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केंद्रीय विवि में यूजी-पीजी की पढ़ाई 2019 से महंगी, जेएनयू, जामिया, एएमयू सहमत

सरकार के नये नियम के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय अपना फंड बढ़ाने के लिए दाखिला और यूजर फीस बढ़ा सकते हैं.

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NewDelhi  : देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 2019 से यूजी और पीजी प्रोग्राम की पढ़ाई महंगी हो जायेगी. केंद्र सरकार के  नये नियम के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय अपना फंड बढ़ाने के लिए दाखिला और यूजर फीस बढ़ा सकते हैं. खास बात यह है कि जेएनयू, जामिया, एएमयू, हरियाणा, धर्मशाला समेत कई अन्य यूनिवर्सिटी ने सरकार के नये नियमों के तहत समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये हैं. सूत्रों के अनुसार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने पहली बार विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी व जवाबदेही तय की है. अब विवि अपनी मर्जी से किसी भी योजना के नाम पर सरकार से बजट नहीं मांग सकते. साथ ही विश्वविद्यालयों को अपनी जरूरतों के आधार पर फंड भी जुटाना होगा.

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हर साल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपना एक्शन प्लान सौंपना होगा

 खबरों के अनुसार जामिया मिलिया इस्लामिया ने सबसे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय, यूजीसी के साथ समझौता किया है. इस क्रम में जेएनयू,  अलीगढ़  मुस्लिम विश्वविद्यालय,  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला केंद्रीय विश्वविद्यालय, विश्व भारती, हैदराबाद विश्वविद्यालय सरकार के एक्शन प्लान में शामिल हो गये हैं.  जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालयों को अब हर साल मानव संसाधन विकास मंत्रालय को अपना एक्शन प्लान सौंपना होगा.एक्शन प्लान में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में शामिल होने की तैयारी, गुणवत्ता में सुधार,  फैकल्टी, पाठ्यक्रम,  इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, कोर्स डिजाइन, रिसर्च,  इनोवेशन व रोजगार के मौके बढ़ाने आदि पर विस्तार से बताना होगा.

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एक्शन प्लान के तहत ही विश्वविद्यालयों को मंत्रालय से पैसा मिलेगा

एक्शन प्लान के तहत  ही विश्वविद्यालयों को मंत्रालय से पैसा मिलेगा. हर छह माह बाद एक्शन प्लान की स्टेट्स रिपोर्ट भी मंत्रालय में जमा करनी होगी. बता दें कि यदि विश्वविद्यालय एक्शन प्लान के तहत काम नहीं करेंगे तो उनकी फंडिंग रूक जायेगी. हालांकि विश्वविद्यालय इनोवेटिंग अकादमिक व ट्रेनिंग प्रोग्राम के जरिये से फंड बढ़ा सकता है. विश्वविद्यालयों की ईसी (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) के पास पावर रहेगा जो फैसले लेने में सक्षम है, लेकिन यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत विश्वविद्यालय पॉलिसी में दखल नहीं दे पायेंगे.

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