न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

उल्फा ने असम सरकार को चेताया, नागरिकता विधेयक अमल में लाये, तो युवा सशस्त्र क्रांति से जुड़ेंगे

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के वार्ता समर्थक गुट ने असम में नागरिकता विधेयक अमल में लाने को लेकर असम सरकार को चेताया है.

61

Guwahati : यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के वार्ता समर्थक गुट ने असम में नागरिकता विधेयक अमल में लाने को लेकर असम सरकार को चेताया है. उल्फा ने असम के मूल निवासियों की भावनाओं से खिलवाड़ करने को लेकर केंद्र और असम सरकार को आगाह किया कि इसे पारित करने की कोई भी कोशिश राज्य के युवाओं को सशस्त्र क्रांति में शामिल होने के लिए विवश कर देगी. इस क्रम में असम के तिनसुकिया जिले में पांच बांग्ला भाषी लोगों की हत्या की हालिया घटना के लिए जिम्मेदार ठहराये जाने के संबंध में उल्फा के शीर्ष नेता ने सर्वानंद सोनोवाल नीत राज्य सरकार की आलोचना की.  आरोप लगाया कि गुट की नकारात्मक छवि चित्रित करने के लिए ऐसा किया गया. उल्फा के वार्ता समर्थक गुट ने दावा किया कि तिनसुकिया हत्याकांड के बाद उसके वरिष्ठ नेता जितेन दत्ता और मृणाल हजारिका की बगैर किसी सबूत के गिरफ्तारी की गयी है. यह समाज में और अधिक विभाजन तथा अशांति पैदा करेगी. उल्फा नेताओं के अनुसार एनआरसी विधेयक को लेकर असम के मूल निवासियों में डर की भावना घर कर गयी है.

इसे भी पढ़ेंःसीबीआई की स्थिति बिना कप्तान के जहाज की तरह,   विजय माल्या, मेहुल चोकसी मामले में असमंजस बरकरार

असम को त्रिपुरा नहीं बनने देना चाहिए

कहा कि असम को त्रिपुरा नहीं बनने देना चाहिए, जहां हिंदू बंगालियों ने आदिवासियों से राज्य को हथिया लिया है. बता दें कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 को लेकर राज्य में कई प्रदर्शन हुए हैं.  बता दें कि यह विधेयक अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने के बाद छह साल तक भारत में बगैर किसी उचित दस्तावेज के भी निवास करने वाले अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है.  वार्ता समर्थक गुट के महासचिव अनूप चेतिया ने पीटीआई-भाषा से कहा, हम सरकार को पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि अगर विधेयक पारित होता है तो कई युवा सशस्त्र क्रांति में शामिल हो जायेंगे. चेतिया ने कहा, असमी लोगों को इस बात का डर है कि विधेयक से उनकी विरासत मिट जायेगी. 18 साल जेल में बिताने के बाद 2015 में बांग्लादेश से उनकी स्वदेश वापसी हुई थी.  असम के वित्त मंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा, केन्द्र सरकार ने यह विधेयक संसद में पेश किया है और अब मामला संयुक्त संसदीय समिति के पास है. लेकिन भाजपा प्रदेश इकाई अध्यक्ष रंजीत कहते हैं कि विधेयक को लेकर असम के लोगों में डर की भावना की बात की गलत है.

 

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Comments are closed.

%d bloggers like this: