Lead NewsNationalNEWSTOP SLIDER

संकट में उद्धव सरकार: बढ़ती ही चली जा रही है सियासी तपिश, शरद पवार ने की उद्धव से बात

Mumbai: शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे की उद्धव सरकार से बगावत के बाद महाराष्ट्र की सियासी तपिश बढ़ती ही चली जा रही है. गुवाहटी पहुंचने के बाद शिंदे ने मीडिया से कहा कि उनके साथ 40 विधायक मौजूद हैं, 10 और जुड़ेंगे. चर्चा चल रही है कि वह भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की जुगत में हैं. यह भी कहा जा रहा है कि भाजपा के इशारे पर ही यह कदम उठाया है और हर मोड़ पर भाजपा का साथ भी मिल रहा है.

 

इधर, उद्धव ठाकरे ने एक बजे पार्टी की बैठक बुलाई है. इस बैठक से पूर्व मराठा क्षत्रप शरद पवार ने उद्धव ठाकरे से बात भी की है. हालांकि, क्या बातचीत हुई है इसका खुलासा नहीं हो पाया है. इधर, कांग्रेस पार्टी ने अपने विधायकों को बचाने की तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस नेता कमलनाथ मुंबई पहुंच चुके हैं. कमलनाथ ने कहा कि आज देश में सौदे की राजनीति हो रही है. मध्यप्रदेश का उदाहरण आप जानते हैं. ये राजनीति हमारे संविधान के विपरीत है और भविष्य के लिए खतरे की बात है. शिवसेना को खुद तय करना है कि वे अपने विधायकों से कैसे बात करेंगे. कांग्रेस के विधायक बिकाऊ नहीं हैं.

 

शिंदे के इस कदम से शिवसेना में बेचैनी देखी जा रही है. शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, सत्ता ही न जाएगी. उन्होंने कहा कि फिलहाल अच्छे माहौल में बात हो रही है. यह भी कहा कि पार्टी की प्रतिष्ठा सबसे ऊपर है उसके बाद ही सबकुछ.

 

Catalyst IAS
SIP abacus

इस बीच सूचना मिल रही है कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी कोरोना संक्रमित हो गए हैं. राजभवन के एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार को जांच करने के बाद राज्यपाल कोरोना संक्रमित पाए गए जिसके बाद उन्हें दक्षिण मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मौजूदा स्थिति में राज्यपाल की बड़ी भूमिका है.

 

MDLM
Sanjeevani

जैसा कि शिंदे दावा कर रहे हैं, उनके साथ 40 में से 33 विधायक शिवसेना के हैं. शिवसेना के कुल विधायकों की संख्या 53 है. दल-बदल कानून से बचने के लिए 37 विधायकों का एक साथ टूटना जरूरी हैं. फिलहाल शिंदे समेत 33 विधायक हैं. जाहिर है चार और विधायकों का साथ चाहिए. मौजूदा स्थिति में इस मुश्किल नहीं कहा जा सकता है. शिंदे का दावा है कि सात निर्दलीय विधायकों का भी साथ है. कहा जा सकता है कि दल बदल कानून से बचाव का रास्ता साफ होते ही सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरु हो सकती है.

Related Articles

Back to top button