LITERATURE

#LockDown के बीच सड़कों पर उमड़े मजदूरों के सैलाब की त्रासदी बयान करतीं कृष्ण कल्पित और लालदीप गोप की दो कविताएं

लॉकडाउन में हजारों मजदूर जो सड़कों पर निकल आये हैं, उन्होंने देश की सियासत को अपने तरीके से नंगा किया है. भूख, मौत और मौसम की बेरुखी के बावजूद मजदूरों का ये काफिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है, आज नहीं तो कल इसके लिए जिम्मेदार ताकतों को जवाब देना ही होगा. लेकिन इनके दर्द की हम जुबान बनने की कोशिश में पेश ये दो कविताएं –  

कृष्ण कल्पित

………..

मैं तुम्हारे तलुओं में

 

advt

मैं तुम्हारे तलुओं में

जैतून के तेल की मालिश करना चाहता हूं

 

जिन हाथों से थामा था तुमने साइकिल का हैंडल

adv

मैं उन हाथों को चूमना चाहता हूं

 

गुरुग्राम से दरभंगाक तक

अपने घायल पिता को कैरियर पर बिठाकर

ले जाने वाली स्वर्णपरी

मैं तुम्हारी जय-जयकार करना चाहता हूं

 

तुम्हारी करुणा तुम्हारा प्यार तुम्हारा साहस देखकर हैरान हूं आश्चर्य से खुली हुई हैं मेरी आँखें

 

मैं उन तमाम 33 कोटि देवी-देवताओं को

बर्ख़ास्त करना चाहता हूं

जिन्होंने नहीं की तुम पर पुष्प-वर्षा

 

मोटर-गाड़ियों रेल-गाड़ियों और हवाई-जहाज़ों का आविष्कार क्या आततायियों अपराधियों और धनपशुओं के लिए किया गया था

 

तुमने अपने चपल-पांवों से

1200 किलोमीटर तक भारतीय सड़कों पर सात-दिनों तक जो महाकाव्य लिखा है वह पर्याप्त है

इस देश के महाकवियों को शर्मिन्दा करने के लिए

 

डूब मरो शासको

डूब मरो कवियो

डूब मरो महाजनो

 

ओ, साइकिल चलाने वाली मेरी बेटी

मैं तुम्हें अन्तस्तल से प्यार करना चाहता हूं !

 

सड़क पर लौटते लोग

 

(डॉ लालदीप गोप)

 

अब जब तुम

गाँव लौट चुके हो

तो इस ‘कोरेन्टीन’ में

जरा सोचना

की तुम्हारे हिस्से की रोटी

शहर कैसे पहुंच जाती है

और उसे तलाशते तुम

शहर तक.

 

जिनके लिए तुम जीवन भर

अपने पसीने से भरते रहे

उनकी कोठियां

खड़ी करते रहे

आटालिकाएं

वे तुमसे मुंह फेर लिये

‘वायरस’ से अधिक खतरनाक है

तुम्हे बगैर काम के रोटी देना.

 

 

अब जब तुम

अपने गाँव

लौट आये हो

तो जरा विचारना

की तानाशाहों की हेकड़ी

और बमों की ढेर पर

बैठी दुनिया

एक ‘वायरस’ के डर से

थर-थर काँप रही है

ऐसे में एक मुल्क है ‘क्यूबा’

जब पूरी दुनिया ‘लाकडान’ है

वह मानवता का मिसाल है

बना सको तो बना लेना

उसके जैसा अपना गाँव-देश.

 

नहीं तो अगली बार

जब तुम लौटोगे शहर से

तब शायद यह सड़क भी

जिसे बनाने में तुम्हारे गाँव का पहाड़,

मिटटी और तुम्हारे पूर्वजों का पसीना है

किसी कंपनी के हाथों बिक चूका होगा.

 

 

परिचय  –

डॉ. लालदीप गोप

संप्रति एवं पता-   डिपार्टमेंट ऑफ पेट्रोलियम इंजिनियरिंग आइ आइ टी (आइ एस एम) धनबाद, झारखंड
मोबाईल  – 07677419434

Email- laldeep3@gmail.com

advt
Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button