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दो साल बाद भी दुर्घटना में मृत पर्यवेक्षिका रमावती देवी के परिजनों को मुआवजा नहीं मिला

  Dhanbad : दो साल बाद भी दुर्घटना में मृत पर्यवेक्षिका रमावती देवी के परिजनों को मुआवजा नहीं मिला है. बता दें कि   ध्नबाद कोर्ट में वकालत करनेवाले मनोज राम की पत्नी रमावती देवी की 17 नवंबर, 2016  को सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. मनोज राम अपनी पत्नी रामावती देवी को बाइक पर ड़यूटी पर पहुंचाने जा रहे थे. जीटी रोड पर लोहार बरवा के पास एक ट्रक ने उनकी बाइक में ठोकर मार दी. इस दुर्घटना में रमावती देवी की दर्दनाक मौत हो गयी. मनोज बुरी तरह घायल हो गये. उनकी कई हड्डियां टूट गयी. कई माह ठीक होने में लगे. इलाज में भारी खर्च और कमाई बंद हो जाने से उसकी आर्थिक स्थिति लड़खड़ाने लगी. बताया गया कि पत्नी की कमाई से परिवार चलता था. टुंडी सीडीपीओ के मातहत कार्यरत पर्यवेक्षिका पत्नी की नौकरी कान्ट्रेक्ट पर थी. विभाग की पर्यवेक्षिकाओं ने मुआवजे को लेकर आवाज उठाई, लेकिन कुछ नहीं हुआ. विभाग की ओर से मृत पर्यवेक्षिका को देखने कोई नहीं आया. पर्यवेक्षिकाओं ने हंगामा मचाया. बात बढ़ने पर सीडीपीओ आये. पर्यवेक्षिकाओं के अनुसार वे आश़्वासन देकर चले गये.

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पर्यवेक्षिकाओं काप्रतिनिधिमंडल बरवाअड्डा हवाई अड्डे पर सीएम से मिला था

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20 नवंबर को राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास धनबाद आये. उनसे पर्यवेक्षिकाओं का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाअड्डा हवाई अड्डे पर मिला. उन्होंने अपना दुखड़ा रोया. सीएम ने मृतक रमावती देवी के परिजनों को दो लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही. यह खबर दूसरे दिन दैनिक प्रभात खबर में छपी.  लेकिन महीनों बीत गये, आज तक पर्यवेक्षिका रमावती देवी के परिजनों को मुआवजे का भुगतान नहीं हुआ. मनोज ने  इस संबंध में धनबाद के उपायुक्त कार्यालय में गुहार लगायी. इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के अवर सचिव के नाम पत्र लिख कर दिशा निर्देश मांगा गया. जिला कल्याण पदाधिकारी ने भी विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर दिशा निर्देश मांगा. पर इस दिशा में आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई. मनोज राम को आज भी मुआवजा मिलने का इंतजार है.

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