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2.86 करोड़ वाले दो इलेक्ट्रिक शवदाह गृह जर्जर, अब 9 श्मशान घाटों के जीर्णोंधार पर खर्च होंगे 3.88 करोड़

नगर विकास विभाग ने निगम को स्वीकृति की राशि, सांसद के पहल पर भी निगम ने नहीं की कार्रवाई

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Ranchi: रांची नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत पड़ने वाले नौ श्मशान घाटों के जीर्णोद्धार के लिए नगर विकास विभाग ने 3.88 करोड़ रुपये स्वीकृति दी है. दूसरी ओर राजधानी में बने दो इलेक्ट्रिक शवदाह गृह (हरमू मुक्ति धाम और नामकोम स्थित घाघरा) आज जर्जर हालत में है. 2.86 करोड़ की लागत से बने इन क्रिमेटोरियम का निर्माण वर्ष 2005-2006 में हुआ था. इसमें घाघरा में बने क्रिमेटोरियम का जिम्मा निगम के पास न होकर अभी तक आरआरडीए के पास है.

वहीं हरमू मुक्ति धाम के पास बने इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का जिम्मा निगम के पास है. भाजपा सांसद महेश पोद्दार व ‘मुक्ति’ सामाजिक संगठन ने हरमू इलेक्ट्रिक शवदाह गृह को चालू करने के लिए पहल की थी. लेकिन इसके बाद भी विभाग ने इस और कोई विशेष प्रयास नहीं किया है.

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जीर्णोंधार के लिए मिले 3.88 करोड़ रुपये

मालूम हो कि तीन दिन पहले नगर विकास विभाग ने 9 श्मशान घाटों के जीर्णोधार के लिए निगम को 3.88 करोड़ की राशि स्वीकृति की थी. राशि का इस्तेमाल इन श्मशान घाटों में आम नागरिकों को बुनियादी सुविधा देने में किया जाएगा. विभिन्न घाटों में खर्च होने वाली राशि निम्न है

लोअर हटिया में स्वर्णरेखा नदी किनारे श्मशान घाट पर 71 लाख रुपये

• वार्ड संख्या-1 के टिकली टोला स्थित श्मशान घाट में करीब 6 लाख रुपये

• हेसांग स्थित श्मशान घाट पर करीब 55 लाख रुपये

• एयरपोर्ट के पीछे हेथु बस्ती स्थित श्मशान घाट में 40 लाख रुपये

• हरमू मुक्ति धाम में 40 लाख रुपये

• केतारी बगान स्थित श्मशान घाट में 28 लाख रुपये

• वार्ड संख्या 48 के महुआ टोली श्मशान घाट में 88 लाख रुपये

• वार्ड संख्या-48 के चडरी स्थित श्मशान घाट में 64 लाख रुपये

खड़हर में तब्दील घाघरा क्रिमेटोरियम

क्रिमेटोरिम के मुख्य गेट की स्तिथि

2.86 करोड़ की लागत से बने इन दो इलेक्ट्रिक शवदाह गृह एक लंबे अरसे से बंद पड़े हैं. इसमें घाघरा स्थित क्रिमेटोरियम मशीन और भवन पूरी तरह से खड़हर बन चुका है. विभाग के दिशा-निर्देश के बाद आरआरडीए ने इस भवन का निर्माण कराया. इसके अंदर शव जलाने के लिए दो मशीन भी लगायी गयी. लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए मुख्य सड़क से क्रिमेटोरियम मेन गेट तक पहुंचने का रास्ता नहीं बना. इसके शुरू नहीं होने के पीछे का तर्क देते हुए आरआरडीए अधिकारी का कहना है कि घाघरा सड़क पुल बनने के कारण ही इस क्रिमेटोरियम को नहीं चलाया जा सका है.

लेकिन यह तर्क हरमू मुक्ति धाम के लिए गलत साबित होता है. ऐसा इसलिए क्योंकि शहर के बीचों-बीच स्थित इस इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में न बिजली की समस्या है, न ही रास्ते की.

सांसद महेश पोद्दार ने भी की थी मांग

कुछ माह भी पहले भाजपा सांसद महेश पोद्दार ने भी हरमू इलेक्ट्रिक शवदाह गृह चालू करवाने की एक पहल की थी. ‘मुक्ति’ संस्था को लिखे पत्र को संज्ञान में लेते हुए उन्होंने मेयर आशा लकड़ा और डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय से इस क्रिमेटोरियम को चालू करने की मांग की थी. मुक्ति संस्था के प्रस्ताव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि जर्जर विद्युत शवदाह गृह की मरम्मत और पुराने बकाया बिजली बिल से मुक्त रखते हुए, इसके संचालन का दायित्व ‘मुक्ति’ को सौंपा जा सकता है.

घाघरा स्थित इलेक्ट्रिक क्रिमेटोरिम की जर्जर हालात

नगर विकास मंत्री ने कहा, निगम ही करेगा पहल

दोनों इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की स्थिति पर नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि इन श्मशान घाटों के जीर्णोंधार के लिए विभाग ने निगम को राशि स्वीकृत की है. अब निगम को अपने स्तर पर पहल करनी होगी कि कैसे हरमू इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में काम शुरू किया जाए. जहां तक घाघरा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की बात है, तो आरआरडीए ही इस ओर कोई विशेष पहल कर सकता है.

टेंडर में किसी ने नहीं की पहल: मेयर

हरमू इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की स्थिति पर मेयर आशा लकड़ा का भी बयान बहुत ही हास्यास्पद लगता है. न्यूज विंग से बातचीत में कहा कि इसे चलाने के लिए अभी तक किसी भी संस्था ने कोई टेंडर नहीं डाला है. इस कारण इसे चलाने में निगम को परेशानी हो रही है. जैसे ही कोई इसके लिए आगे आएगा, निगम की तरफ से इसे शुरू करने की पहल की जाएगी.

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