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बेहाल है राजकीयकृत प्लस टू विद्यालयों का हाल, बगैर उर्दू शिक्षक के पढ़ रहे हैं दो सौ विद्यार्थी

साथ ही विद्यालय प्रबंधन को भी इन विद्यार्थियों के लिए शिक्षक उपलब्ध कराने में परेशानी होती है.

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Ranchi : उर्दू शिक्षक बहाली और उर्दू विद्यार्थियों की समस्याएं राज्य में नई नहीं है. शिक्षकों की बहाली हो नहीं रही, नतीजा ये हो रहा है कि विद्यार्थी बैगर शिक्षक के पढ़ने को मजबूर हैं. कुछ ऐसा ही हाल कांके ब्लाॅक स्थित राजकीयकृत प्लस टू विद्यालय का है. यहां उर्दू पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग 200 है, लेकिन विद्यालय में कोई ऐसे शिक्षक नहीं जो विद्यार्थियों को उर्दू पढ़ायें. ये हाल सिर्फ कांके ब्लाॅक के इस राजकीयकृत प्लस टू विद्यालय का नहीं है. बल्कि ठाकुर अमर विश्वनाथ शाहदेव जिला स्कूल, चान्हो स्थित राजकीयकृत विद्यालय समेत कई विद्यालय जहां उर्दू के विद्यार्थी तो है, लेकिन यहां उर्दू के शिक्षक नहीं है. ऐसे में विद्यार्थियों को उर्दू पढ़ने में परेशानी तो है. साथ ही विद्यालय प्रबंधन को भी इन विद्यार्थियों के लिए शिक्षक उपलब्ध कराने में परेशानी होती है.

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विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं बीएड प्रशिक्षु 

राजकीयकृत प्लस टू विद्यालय कांके के प्राचार्य सफदर इमाम ने जानकारी दी कि विद्यालय में कई सालों से उर्दू शिक्षक की नियुक्ति प्रशासन की ओर से नहीं कि गयी है. वहीं विद्यालय में दो सौ विद्यार्थी उर्दू के है. ऐसे में प्लस टू समेत नौवीं और दसवीं के बच्चों को पढ़ाने के लिये बीएड प्रशिक्षु जिनका विषय उर्दू रहा हो, उनकी सहायता ली जा रही है. जिससे इनका प्रशिक्षण के साथ विद्यार्थियों को शिक्षक भी मिल जा रहे है.

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अंग्रेजी के शिक्षक पढ़ा रहे हैं उर्दू

सफदर ने बताया कि उन्होंने एमए अंग्रेजी में की है, 12 वीं तक उन्होंने उर्दू की तालीम ली. ऐसे में विद्यालय में उर्दू शिक्षक नहीं होने पर उन्होंने लगभग एक साल तक विद्यार्थियों को उर्दू पढ़ाया. हालांकि उनकी नियुक्ति अंग्रेजी शिक्षक के पद पर हुई थी.

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जहां उर्दू के विद्यार्थी नहीं, वहां है शिक्षक

चान्हो राजकीयकृत मध्य विद्यालय के शिक्षक मोमिन हक ने बताया कि उनके विद्यालय में एक भी विद्यार्थी उर्दू के नहीं है, लेकिन फिर भी उनकी नियुक्ति इस विद्यालय में कर दी गयी है. जबकि इस संबध में उन्होंने कई बार डीइओ को पत्र लिखा है, लेकिन अभी तक इस संबध में किसी जवाब तलब नहीं किया गया है.

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अन्य विषय लेने को मजबूर विद्यार्थी

राजकीयकृत विद्यालय के षिक्षकों से बात करने से जानकारी हुई कि कई बार शिक्षक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को अन्य विषय लेना पड़ता है. जिसमें संस्कृत, होम साइंस आदि है. जिससे संस्कृत लेने वाले विद्यार्थी विषय में पकड़ नहीं बना पाते और कई बार फेल हो जाते है.

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