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#UddhavThackeray का #BhimaKoregaonViolence मामले में कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का आश्वासन

Mumbai :  महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने राकांपा (एनसीपी) के एक प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया है कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में दलित कार्यकर्ताओं के खिलाफ दायर आपराधिक मामले जल्द से जल्द वापस लिये जायेंगे.

जान लें कि एनसीपी  विधायक प्रकाश गजभिये ने उद्धव ठाकरे को पत्र लिखकर भीमा कोरेगांव केस  में कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने का आग्रह किया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार  प्रतिनिधिमंडल में कैबिनेट मंत्री जयंत पाटिल, छगन भुजबल और विधायक प्रकाश गजभिये शामिल थे.

गजभिये ने कहा, कानून का पालन करने वाली एजेंसियों ने भीमा कोरेगांव मामले में कार्यकर्ताओं की कथित भागीदारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी थी. उनका आरोप था कि इन सभी को झूठे तरीके से फंसाया गया,  इसलिए हमने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इनके खिलाफ लगे आरोप वापस लिये जायें.  प्रकाश गजभिये के अनुसार सीएम उद्धव ठाकरे ने हमारी मांग स्वीकार कर ली.

कहा गया कि भीमा कोरेगांव मामला एलगार परिषद की रैली से अलग है. एलगार परिषद मामले में नौ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जिसमें सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, वर्णन गोंजाल्विस, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले और पी वरवरा राव हैं, जिन पर प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) से कथित रूप से जुड़े होने का आरोप है.

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भड़काऊ भाषणों से भीमा कोरेगांव में जातीय दंगे हुए.

पुणे पुलिस का कहना है कि सीपीआई (माओवादी) ने 31 दिसंबर 2017 को पुणे में एलगार परिषद की फंडिंग की थी. आरोप है कि एलगार परिषद में एक जनवरी 2018 को कथित भड़काऊ भाषणों से भीमा कोरेगांव में जातीय दंगे हुए. मालूम हो कि एक जनवरी 2018 को वर्ष 1818 में हुई कोरेगांव-भीमा की लड़ाई को 200 साल पूरे हुए थे.

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दलित संगठनों ने एक जुलूस निकाला था, इसी दौरान हिंसा भड़की

इस दिन पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव में दलित समुदाय के लोग पेशवा की सेना पर ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की जीत का जश्न मनाते हैं. इस दिन दलित संगठनों ने एक जुलूस निकाला था. इसी दौरान हिंसा भड़क गयी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी थी. पुलिस ने आरोप लगाया कि 31 दिसंबर 2017 को हुए एलगार परिषद सम्मेलन में भड़काऊ भाषणों और बयानों के कारण भीमा-कोरेगांव गांव में एक जनवरी को हिंसा भड़की.

पिछले साल  28 अगस्त को महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने माओवादियों से कथित संबंधों को लेकर पांच कार्यकर्ताओं- कवि वरवरा राव, अधिवक्ता सुधा भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा, गौतम नवलखा और वर्णन गोंसाल्विस को गिरफ़्तार किया था. महाराष्ट्र पुलिस का आरोप है कि इस सम्मेलन के कुछ समर्थकों के माओवादिओं से संबंध हैं.

इससे पहले महाराष्ट्र पुलिस ने जून 2018 में एलगार परिषद के कार्यक्रम से माओवादियों के कथित संबंधों की जांच करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन और महेश राउत को गिरफ्तार किया था.

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