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दो साल में दो सदस्यों को भी सिंडिकेट में शामिल नहीं कर सकी रांची यूनिवर्सिटी, 2017 में पारित हुआ था प्रस्ताव

सीनेट से दो सदस्यों को सिंडिकेट में शामिल करना था, जवाब नहीं दे रहे अधिकारी

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Ranchi : रांची यूनिवर्सिटी में सीनेट और सिंडिकेट का भी कोई महत्व नहीं रह गया है. साल 2017 में सीनेट की बैठक हुई थी. जिसमें सीनेट के दो सदस्यों को सिंडिकेट में लाने का प्रस्ताव पारित किया गया था. जिससे छात्र हितों के मुद्दों पर सिंडिकेट स्तर पर भी विचार विमर्श किया जा सके.

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खुद वीसी डाॅ रमेश कुमार पांडेय ने इस प्रस्ताव को पारित किया. इसके बावजूद इन सीनेट सदस्यों को सिंडिकेट में शामिल करने के लिए चुनाव नहीं कराया गया. रांची यूनिवर्सिटी के कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए सीनेट में छात्र प्रतिनिधियों ने ये प्रस्ताव लाया था.

कुछ सीनेट सदस्यों बात करने से जानकारी हुई कि यूनिवर्सिटी प्रबंधन को काफी दबाव देने पर इस प्रस्ताव को पारित किया गया. इसके लिए नियमता चुनाव होनी थी. लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी यूनिवर्सिटी की ओर से कोई चुनाव नहीं कराया गया.

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ठंडे बस्ते में पड़ा है मुद्दा

सीनेट सदस्य अटल पांडेय से जानकारी हुई कि प्रस्ताव सीनेट में पास किया गया था. ऐसे में पिछले दो साल से यूनिवर्सिटी की ओर से सीनेट की बैठक नहीं कराई गई. जिससे ये मुद्दा जस का तस पड़ा है. यूनिवर्सिटी में सारे प्रस्ताव वर्तमान में सिंडिकेट से पास करा लिए जा रहे है. जबकि यह अधिकार सीनेट का है.

सीनेट सदस्यों को सिंडिकेट में जगह मिलने से कार्यों में पारदर्शिता आयेगी. सीनेट सदस्यों में लगभग सौ लोग हैं. जिनमें सभी विभागाध्यक्ष, छात्र प्रतिनिधि, कुलाधिपति और सरकार के प्रतिनिधि होते हैं. जबकि सिंडिकेट सदस्यों में 10-12 लोग होते हैं. जो शिक्षक और कर्मचारी प्रतिनिधि होते हैं. यूनिवर्सिटी के कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सिंडिकेट से होते हुए ही सीनेट में जाती है.

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दो महीने से नहीं हुई सिंडिकेट की बैठक

यूनिवर्सिटी की ओर से पिछले दो महीने से सिंडिकेट की बैठक भी नहीं हुई है. जबकि प्रत्येक पंद्रह दिन में सिंडिकेट की बैठक यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित की जानी चाहिए. सिंडिकेट सदस्य अर्जुन राम ने जानकारी दी कि कई बार वीसी को इस संबध में अवगत कराया गया है लेकिन फिर भी उन्होंने इसके लिए कोई तारीख तय नहीं किया.

जबकि यूनिवर्सिटी के कई महत्वपूर्ण कार्य बैठक न होने के कारण ही रुके हुए हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए वीसी आचार संहिता लागू होने की बात करते हैं. जबकि सिंडिकेट बैठक का आचार संहिता से कोई लेना देना नहीं है. यह मामला छात्रहित और यूनिवर्सिटी के अधिकारों से जुड़ा है.

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किसी से नहीं मिला सही जवाब

प्रो वीसी डाॅ कामिनी कुमार ने कहा कि इस संबध में रजिस्ट्रार से जानकारी मिलेगी. लेकिन जब रजिस्ट्रार अमर कुमार चौधरी से जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि इस पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसलिए इस संबंध में कुछ भी नहीं बता सकते.

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