LITERATURE

वर्तमान समय की कठोरता को उकेरती असित नाथ तिवारी की दो कविताएं

Asit Nath Tiwary

 

प्रश्न  पालथी  मारे  बैठे  उत्तर सब  लाचार पड़े

 

आंखों में नकली खुशियां हैं

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आ आ कर मुस्कान थकी है,

भीतर से मन  बुझा  बुझा है

चेहरों पर सेल्फी चिपकी है।

 

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असली खुशियों की राहों में सौ सौ नंगे तार पड़े

 

ऊँचाई  पर  दृष्टि  गड़ी पर

दिखती नहीं कहीं भी सीढ़ी,

हारा थका  हुआ  बैठा  युग

युग की प्रस्तावक यह पीढ़ी।

 

जिसके पास मरे सपने हैं , कुछ हैं वह बीमार पड़े।

 

वह उम्मीद कहां जो आकर

इस मरुथल में बूंद उछाले,

पीड़ा के अखबार छाप दे

गीतों के संस्करण निकाले।

जाने कितने आंसू लिपि में बद्ध किंतु बेकार पड़े।

 

तबीयत हिंदुस्तान की

 

जिसने दुनिया को बुद्ध दिया

दिया अहिंसा का पैगाम

आज उसी धरती पर देखो

नफरत, हिंसा औ संग्राम

खून सनी मूर्ति खड़ी है

महावीर भगवान की

देखो बापू कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

हाथों में तलवारें लेकर देखो धर्म निकलता है

खूनी मजहब, खूनी पंथ अब रोज ही तांडव करता है

सड़कों पर नारे लगते अब भारत के अपमान की

देखो भगत सिंह कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

गंगा से यमुना को जुदा कर वो नई धार बनाएंगे

और गंगा का घर तोड़ कर वोटबैंक सजाएंगे

सरयू की लहरों पर बहती पीड़ा है अब राम की

देखो आज़ाद कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

बारूदों की फसलें बोतें भारत की पावन भूमि पर

जनता का सिर टांगे घूमें सत्ता की संगीनों पर

मंदिर-मस्जिद के बाहर लटका दें, लाशें ये ईमान की

देखो अशफाक कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

स्कूल-कॉलेजों के छात्रों को आतंकवादी बताते हैं

पढ़े-लिखे लोगों को देखो देशद्रोही कह जाते हैं

रोज़ मजाक बनाते हैं ये खुदीराम के बलिदान की

देखो नेताजी कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

गीता और कुरान के पोथे पग-पग पर ठुकराते हैं

भारत के संविधान को सलीबों पर लटकाते हैं

विवेकानंद के घर को बनाया धरती अब उन्माद की

देखो महात्मा कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

जो अब अमन की बातें करते

उनसे ये चिढ़ जाते हैं

जाति-जाति और धरम-धरम में दुश्मनी खूब बढ़ाते हैं

नफरत के माहौल में गुम हैं ज़रूरतें हिंदुस्तान की

देखो गांधी, कैसे बिगड़ी

तबीयत हिंदुस्तान की

 

अब न संभले तो फिर सावरकर-जिन्ना उठ आएंगे

एक बार फिर भारत मां का आंचल फाड़ वो जाएंगे

लाज बचानी है अब तो पूर्वजों के बलिदान की

दंगों में ना जलने दें अब

सुंदरता हिंदुस्तान की

 

कवि के बार में – असित नाथ तिवारी कवि और पत्रकार हैं. बिहार के पश्चिमी चम्पारण के अमवा मझार गांव में जन्म हुआ. 2003 में दैनिक अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की.2007 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हैं. कवितापुंज के नाम से अपना ब्लॉग है.

 

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