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन ज्यूडको से कराया जा रहा है. पेयजल और स्वच्छता विभाग अब ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं पर ही काम कर रहा है.

पूर्व में नगर विकास विभाग की तरफ से शहरी जलापूर्ति योजना के लिए पीएचइडी को दिया जाता था पैसा

पूर्व में शहरी जलापूर्ति योजनाओं के लिए पेयजल और स्वच्छता विभाग (पीएचइडी) को नगर विकास विभाग से पैसे आवंटित किये जाते थे. अलग राज्य बनने के बाद नगर विकास विभाग की तरफ से 89 शहरी जलापूर्ति योजनाएं पीएचइडी को दी गयीं. इनमें से पाकुड़, साहेबगंज, गिरिडीह, गुमला, सिमडेगा, लातेहार, धनबाद शहर के निरसा, झरिया, गोड्डा, समेत अन्य योजनाएं अब भी पूरी नहीं हो सकी हैं.

ज्यूडको वर्तमान में 19 योजनाओं पर कर रहा है काम

ज्यूडको की तरफ से वर्तमान में 19 योजनाएं ली गयी हैं. ये भी अब तक पूरी नहीं हो पायी हैं. एजेंसी के ऑनगोइंग जलापूर्ति योजनाओं में चास, चतरा, देवघर (मधुपुर), देवघर शहर, धनबाद, दुमका (बासुकीनाथ), चाकुलिया, मानगो, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा, लातेहार, पलामू (हुसैनाबाद), रांची (फेज-1), सरायकेला-खरसांवां, राजमहल, रेहला, सिमडेगा की जलापूर्ति योजनाएं शामिल हैं.

ज्यूडको की तरफ से नियुक्त कि ये गये हैं 38 सलाहकार

ज्यूडको में 38 सलाहकार कंपनियां नियुक्त की गयी हैं. ये सलाहकार कंपनियां ज्यूडको की 150 परियोजनाओं पर अपनी राय सरकार को दे रही हैं. इतना ही नहीं ज्यूडको में काम-काज निबटाने के लिए 31 सहायक परियोजना प्रबंधक, नौ उप परियोजना प्रबंधक, तीन अमीन, दो सर्वेयर, एक टाउन प्लानर और अन्य की टीम भी है. नगर विकास विभाग के सचिव एजेंसी के प्रबंध निदेशक हैं.

कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं जो पूरी नहीं हुईं

योजना का नाम                   लागत               स्थिति

गोड्डा शहरी जलापूर्ति             000                 70 फीसदी ही काम पूरा

गिरिडीह शहरी                     53.57 करोड़    17 फीसदी काम पूरा

चाकुलिया                             16.52 करोड़    50.93 प्रतिशत काम पूरा

रेहला (पलामू)                       9.10 करोड़      14 अगस्त 2018 को होना था पूरा

राजमहल                             30.16 करोड़     काम अधूरा

हजारीबाग शहरी जलापूर्ति   288.46 करोड़    काम अधूरा

चतरा फेज-2                       54.46 करोड़     काम अधूरा

राजमहल                            47 करोड़           काम पूरा नहीं

चास (पुनर्निमाण)                148.17 करोड़   काम पूरा नहीं

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