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रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में दो साल से धूल फांक रहीं 1.20 करोड़ की दो नयी एक्स-रे मशीनें, कभी नहीं हुआ इस्तेमाल

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Ranchi : रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में एक्स-रे की दो मशीनें धूल फांक रही हैं. इनकी खरीद होने के बाद कभी भी इनका उपयोग नहीं हुआ. यहां तक कि मशीन का कनेक्शन तक नहीं किया गया है. जानकारी के अनुसार दोनों मशीनों की कीमत लगभग एक करोड़ 20 लाख रुपये है. यानी एक मशीन की कीमत लगभग 60 लाख रुपये है. इन मशीनों को लगभग दो साल पहले खरीदा गया था, लेकिन समस्या यह है कि इन मशीनों को उपयोग में नहीं लाया जा रहा है. दोनों मशीनें रेडियोलॉजी विभाग के कमरा संख्या 9 और 13 में बंद रहती हैं. जब इन कमरों को खुलवाकर देखा गया, तो वहां ये मशीनें धूल फांकती दिखीं. इन मशीनों को बॉडी एक्स-रे के लिए मंगाया गया था. तकनीकी जानकार की मानें, तो इसमें एक मशीन ऐसी है, जो बॉडी के हर पार्ट का एक्स-रे करने में सक्षम है. इसके बावजूद कमरे में बंद करके इसे सड़ाया जा रहा है. ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जब इन मशीनों की जरूरत ही नहीं थी, तो हॉस्पिटल के करोड़ों रुपये इसे खरीदने में व्यय क्यों किये गये.

दो मशीनों पर है पूरा लोड

रिम्स के रेडियोलॉजी विभाग में दो मशीनों पर पूरा लोड रहता है. विभाग इंचार्ज के सोनेलाल राय ने बताया कि प्रतिदिन लगभग 250 से 300 के बीच प्लेट लगाया जाता है.  डीआर और सीआर मशीन में ही ज्यादा लोड रहता है. सोनेलाल राय ने बताया कि किसी-किसी मरीज को चार-पांच एंगल से एक्स-रे करना होता है, इससे और ज्यादा समय लगता है. ऐसे में अगर बंद मशीन को संचालित किया जाये, तो लोड थोड़ा और कम होगा. कई बार मरीजों को एक्स-रे कराये बिना ही लौटना पड़ता है. रिम्स में भर्ती होनेवाले अधिकतर मरीजों को एक्स-रे की प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है. हड्डी टूटने से संबंधित बीमारियों में तो मरीजों को दो से ज्यादा एक्स-रे कराना होता है, लेकिन दुर्भाग्य है कि रिम्स में नयी मशीन होते हुए भी उसका उपयोग नहीं किया जा रहा है.

मशीनों के बारे में ली जा रही है जानकारी : निदेशक

इस संबंध में रिम्स के निदेशक डॉ डीके सिंह ने कहा कि अभी मशीनों के बारे में जानकारी ले रहे हैं. कितनी खराब हैं और कितनी संचालित हो रही हैं, यह रिपोर्ट देने को कहा गया है. वहीं, जो मशीन बन सकती है, उसे बनाने के भी आदेश दिये गये हैं.

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मैन पावर की है कमी

रेडियोलॉजी विभाग के इंचार्ज सोनेलाल राय ने बताया कि विभाग में मैन पावर की भारी कमी है. सिर्फ तीन अटेंडेंट और तीन टेक्नीशियन से ही काम चलाया जा रहा है. इसमें भी प्रतिदिन कोई न कोई छुट्टी पर होता है.  ऐसे में काम चलाना और कठिन हो जाता है. उन्होंने बताया कि क्रिसमस के समय दो अटेंडेंट छुट्टी पर चले जायेंगे, इससे समस्या और बढ़ जायेगी. यदि अभी से कोई व्यवस्था नहीं की गयी, तो आनेवाले समय में परेशानी बढ़ सकती है. इसे लेकर निदेशक को पत्र भी लिखा है.

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